Breaking
ESTreasure of Villena, one of Europe's most valuable Bronze Age collections, is stolenTRŞampiyonlar Ligi 2026-2027 sezonu kura çekimi torbaları belli olduFRJudicial news and local incidents: Caen and Saint-DenisCRYPTO-FRNvidia acquires Hugging Face for $12.9 billionDESturzflut an der Grenze zwischen Nepal und China fordert mindestens 160 TodesopferAUFire at Pakistan hospital kills 14 infantsFRNetflix to air exclusive preview of GTA 6CN尼泊爾與中國邊境山區發生大規模山崩與洪災,至少165人喪生ESJabaroot hacker group leaks data of 70,000 Moroccan security agentsESScientists warn of risk of natural dams after flood in the HimalayasESTreasure of Villena, one of Europe's most valuable Bronze Age collections, is stolenTRŞampiyonlar Ligi 2026-2027 sezonu kura çekimi torbaları belli olduFRJudicial news and local incidents: Caen and Saint-DenisCRYPTO-FRNvidia acquires Hugging Face for $12.9 billionDESturzflut an der Grenze zwischen Nepal und China fordert mindestens 160 TodesopferAUFire at Pakistan hospital kills 14 infantsFRNetflix to air exclusive preview of GTA 6CN尼泊爾與中國邊境山區發生大規模山崩與洪災,至少165人喪生ESJabaroot hacker group leaks data of 70,000 Moroccan security agentsESScientists warn of risk of natural dams after flood in the Himalayas
NewsgatherNewsgather
All StoriesWorldSportsFinanceTechScience
Sign In
All StoriesWorldSportsFinanceTechScienceHealthCultureClimatePoliticsSpace
NewsgatherNewsgather

Real-time global news intelligence. Curated by humans, powered by data.

Sections

All StoriesWorldSportsFinanceTechScience

More

HealthCultureClimatePoliticsSpace

Company

AboutEditorial StandardsAdvertisingCareersPressContact

©️ 2026 Newsgather. A product by All Software 24. All rights reserved.

Privacy PolicyCookie PolicyImprintTerms of UseContent and Editorial PolicyRemoval RequestAdvertising PolicyContact
Back|कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ट्रंप के टैरिफ़ नीति के ख़िलाफ़ सख़्त रणनीति
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ट्रंप के टैरिफ़ नीति के ख़िलाफ़ सख़्त रणनीति
Developing
BBC हिंदी·3 hours ago·Politics·4 min read·🇮🇳India

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ट्रंप के टैरिफ़ नीति के ख़िलाफ़ सख़्त रणनीति

कनाडा ने 'डॉलर के बदले डॉलर' की नीति अपनाई, जबकि भारत की रणनीतिक मजबूरियों पर बहस छिड़ी

Quick Look

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ दबाव को ख़ारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया है। यह लेख कनाडा के कड़े रुख और भारत की तुलनात्मक रणनीतिक मजबूरियों का विश्लेषण करता है।

AI-generated summary

Why It Matters

कनाडा की अर्थव्यवस्था का 77% निर्यात अमेरिका पर निर्भर है। मार्क कार्नी ने ट्रंप के टैरिफ़ के जवाब में 'डॉलर के बदले डॉलर' की नीति अपनाई है।

Font size

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव की रणनीति को न केवल खुलेआम ख़ारिज कर रहे हैं बल्कि जवाब भी उसी रूप में दे रहे हैं.

कार्नी की नीति कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से बिल्कुल अलग है.

मार्क कार्नी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ़ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ एक स्पष्ट रेड लाइन खींच दी है.

कनाडा की अर्थव्यवस्था अपने शक्तिशाली पड़ोसी अमेरिका के साथ गहराई से जुड़ी हुई है. ऐसे में कनाडा से आने वाले क़रीब 20 अरब डॉलर के सामान पर ट्रंप के 50 फ़ीसदी टैरिफ़ के जवाब में कार्नी की "डॉलर के बदले डॉलर" वाली जवाबी कार्रवाई से सीमा के दोनों ओर कारोबार और कामगारों को नुक़सान पहुँचना तय है.

प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि अमेरिका की अन्य "अस्वीकार्य" मांगों में कनाडा की दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते करने की क्षमता को सीमित करना भी शामिल है. उनका कहना है कि ऐसा करना कनाडा की संप्रभुता को कमज़ोर करने के बराबर होगा.

