
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और उनके प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुकने पर तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया था, हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल पहले ही तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को न्यूयॉर्क से रवाना हो गया था।
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अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता की लंबी इतिहास है, जिसमें 1953 का तख्तापलट, 1979 की क्रांति और बंधक संकट शामिल हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को तय समय से पहले वापस भेजने की बात कही जा रही है.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क में उनके तय कार्यक्रम से पहले ही वहाँ से जाने का आदेश दिया था. एजेंसी को दो अमेरिकी अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची को अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका आने के लिए वीज़ा दिया था. कड़ी शर्तों के साथ जारी यह वीज़ा संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक में शामिल होने के लिए दिया गया था.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने के एक दिन बाद न्यूयॉर्क से रवाना हो गए थे. लेकिन विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची न्यूयॉर्क में रुके हुए थे.
बताया गया कि वह अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल होने वाले थे. इन वार्ताओं में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने, संघर्ष ख़त्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू करने जैसे मुद्दे शामिल थे.
एपी के मुताबिक़, अराग़ची बुधवार तक न्यूयॉर्क में रुकने वाले थे.
ईरान ने दिया जवाब
हालांकि ईरान ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज किया है. यूएन में ईरानी मिशन ने एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट से एक पोस्ट में कहा है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय झूठी ख़बरें फैला रहा है.
ईरानी मिशन ने अपनी पोस्ट में लिखा है, ''ईरानी प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम न्यूयॉर्क से उसी कार्यक्रम के अनुसार रवाना हुआ, जिसकी जानकारी 17 सितंबर को पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भी दे दी गई थी. कुछ हासिल न कर पाने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय अब निराधार और बेबुनियाद ख़बरें फैलाने का सहारा ले रहा है.''
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एपी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''क़तर के मध्यस्थों के साथ हुई बैठकों में बहुत कम प्रगति होने के बाद रुबियो ने अपना धैर्य खो दिया. दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़, सोमवार को उन्होंने ईरानी पक्ष से कहा कि अराग़ची और उनके प्रतिनिधिमंडल को तुरंत न्यूयॉर्क छोड़ना होगा."
"अधिकारियों ने यह जानकारी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर दी. एक अधिकारी के मुताबिक़, रुबियो का मानना था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल "ज़रूरत से ज़्यादा समय तक अमेरिका में रह चुका है" और चूंकि संयुक्त राष्ट्र में उच्चस्तरीय बैठकें ख़त्म हो चुकी थीं, इसलिए उसे वहाँ से चले जाना चाहिए.''
ईरानी प्रतिनिधिमंडल को समय से पहले भेजने की ख़बर सबसे पहले एक्सिओस न्यूज़ वेबसाइट ने दी थी.
एक्सिओस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''हालांकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के वैसे भी जल्द रवाना होने की संभावना थी, लेकिन रुबियो का यह क़दम एक असामान्य कूटनीतिक फटकार माना जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास का भी पता चलता है, ख़ासकर ऐसे समय में जब युद्ध ख़त्म कराने की कोशिशों में कोई ख़ास प्रगति नहीं हो रही है.''
क़तर के मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिश की, लेकिन बहुत कम प्रगति हुई. दोनों में से कोई भी पक्ष अपने रुख़ से पीछे हटने को तैयार नहीं था.
एक्सिओस ने लिखा है, ''अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "विदेश मंत्री रुबियो ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बाहर कर दिया, क्योंकि वे तय समय से ज़्यादा रुक चुके थे. संयुक्त राष्ट्र महासभा ख़त्म हो चुकी थी, इसलिए अब उनके जाने का समय था.''
बुधवार को पत्रकारों ने जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा कि वह ऐसे शासन के साथ समझौता कैसे कर सकते हैं, जिसे वह पागल बताते हैं, तो ट्रंप ने कहा, "शायद मैं उन्हें उड़ा दूंगा. शायद मैं उन्हें उड़ा दूंगा. हमें यह फ़ैसला करना होगा. या तो हम उन्हें उड़ा देंगे या फिर कोई समझौता करेंगे. लेकिन अब समय आ गया है. किसी न किसी तरह यह बहुत जल्द ख़त्म होने वाला है."
ईरान और अमेरिका में शत्रुता की कहानी
साल 1953 में अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान में लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को अपदस्थ कर पहलवी को सत्ता सौंप दी थी.
मोहम्मद मोसादेग ने ही ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था और वो चाहते थे कि शाह की शक्ति कम हो.
1953 में ईरान में अमेरिका ने जिस तरह से तख्तापलट किया शायद उसी का नतीजा 1979 की ईरानी क्रांति थी. इन 47 सालों में ईरान और पश्चिम के बीच कड़वाहट ख़त्म नहीं हुई.
क्रांति के परिणामों के तत्काल बाद ईरान और अमेरिका के राजनयिक संबंध ख़त्म हो गए थे.
तेहरान में ईरानी छात्रों के एक समूह ने अमेरिकी दूतावास को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था और 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर से इनकी मांग थी कि शाह को वापस भेजें. शाह न्यूयॉर्क में कैंसर का इलाज कराने गए थे.
बंधकों को तब तक रिहा नहीं किया गया, जब तक रोनल्ड रीगन अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बन गए. आख़िरकार पहलवी की मिस्र में मौत हो गई और ख़ुमैनी ने अपनी ताक़त को और धर्म केंद्रित किया.
इन सबके बीच सद्दाम हुसैन ने 1980 में ईरान पर हमला बोल दिया. ईरान और इराक़ के बीच आठ सालों तक ख़ूनी युद्ध चला. इस युद्ध में अमेरिका सद्दाम हुसैन के साथ था. यहां तक कि सोवियत यूनियन ने भी सद्दाम हुसैन की मदद की थी।
AI outlook — possibilities, not facts
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ सकता है और कूटनीतिक प्रयास और भी कठिन हो सकते हैं।
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A rare 570-year-old leaf from the Gutenberg Bible, bought for £25 in the early 20th century and found in an English attic, has been sold at auction for £39,000.

An incident of alleged attack on the pilot by the co-pilot inside the cockpit of flydubai flight FZ1073 coming from Dubai to Tel Aviv has come to light, after which the plane was diverted towards Tabuk, Saudi Arabia.

Flydubai airline's FZ1073 aircraft suddenly fell 17,000 feet while going from Dubai to Tel Aviv, after which it was diverted towards Saudi Arabia and landed. An attacker inside the plane attacked the pilot with a knife, who was controlled by passengers who entered the cockpit. Passengers shared horrifying experiences after the incident, and Israel's Prime Minister Netanyahu hailed one passenger, Yaniv, as a hero.

Captain Smit Machar, the Indian pilot who was attacked with a knife on flydubai flight FZ1073, opened the cockpit door before he became unconscious, which helped the passengers and crew overpower the attacker. Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu and US President Donald Trump praised his bravery, while he was hospitalized after making an emergency landing in Tabuk, Saudi Arabia.

Flydubai flight FZ1073 from Dubai to Tel Aviv made an emergency landing in Tabuk, Saudi Arabia after a knife attack between the pilots. The passengers and relief pilots brought the attacker under control. There were 150-180 passengers on board, most of whom were Israeli citizens.

During a fight between pilots on flydubai flight FZ1073 going from Dubai to Tel Aviv, one pilot attacked the other with a knife. The plane had to make an emergency landing at Tabuk Airport in Saudi Arabia. The passengers and relief pilots brought the situation under control.