राजस्थान के आईएएस-आईपीएस दंपति के 40 विला-कॉटेज ख़रीदने का मामला क्या है?
एसीबी ने मामला दर्ज किया, दोनों अधिकारी एपीओ किए गए
Quick Look
राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर उदयपुर और अलवर में गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से 40 विला और कॉटेज खरीदने तथा कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। एसीबी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोनों को एपीओ कर दिया गया है।
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Why It Matters
राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर उदयपुर और अलवर के अनंता रिसॉर्ट में 40 विला और कॉटेज खरीदने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने ये संपत्तियां रिसॉर्ट चलाने वाली गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदीं और सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को नियमों के खिलाफ लाभ पहुंचाया। मामला मीडिया में आने के बाद राजस्थान सरकार ने इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंप दी है।
राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर उदयपुर और अलवर के अनंता रिसॉर्ट में 40 विला और कॉटेज खरीदने के आरोप लगे हैं.
आरोप है कि उन्होंने ये संपत्तियां रिसॉर्ट चलाने वाली गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदीं और सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को नियमों के खिलाफ लाभ पहुंचाया.
मामला मीडिया में आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
राजस्थान सरकार ने इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी को सौंप दी है. पति-पत्नी को उनके पदों से हटाकर 'अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर' (एपीओ) कर दिया गया है. यानी वे अब नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं.
राज्य सरकार ने दो नवंबर को आदेश जारी कर गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को दिए जा रहे सरकारी रियायतों पर भी रोक लगा दी.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में सामने आया सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बताया है. उन्होंने इसकी जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है.
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले में 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया. फिलहाल उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है.
इसके बाद 30 अक्टूबर को सरकार ने आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को मंजूरी दी. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 31 अक्टूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी फिलहाल अमेरिका में हैं. हमने फोन के जरिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने अनंता रिसॉर्ट उदयपुर से भी फोन कर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे भी बात नहीं हो सकी.
कुल कितने विला और कॉटेज खरीदे गए?
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि होटल और रिसॉर्ट चलाने वाली गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से उदयपुर और अलवर में 40 विला और कॉटेज खरीदे गए.
इनमें उदयपुर जिले के बुझड़ा स्थित एक रिसॉर्ट के 20 कॉटेज और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित एक रिसॉर्ट के 20 विला शामिल हैं.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उदयपुर के रिसॉर्ट में सितंबर 2023 में 20 कॉटेज खरीदे गए थे. आरोप है कि शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर ने ये कॉटेज 10-10 लाख रुपये में खरीदे.
एसीबी के प्रेस नोट में बताया गया है कि अलवर के रिसॉर्ट में मार्च 2026 में 20 विला खरीदे गए. इनमें आठ-आठ विला पति-पत्नी के नाम पर, दो विला उनके बेटों और दो प्रशाखा माथुर के माता-पिता के नाम पर खरीदे गए.
एक विला की कीमत लगभग 15 लाख से साढ़े 16 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है.
मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि सभी 40 विला और कॉटेज कुल 6.16 करोड़ रुपये में खरीदे गए.
जिस कंपनी से खरीदा, उसी को किराए पर दिया
इस खरीद से जुड़ी अहम बात यह है कि जिस कंपनी से ये 40 संपत्तियां खरीदी गईं, बाद में कथित रूप से उसी कंपनी को लीज पर दे दी गईं.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उदयपुर के हर कॉटेज का सालाना किराया चार लाख रुपये और अलवर के हर विला का सालाना किराया पांच लाख रुपये है.
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबरों के अनुसार, 20 कॉटेज से सालाना 80 लाख रुपये और 20 विला से एक करोड़ रुपये किराया मिल रहा है. इस तरह इन संपत्तियों से सालाना कुल 1.80 करोड़ रुपये किराया मिलने की बात कही गई है.
संपत्तियों की खरीद पर खर्च हुई रकम के मुकाबले एक साल का किराया करीब 29 फीसदी बैठता है.
इसी खरीद और लीज की प्रक्रिया के कारण सवाल उठे कि कंपनी ने अपनी संपत्तियां अधिकारियों के परिवार को बेचकर दोबारा लीज पर क्यों लीं और इन सौदों के समय संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी?
शिखर अग्रवाल पर कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप
मामला सामने आने के बाद शिखर अग्रवाल की संपत्तियों और सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
एसीबी ने शुरुआती जांच को लेकर जारी प्रेस नोट में दावा किया कि शिखर अग्रवाल ने अलग-अलग पदों पर रहते हुए गोयल फैशन्स के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत की और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया.
शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव भी रह चुके हैं. इसी वजह से विपक्ष इस मामले को लेकर राज्य सरकार को सीधे घेर रहा है.
एसीबी के मुताबिक, शिखर अग्रवाल पर रिसॉर्ट में निर्माण से जुड़ी शर्तों में कथित छूट दिलाने, जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच किए बिना मंजूरी देने और कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज दिलाने के आरोप हैं.
एसीबी का कहना है कि इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है.
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक, ब्यूरो ने मीडिया रिपोर्टों, उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय स्रोतों से मिली जानकारी को देखा था.
इसके बाद पहली नजर में जांच योग्य तथ्य सामने आने पर प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज करने का फैसला किया गया.
मामला सामने कैसे आया?
यह मामला दैनिक भास्कर के खोजी पत्रकार अवधेश आकोदिया की एक रिपोर्ट के बाद सार्वजनिक हुआ.
वह बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "40 विला के इस मामले में 14 विला शिखर अग्रवाल के नाम पर होने की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल से मिली. इसके बाद आगे की जांच में और जानकारियां सामने आईं."
वह बताते हैं, "पोर्टल पर 14 संपत्तियों की खरीद और उनसे मिलने वाले सालाना किराये की जांच करने पर पता चला कि केवल शिखर अग्रवाल ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी के नाम पर भी विला और कॉटेज हैं. लेकिन उनकी पत्नी के नाम की संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर नहीं दी गई है."
अधेश आकोदिया कहते हैं, "जांच में सामने आया कि उनके बेटों और सास-ससुर के नाम पर भी कॉटेज और विला खरीदे गए हैं. इसी से पूरे मामले का खुलासा हुआ."
अधेश आकोदिया ने अपनी खबर के लिए शिखर अग्रवाल का पक्ष भी लिया था.
उनके मुताबिक, शिखर अग्रवाल ने कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है. संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर दी गई है और आयकर रिटर्न में भी इनका जिक्र किया गया है.
हालांकि पत्नी के नाम की संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर नहीं होने के सवाल पर शिखर अग्रवाल ने कहा कि वह शायद कहीं गलत जगह अपलोड हो गई होगी.
आकोदिया कहते हैं, "ऐसा नहीं होता कि जानकारी गलत जगह अपलोड हो गई हो, क्योंकि यह जानकारी सीधे पोर्टल पर भरी जाती है. इसमें कुछ अपलोड नहीं होता."
उनके मुताबिक, साल 2023 में शिखर अग्रवाल की पत्नी आईपीएस डॉ. प्रशाखा माथुर के नाम पर उदयपुर में 10 कॉटेज खरीदे गए थे, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी आरटीआई में भी नहीं दी.
आकोदिया का कहना है कि जब शिखर अग्रवाल से उनके बेटों और सास-ससुर के नाम की संपत्तियों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि सभी ने अपने-अपने स्तर पर इन्हें खरीदा है.
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री से क्या पूछा?
मामला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की बीजेपी सरकार को घेरा.
उन्होंने 30 अक्टूबर को जयपुर में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में इसे भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में सामने आया सबसे बड़ा घोटाला बताया.
गहलोत ने कहा कि केवल अधिकारी को एपीओ करना पर्याप्त नहीं है. मामले की जांच सीबीआई और ईडी से भी कराई जानी चाहिए.
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाने वाले फैसलों के पीछे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों और मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच होनी चाहिए.
तीन अक्टूबर को गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी मुख्यमंत्री से सवाल किए.
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी, सवाल अब भी वही है. अनंता रिसॉर्ट को विशेष पैकेज दिए जाने में आपकी क्या भूमिका है? और इस प्रकरण की जांच एसीबी के बजाय सीबीआई को क्यों नहीं सौंप रहे?"
उन्होंने कहा कि यह जीरो टॉलरेंस वाली सरकार है और अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
एसीबी जांच में शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है।
Likely · Within weeks
मामले की जांच सीबीआई या ईडी को सौंपने की मांग पर निर्णय लिया जा सकता है।
Possible · Within weeks
Open Questions
- संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी?
- कंपनी ने अपनी संपत्तियां अधिकारियों के परिवार को बेचकर दोबारा लीज पर क्यों लीं?
- मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच कब होगी?
- दोनों अधिकारी अमेरिका से कब लौटेंगे और उनका बयान कब दर्ज होगा?