पीएम कार्नी सात महीने पहले दावोस में किए गए अपने आकलन पर अमल करते दिख रहे हैं. उन्होंने तब कहा था कि "नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था" कमज़ोर पड़ रही है.

मार्की कार्नी ने इसी साल जनवरी में दावोस में कहा था, "हमें यह याद दिलाया जाता है कि हम महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा के युग में जी रहे हैं. नियमों पर आधारित व्यवस्था कमज़ोर पड़ रही है. शक्तिशाली देश वही करते हैं जो कर सकते हैं और कमज़ोरों को सहना पड़ रहा है.'' कार्नी ने मिडिल पावर वाले देशों से साथ आने की अपील की थी.

ट्रंप के टैरिफ़ का असर कनाडाई वाइन, डेयरी उत्पादों से लेकर फर्नीचर, कपड़े, सीमेंट और हॉकी उपकरणों तक कई तरह के सामान पर पड़ रहा है.

मार्क कार्नी की रणनीति क्या है?

ट्रंप की धमकियों के बाद शुरू हुए 'बाय कैनेडियन' अभियान की लोकप्रियता ने पहले ही दिखा दिया है कि बड़ी संख्या में कनाडाई अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनौती देने के अपनी सरकार के फ़ैसले का समर्थन करते हैं. ट्रंप ने तो कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने तक की बात कही है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कनाडा ने जिस तरह से ट्रंप की नीतियों का जवाब दिया, वैसे भारत की मोदी सरकार ने क्यों नहीं दिया? भारत क्यों ट्रंप की हर नीतियों को सह रहा है और जवाब नहीं दे रहा है?

ज़ियोपॉलिटिक्स की गहरी समझ रखने वाले ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि मार्क कार्नी ने जो हिम्मत दिखाई है, वैसी हिम्मत बहुत कम नेता कर पाए.

चेलानी 22 अगस्त को एक्स पर लिखा था, ''ट्रंप प्रशासन के साथ हर बातचीत जोखिम से भरा शक्ति-परीक्षण होती है, क्योंकि ट्रंप लगातार अपने ही तय किए लक्ष्य और शर्तें बदलते रहते हैं.''

''मार्क कार्नी ने वह क़दम उठाया है, जिसकी हिम्मत बहुत कम नेता कर पाए हैं. उन्होंने कनाडा के लिए ख़राब समझे जाने वाले व्यापार समझौते से पीछे हटने का फ़ैसला किया और अमेरिकी टैरिफ़ का "डॉलर के बदले डॉलर" जवाब देने का संकल्प लिया. कनाडा के सामने ट्रंप का प्रस्ताव वास्तव में कोई वास्तविक व्यापार समझौता नहीं था, बल्कि एक संरक्षणवादी व्यवस्था थी, जिसमें स्थायी टैरिफ़ पहले से ही शामिल थे. यह काफ़ी हद तक उस व्यवस्था जैसा है, जिसका संकेत ट्रंप ने भारत के सामने भी दिया है.''

अमेरिका के साथ भारत की अंतरिम ट्रेड डील हुई है लेकिन यह डील भी यूएस के पक्ष में ज़्यादा झुकी हुई है. राजनीति विज्ञानी भरत कर्नाड ने इसी साल 25 जनवरी को लिखा था कि डोनाल्ड ट्रंप के प्रति नरेंद्र मोदी की संयमित प्रतिक्रिया रणनीतिक परिपक्वता नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण है.

कर्नाड ने लिखा था, ''भारत को वॉशिंगटन पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए, बातचीत में ज़्यादा सख़्त रुख़ अपनाना चाहिए और वैकल्पिक साझेदारियां बनानी चाहिए.''

मार्क कार्नी की तारीफ़ करते हुए कर्नाड ने लिखा था, ''कनाडा का रुख़ इसलिए ख़ास है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, कनाडा के कुल निर्यात का 77 फ़ीसदी अमेरिका में होता है. अपने देश की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की इतनी मज़बूत पकड़ के बावजूद, कार्नी ने ट्रंप को चुनौती दी और उन्हें जो करना है, करने की चुनौती दी. इससे पता चलता है कि कनाडा अब ट्रंप और उनकी लगातार चलने वाली मनमानी से तंग आ चुका है.''

