
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 900 से अधिक लोगों की मौत हुई और लगभग 4000 लापता हैं, जिनमें हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे 933 से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। बचाव अभियान जारी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय टीमें भी मदद कर रही हैं।
AI-generated summary
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारी फंस गए हैं। बचाव अभियान जारी है, जिसमें सेना और अंतरराष्ट्रीय टीमें शामिल हैं।
प्रकाशित 6 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है जिसमें 900 से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और तक़रीबन चार हज़ार लोग लापता हैं.
इस दौरान राहत के साथ-साथ देश में बचाव अभियान भी ज़ोरों पर चल रहा है. ये बचाव अभियान नेपाल के अलग-अलग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की अलग-अलग सुरंगों में चलाया जा रहा है.
ऐसा अनुमान है कि नेपाल की अलग-अलग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में तक़रीबन 933 लोग फंसे हुए हैं.
बचावकर्मी अपर त्रिशूली 1, त्रिशूली 3ए और त्रिशूली 3बी प्रोजेक्ट की सुरंगों से लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशों में लगे हुए हैं.
ये प्रोजेक्ट देश के लिए बिजली बनाने का एक बड़ा ज़रिया हैं, जिनमें कुछ आपस में जुड़ी हुई सुरंगें हैं.
त्रिशूली 3बी प्रोजेक्ट, 3ए से आने वाले पानी का इस्तेमाल करता है. अपर त्रिशूली 1 नदी पर सबसे ऊँचा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है. बाढ़ आने के समय इसका कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था.
रविवार को बचावकर्मियों ने 3ए प्रोजेक्ट की सुरंग में घुसने के लिए एक बड़ा छेद बनाया था.
नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया था कि बचावकर्मियों की टीम ने सुरंग में काफ़ी आवाज़ें दी थीं लेकिन अंदर से किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.
छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें
सबसे अधिक पढ़ी गईं
समाप्त
किस तरह की कोशिशें की जा रही हैं?
पूरे नेपाल के तक़रीबन 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी सुरंगों में कर्मचारियों के फंसे होने का शक है. नेपाली अधिकारी अब पहाड़ियों में बम धमाके करने की कोशिश कर रहे हैं.
सोमवार की सुबह करीब 2 बजे रसुवा में त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का रास्ता खोलने की कोशिश में साइट पर एक कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया.
देश के उत्तरी हिस्से में अगले कुछ दिनों में और बारिश का अनुमान है. भारी बारिश से बचाव का काम मुश्किल हो रहा है.
बीबीसी नेपाली संवाददाता संजय ढकाल ने बताया है कि कई जवान रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में गए हैं, लेकिन उन्हें वहां कोई नहीं मिला. उन्होंने सुरंग के अंदर खोजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था.
अब, भारत, चीन और यहां तक कि दक्षिण कोरिया से भी कई रेस्क्यू टीमें सुरंग के रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए पहुंच गई हैं.
नेपाल की सरकार का कहना है कि उसे टेक्निकल मामलों में, जैसे सुरंग में रेस्क्यू करने में, और लाशों की डीएनए पहचान में भी बहुत मदद की ज़रूरत होगी.
जिनके अपने टनल में हो सकते हैं?
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया
देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
एपिसोड
समाप्त
बीबीसी ने प्रिया खरेल से बात की, जो अपने भाई के बारे में जानकारी ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही हैं. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वह किसी टनल में फंसे होंगे.
उनके भाई, मिलन खरेल, अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियर हैं.
उन्होंने कहा, "जो लोग वापस आए हैं, उन्होंने कहा है कि टनल में लोग हैं. इसलिए मुझे उम्मीद है कि अगर आर्मी उन्हें जल्द ही ढूंढ लेती है, तो उन्हें बचाया जा सकेगा."
लेकिन, उन्हें अपने भाई की हालत के बारे में कहीं से भी जानकारी नहीं मिल पाई है. उन्होंने कहा, "हमने लापता, बचाए गए और मरे हुए लोगों की लिस्ट देखने की कोशिश की, लेकिन कहीं भी कोई नाम नहीं था."
एक महिला, जिनके पति के बारे में माना जा रहा है कि वो नेपाल के त्रिशूली-3ए साइट पर एक हाइड्रोपावर टनल के अंदर फंसे हो सकते है, उनका कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि उनके पति ज़िंदा हैं.
सीता पांडे ने नेपाली अखबार कांतिपुर को बताया, "मुझे अभी भी 50% उम्मीद है कि वह ज़िंदा हैं क्योंकि अंदर एक ऑक्सीजन सिस्टम है."
"लेकिन हर घंटे के साथ, यह उम्मीद कम होती जा रही है."
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी और इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, पांडे के पति जिबलाल अधिकारी सहित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े कम से कम 897 लोग अभी भी लापता हैं.
रेस्क्यू करने वालों ने वीकेंड में टनल में हवा भरना शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ परिवारों का कहना है कि यह पहले किया जाना चाहिए था.
जीबन खड़का के रिश्तेदार भी प्लांट के अंदर फंसे हैं. उन्होंने अखबार कांतिपुर को बताया, "जितना ज़्यादा समय लगेगा, हमारी उम्मीद उतनी ही कम होती जाएगी. यह ऑपरेशन बहुत तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि हर सेकंड हमारे लिए मायने रखता है. यह बहुत ही धीमा ऑपरेशन है."
जो लोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बच गए
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, बाढ़ आने के बाद मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे शिवा गिरी और छह अन्य लोगों के पास ऊपर चढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
ये लोग घरों, बस्तियों और अन्य ढाँचे पानी में समाते देख रहे थे. ये लोग रसुवा स्थित मैलुंग जलविद्युत परियोजना से पहाड़ी की ओर भाग रहे थे.
