
यूपी में सरकारी स्कूलों की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बीच, स्कूलों में वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स और कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली उजागर करने वाले वीडियो बनाने पर कई कंटेंट क्रिएटर्स और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन इसे निजता का उल्लंघन और भ्रामक बता रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे सरकारी विफलता छिपाने की कोशिश मान रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली के खिलाफ छात्रों और कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने का अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने इसे भ्रामक बताते हुए कई लोगों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और देशभर में जेन ज़ी के प्रदर्शनों के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से जेन अल्फ़ा के सड़कों पर उतरने की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जेन अल्फ़ा 2010 के आसपास और उसके बाद पैदा हुई पीढ़ी है.
बीते एक महीने में यह पीढ़ी जगह-जगह प्रदर्शन करती दिखाई दी. वो भी केवल एक या दो राज्यों में नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों से ऐसे वाकये सामने आए जिनमें बच्चे अपने स्कूल की समस्याओं को लेकर आवाज़ उठाते सुनाई और दिखाई दिए.
किसी की शिकायत स्कूल में शिक्षकों की कमी थी, तो किसी की स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की, कोई मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठाता नज़र आया तो कोई स्कूल तक पहुंचाने वाली सड़क की ख़राब हालत के ख़िलाफ़ बोलता.
उत्तर प्रदेश, जो कि देश की सबसे अधिक आबादी वाला सूबा है, वहां से भी ऐसे कई मामले सामने आए.
अब राज्य के कई स्कूलों की बदहाली दिखाने वाले कई कंटेट क्रिएटरों और यूट्यूबर्स पर कार्रवाई की बातें सामने आ रही हैं.
इनमें से कई लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.
पुलिस ने इन पर सरकारी काम में बाधा डालने और बच्चों की निजता भंग करने जैसे आरोप लगाए हैं, जबकि जिन लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की गई है उनका आरोप है कि सरकारी अव्यस्था उजागर करने की उन्हें सज़ा दी जा रही है.
17 अगस्त को राजधानी लखनऊ में तेज़ बारिश के बीच जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की करीब 250 छात्राएं स्कूल से लगभग ढाई किलोमीटर दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास तक पहुंच गईं. छात्राओं ने हाथों में हाथ डालकर मानव श्रृंखला बनाई और सड़क पर बैठ गईं. उनकी सबसे बड़ी शिकायत शिक्षकों की कमी थी.
28 जुलाई को फतेहपुर के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में क़रीब एक हज़ार छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया. उनकी शिकायतों में जर्जर कक्षाएं, टपकती छत, पंखों की कमी, साफ़ पानी, फ़र्नीचर और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल थीं.
11 अगस्त को हमीरपुर में चांदपुर और आसपास के गांवों के 200 से ज़्यादा स्टूडेंट और करीब 50 अभिभावक लगभग पांच किलोमीटर की तिरंगा यात्रा करके कलेक्ट्रेट पहुंचे. उनकी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी.
कन्नौज के अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में करीब सौ स्टूडेंट ने हॉस्टल के अंदर खुद को बंद कर भूख हड़ताल की. स्टूडेंट ने खाने की गुणवत्ता, पानी और हॉस्टल की व्यवस्था पर सवाल उठाए.
19 अगस्त को उन्नाव के मोहान स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के 200 से ज़्यादा स्टूडेंट ने सड़क जाम कर दी. स्टूडेंट ने शिक्षकों की कमी, ख़राब खाना, पीने के पानी और हॉस्टल की व्यवस्था को लेकर शिकायत की.
22 अगस्त को कानपुर के घाटमपुर इलाके के भटपुरवा सामूही गांव में प्राथमिक स्कूल के बच्चे स्कूल के बाहर बैठ गए. उनकी मांग थी कि स्कूल की नई इमारत बनाई जाए.
इन प्रदर्शनों और सामने आ रही स्कूलों की बदहाल तस्वीरों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने का एलान किया. आम आदमी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश में इसी नाम से अभियान शुरू किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से स्कूलों की स्थिति रिकॉर्ड कर भेजने को कहा.
प्रशासन ने इसी बीच उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों के प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर आदेश जारी कर दिए. कम से कम सात ज़िले- हापुड़, अयोध्या, बलरामपुर, आगरा, बलिया, बस्ती और आज़मगढ़ में बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे आदेश जारी किए हैं.
हाथरस के कुलदीप यादव उन लोगों में हैं जिनकी इस मामले में गिरफ़्तारी की पुष्टि हुई है. उन्होंने सिकंदराराऊ के नावलि सिविलियन विद्यालय में कथित बदहाली दिखाते हुए वीडियो बनाया था. खंड शिक्षा अधिकारी विजय चौहान ने कुलदीप यादव के ख़िलाफ़ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई.
मेरठ के सरधना थाने में सुरूरपुर के प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर क्षेत्र के उच्च प्रथामिक विद्यालय की छवि को कथित तौर पर धूमिल करने के आरोप में बीते 22 अगस्त को एफ़आईआर दर्ज करवाई थी. एडवोकेट संयम पांचाल और अयान मिर्ज़ा को गिरफ्तार किया गया था.
नोएडा में आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश युवा विंग के अध्यक्ष पंकज अवाना के ख़िलाफ़ सेक्टर-51 के होशियारपुर गांव स्थित सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने के आरोप में एफ़आईआर हुई.
देवरिया में युवा कार्यकर्ता रजत सिंह के ख़िलाफ़ गौरीबाज़ार थाने में एफ़आईआर दर्ज हुई. उन्होंने 16 अगस्त को डमर बिस्वा गांव के प्राथमिक स्कूल का वीडियो बनाया था.
अमेठी में भी स्कूल की बदहाली से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है. कन्नौज के गुगरापुर स्थित पीएम श्री उत्तर प्रदेश कंपोजिट स्कूल में भी अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
रामपुर में बच्चों के नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला दर्ज हुआ है. मथुरा के स्थानीय पत्रकार सुरेश सैनी ने बताया कि रवि कुमार नाम के एक शख़्स के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर की तहरीर दी गई है.
प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी कहा कि कुछ लोग सिर्फ़ नकारात्मकता तलाशकर विभाग में काम कर रहे लोगों का मनोबल गिराने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार ने दूसरी तरफ क़रीब 40 हज़ार बेसिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए 14 बिंदुओं की जांच सूची भी जारी की है.
विपक्ष का कहना है कि सरकार एक तरफ स्कूलों की शिकायतों की जांच और सुविधाएं सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन लोगों पर क़ानूनी कार्रवाई हो रही है जो इन्हीं स्कूलों की तस्वीरें सार्वजनिक कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा है कि सरकार एफ़आईआर के ज़रिए डर पैदा करने की कोशिश कर रही है.
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स्कूलों में वीडियो बनाने पर प्रतिबंध को लेकर अदालती हस्तक्षेप की संभावना।
Possible · Within months
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