कनाडा की अहमियत और भारत की मजबूरियां

भरत कर्नाड की मुख्य आलोचना यह है कि ''भारत कनाडा की तुलना में अमेरिका पर कम आर्थिक रूप से निर्भर होने के बावजूद ट्रंप के टैरिफ़ दबाव के सामने जवाबी कार्रवाई के बजाय उन्हें रियायतें दे रहा है. ट्रंप की नीति को अस्थायी बदलाव नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे अमेरिकी विदेश नीति में लंबे समय के बदलाव के रूप में देखना चाहिए. इसलिए भारत को एक स्थिर और व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बजाय अमेरिका की ओर से बार-बार आने वाली मांगों और दबावों के लिए तैयार रहना चाहिए.''

कनाडा और अमेरिका के बीच कारोबारी संबंध बहुत गहराई से जुड़े हैं. कनाडा की नाराज़गी का सीधा असर अमेरिकी उत्पादकों, सीमा से लगे राज्यों के हितों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है.

कार्नी ने अब सार्वजनिक रूप से बातचीत रोक दी है और "डॉलर के बदले डॉलर" जवाबी टैरिफ़ लगाने का वादा किया है.

भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन अमेरिका के साथ उसका आर्थिक संबंध अलग तरह से बना हुआ है.

भारत के लिए मामला सिर्फ़ टैरिफ़ विवाद तक सीमित नहीं है. उसे तकनीक, रक्षा, निवेश, वीज़ा, ऊर्जा और चीन के मुक़ाबले इंडो पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन जैसे कई मुद्दों से जुड़े व्यापक संबंधों को संभालना है.

भारत के लिए चीन बड़ी रणनीतिक चुनौती है. भारत को इंडो पैसिफिक में अमेरिका के साथ रक्षा, ख़ुफ़िया, तकनीक और कूटनीतिक तालमेल जारी रखने की ज़रूरत है. इसलिए ऐसा टकराव, जो भावनात्मक रूप से संतोषजनक हो सकता है लेकिन रणनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है.

मोदी के लिए ज्यादा शायद संभावित रणनीति यह है कि विवाद को सीमित रखा जाए, बड़े रणनीतिक संबंध को बचाया जाए और ट्रंप के साथ टकराव को व्यक्तिगत मुक़ाबले में बदले बिना रियायतें हासिल की जाएं.

भारत की समझ

कनाडा अमेरिका को ऊर्जा और पोटाश जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्यात सीमित कर सकता है. पोटाश उर्वरक में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख घटक है.

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने सोमवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ट्रेड वार गहरा होता है तो कनाडा अमेरिका को बिजली का निर्यात बंद कर सकता है. ओंटारियो न्यूयॉर्क, मिशिगन और मिनेसोटा समेत अमेरिका के कई राज्यों को बिजली की आपूर्ति करता है.

कार्नी ने भी सोमवार को फोर्ड की बात का समर्थन करते हुए पत्रकारों से कहा कि कोई भी विकल्प बातचीत की मेज से बाहर नहीं है. भारत के पास ऐसे विकल्प नहीं हैं कि वह आयात शुल्क बढ़ा दे तो सीधे अमेरिकी प्रभावित होंगे क्योंकि अमेरिका के पास और भी सुलभ विकल्प मौजूद हैं.

जयंत दासगुप्ता विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के राजदूत (2010-14) रह चुके हैं.

पिछले साल 28 अगस्त को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे लेख में उन्होंने इस बात को समझाने की कोशिश की थी कि भारत के लिए अमेरिका पर टैरिफ़ लगाने की राह आसान क्यों नहीं है?

जयंत दासगुप्ता ने लिखा था, "भारत के बड़े आयात अमेरिका से खनिज ईंधन और तेल, कटे और बिना घिसे हीरे, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक और फल-सूखे मेवे हैं. इनमें से ज़्यादातर उत्पाद कच्चे माल या इंटरमीडिएट स्तर के होते हैं. अमेरिका पर टैरिफ़ लगाकर जवाबी कार्रवाई करने से भारत की घरेलू और निर्यात दोनों बाज़ारों को ही नुक़सान होगा. इसके अलावा, टैरिफ़ पर जवाबी कार्रवाई से सर्विस सेक्टर में भी नुक़सान हो सकता है, जिसे टालना ज़रूरी है."

जयंत दासगुप्ता का मानना है, "चीन को छोड़कर बाक़ी बड़े देशों ने अमेरिकी दबाव मान लिया है और 10 फ़ीसदी (ब्रिटेन के लिए) या उससे ज़्यादा टैरिफ़ झेलने के लिए तैयार हो गए हैं, इसलिए भारत को निकट भविष्य में कोई राहत मिलने की संभावना बहुत कम है."