गिरी ने नेपाल न्यूज़ वेबसाइट को बताया कि उनके कई सहकर्मी बह गए, जिनमें उनका चचेरा भाई भी शामिल था. शहरों तक जाने वाले सामान्य रास्तों से कट जाने के बाद शिवा और उनके साथी लगभग 12 घंटे तक जंगल के रास्ते चलते रहे और आख़िरकार एक गुफा में रात बिताई.
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक़, 279 लोगों को सुरंगों से बचाया जा चुका है.
मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में तकनीकी कर्मचारी गिरी ने बताया कि अगली सुबह उनका समूह परियोजना स्थल की ओर नीचे उतरा, ख़ुद को विस्थापित के रूप में दर्ज कराया और बचाव की अपील की.
नेपाल न्यूज़ के मुताबिक़, आख़िरकार नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुँचाया, जहाँ गिरी का इलाज त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा था.
अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियर संदीप राणा ने भी बढ़ते बाढ़ के पानी से बचने के लिए लगभग 100 अन्य कर्मचारियों के साथ एक पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई.
राणा ने सोमवार को द राइज़िंग नेपाल को बताया कि जब वह प्रोजेक्ट कार्यालय में थे, तभी आपातकालीन सायरन बज उठा.
कर्मचारी अपने निर्धारित इकट्ठे होने वाली जगह तक पहुँच भी नहीं पाए थे कि उन्हें बताया गया कि लगभग 12 किलोमीटर ऊपर स्थित बांध स्थल पर भीषण बाढ़ आ गई है.
इसके बाद समूह ने ऊँचाई की ओर चढ़ना शुरू किया और आख़िरकार त्रिशूली नदी से लगभग 30 से 35 मीटर ऊपर एक स्थान तक पहुँच गया. वहाँ से उन्होंने परियोजना कार्यालय, शिविरों और सड़कों को बाढ़ के पानी में समाते हुए देखा।
राणा ने अखबार को बताया, "हमें लगातार ऊपर चढ़ना पड़ रहा था और साथ ही गिरते पत्थरों से भी बचना था. रुककर सोचने का समय ही नहीं था."
समूह सात से आठ घंटे तक चढ़ाई करता रहा और शाम लगभग चार बजे ग्रांग क्षेत्र में एक सड़क तक पहुँचा. जब तक राणा कालिकास्थान पहुँचे, तब तक उनके साथ केवल दो लोग रह गए थे, जबकि बाकी लोग रास्ते में बिछड़ चुके थे.
रामचंद्र नाम के एक अन्य ज़िंदा बचे शख़्स ने त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सुरंग के भीतर रहकर बाढ़ का सामना किया. रातोपाटी समाचार पोर्टल के मुताबिक़, रामचंद्र और उनके पाँच सहकर्मी सुरंग के निकास द्वार से कई सौ मीटर दूर थे जब पानी सुरंग के भीतर घुसने लगा.
उन्होंने ख़ुद को बहने से बचाने के लिए सुरंग की छत के साथ लगी लोहे की सीढ़ी को पकड़ लिया. रामचंद्र ने बताया कि छह लोगों ने ख़ुद को स्थिर रखने के लिए टिन की एक चादर का सहारा लिया और लगभग छह घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी की ओर बढ़ते रहे. उन्होंने कहा, "हम छह लोग थे और बाद में सुरंग के दरवाज़े पर हमें एक और शख़्स मिला."
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
AI outlook — possibilities, not facts
बचाव अभियान अगले कुछ दिनों में और तेज़ी से चलेगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय टीमें मदद कर रही हैं।
Likely · Within days
भारी बारिश के कारण बचाव कार्य में और देरी हो सकती है।
Possible · Within days
A glacier collapse on the Nepal-China border on August 26 killed hundreds and left thousands missing, including many Indians, revealing disparities in disaster data sharing as Nepal calls for real-time information from China's advanced monitoring systems amid political restrictions in Tibet.

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए भीषण फ़्लैश फ़्लड के बाद सामने आईं पांच तस्वीरें तबाही और बचाव के प्रयासों को दिखाती हैं, जिसमें मलबे में बदला इलाक़ा, ज़िंदगी बचाने की जद्दोजहद और उम्मीद की तलाश करते बचावकर्मी शामिल हैं।
Russian President Vladimir Putin met Chinese President Xi Jinping on the sidelines of the SCO summit in Bishkek, Kyrgyzstan, where they discussed strengthening bilateral ties, expanding cooperation in artificial intelligence and digital innovation, and making the visa-free regime permanent. The leaders also addressed international and regional issues, with Xi emphasizing reform of global governance and a multipolar world, while Putin highlighted AI collaboration and noted a 43% increase in tourist flows due to visa-free travel.
Italy's population is projected to decline from 58.9 million in 2025 to 55 million by 2050 and further to 45.8 million by 2080, driven by record-low births and a rapidly ageing population, with the elderly share rising to 34.5% by 2050, posing challenges to the economy and welfare system, according to ISTAT projections.
Former Afghan army chief of staff Haibatullah Alizai, who resisted the Taliban takeover in 2021, now drives for Uber in Washington DC after being granted US asylum. He spoke about his evacuation, separation from family in India, and enduring hope in the US-Afghan partnership despite the Taliban's return to power.

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान जारी है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए तैनात की गई हैं। सरकार ने बेली ब्रिज, फोरेंसिक तकनीक और राहत सामग्री के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समन्वय किया है।