जयंत दासगुप्ता ने लिखा था, ''भारत का निर्यात बास्केट बहुत व्यापक नहीं है और यह केवल कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित है. हम अमेरिका पर भी काफ़ी निर्भर हैं, जो हमारे कमोडिटी निर्यात का 17 फ़ीसदी हिस्सा है. यूरोपीय संघ पर भी हमारी काफ़ी निर्भरता है. सबसे महत्वपूर्ण काम जो किया जाना चाहिए, वह है हमारे निर्यात उत्पादों और निर्यात के बाज़ारों, दोनों में विविधता लाना."

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • कनाडा द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ़ लागू करना

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • ?क्या कनाडा वास्तव में बिजली निर्यात बंद करेगा?
  • ?भारत अपनी रणनीतिक निर्भरता को कैसे कम करेगा?

Related Topics

People
Organizations
Places
Topics
This article was originally published by BBC हिंदी.

Quick Look

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ दबाव को ख़ारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया है। यह लेख कनाडा के कड़े रुख और भारत की तुलनात्मक रणनीतिक मजबूरियों का विश्लेषण करता है।

AI-generated summary

Story signals

Emotional intensity
High
News value
High
Global impact
Global
Urgency
Developing
Follow-up likelihood
Very likely
Relevance window
Weeks

Source & Reliability

Source
BBC हिंदी
Story type
Analysis
Source quality
Full
Published
3 hours ago
Last updated
3 hours ago

Related Stories

More on this topic
Video of Shahjahanpur Municipal Corporation councillors sparks corruption controversy
Developing·3 hours ago

Video of Shahjahanpur Municipal Corporation councillors sparks corruption controversy

A viral video allegedly showing Shahjahanpur municipal councillors swearing on the Quran and Gangajal to divide civic funds has triggered a political outcry. Municipal commissioner Saumya Gurjar has launched an investigation into the incident.

Times of India
1 min read
उत्तर प्रदेश: सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने वाले वीडियो बनाने वालों पर क्यों हो रही है कार्रवाई?
Developing·3 hours ago

उत्तर प्रदेश: सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने वाले वीडियो बनाने वालों पर क्यों हो रही है कार्रवाई?

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली उजागर करने वाले वीडियो बनाने पर कई कंटेंट क्रिएटर्स और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन इसे निजता का उल्लंघन और भ्रामक बता रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे सरकारी विफलता छिपाने की कोशिश मान रहे हैं।

BBC हिंदी
7 min read
Tamil Nadu to release Mettur Dam water for 45 days starting September 1
Politics·3 hours ago

Tamil Nadu to release Mettur Dam water for 45 days starting September 1

Tamil Nadu will release water from Mettur Dam for 45 days starting September 1 to support delta irrigation and drinking water needs. The decision comes amid ongoing Cauvery water-sharing disputes with Karnataka, currently under Supreme Court review.

Economic Times
2 min read
ICE Arrests Reach New High in July Under Trump Administration
Politics·18 hours ago

ICE Arrests Reach New High in July Under Trump Administration

ICE arrested 49,571 individuals in July, the highest monthly total of President Trump's second term. The 15% increase from June reflects a strategic shift toward traffic stops and local law enforcement partnerships rather than high-profile raids.

TOI World
2 min read
न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया
Developing·21 hours ago

न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया

न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने 29 अगस्त को मेडिसन स्क्वेयर गार्डन में होने वाले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया है। ममदानी ने इसे बहिष्कारवादी सोच का हिस्सा बताया, जबकि आयोजकों ने इसे 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश देने वाला कार्यक्रम कहा है।

BBC हिंदी
4 min read
Cockroach Janta Party Announces Renewed Protest March in Delhi for September 5
Developing·yesterday

Cockroach Janta Party Announces Renewed Protest March in Delhi for September 5

The Cockroach Janta Party (CJP) has scheduled a protest march in Delhi for September 5, alleging the government failed to fulfill commitments made on July 25, including compensation for students' families and the withdrawal of FIRs against protesters.

Times of India
2 min read
More on this topic
मार्क कार्नी
डोनाल्ड ट्रंप
कनाडा
मार्क कार्नी
डोनाल्ड ट्रंप
जस्टिन ट्रूडो
नरेंद्र मोदी
विश्व व्यापार संगठन
कनाडा
अमेरिका
भारत
ओंटारियो
डोनाल्ड ट्रंप
कनाडा
भारत
टैरिफ़
व्यापार युद्ध
रणनीति
मार्क कार्नी
मार्क कार्नी