
दिल्ली पुलिस द्वारा केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन की इजाज़त न देने और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने के मामलों पर संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस द्वारा विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने पर संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर चर्चा हो रही है।
दिल्ली पुलिस केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दे रही है.
विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन करने पर हिरासत में ले रही है.
दिल्ली पुलिस के इस रुख़ पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.
पहला सवाल यही है कि क्या दिल्ली पुलिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में हर नागरिक को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रही है?
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान के इसी अनुच्छेद में निहित है और लोकतंत्र में इसे बहुत ही अहम माना गया है.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी दिल्ली पुलिस के रुख़ पर सवाल उठाते हुए कहा है, "शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सरकार की अनुमति पर निर्भर नहीं है. यह भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत संरक्षित है."
संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (b) भारत के सभी नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है.
सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों प्रावधानों को मिलाकर प्रदर्शन के अधिकार का संवैधानिक आधार माना है.
मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया मामले में 23 जुलाई 2018 को दिए गए फ़ैसले के पैराग्राफ 61 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "निस्संदेह, लोगों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत दिया गया मौलिक अधिकार है."
संविधान में क्या है प्रावधान?
भारत के पूर्व गृह सचिव और मोदी सरकार में मंत्री रहे आरके सिंह ने भी दिल्ली पुलिस के रुख़ को मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताया है.
आरके सिंह ने एक्स पर लिखा है, ''भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के प्रदर्शन करना या जुलूस निकलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है. पुलिस दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से क्यों रोक रही है? आईएएस और आईपीएस संविधान और क़ानून के अनुसार काम करने की शपथ लेते हैं. दिल्ली पुलिस को इसी हिसाब से काम करना चाहिए न कि किसी नेता के अवैध आदेश के अनुसार.''
पुलिस का विरोध प्रदर्शन की अनुमति से इनकार किसी विशेष गतिविधि पर लगाया गया प्रतिबंध है, न कि अनुच्छेद 19 का निलंबन. इसकी वैधता क़ानून, इनकार के कारणों और इस बात पर निर्भर करेगी कि वह संवैधानिक रूप से उचित प्रतिबंध की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं. पुलिस अनुमति की व्यवस्था को शांतिपूर्ण सभा पर मनमानी रोक लगाने के अधिकार के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकती.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रहे दुष्यंत दवे कहते हैं कि पुलिस अब संविधान और क़ानून का पालन नहीं करती है बल्कि सत्ताधारी पार्टी के आदेशों का पालन करती है.
दुष्यंत दवे ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''विरोध का अधिकार तो हमारा एक मौलिक अधिकार है. अगर देशवासी ये चाहते हैं कि सरकार के कोई निर्णय या सरकार के कोई भी एक्शन के ख़िलाफ़ उनको विरोध करना है, तो वो अपना विरोध कर सकते हैं. इसे संविधान में एक गारंटी मिली है. लोकतंत्र तो बिना विपक्ष के चलेगा ही नहीं.''
दवे कहते हैं, ''अगर आप बोलते हैं कि हिंदुस्तान एक वाइब्रेंट डेमोक्रेसी है, तो ये प्रोटेस्ट तो ज़रूर होने चाहिए. जब भी बीजेपी कोई रैली चाहती है, तो उनको तुरंत परमिशन दी जाती है. आज ही नरेंद्र मोदी की बड़ी रैली हो रही है. उनको तुरंत परमिशन मिल जाती है. पुलिस सत्ताधारी पार्टी को सब सुविधाएं देती है. जब यही मांग विपक्ष की तरफ़ से होती है तो बिल्कुल अलग व्यवहार होता है.''
दुष्यंत दवे कहते हैं, ''निश्चित तौर पर यह मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. फ्रीडम ऑफ़ स्पीच एंड एक्सप्रेशन तो मौलिक अधिकार के तहत गारंटीड है. इस देश का दुर्भाग्य यह है कि हर सरकार पुलिस को पॉलिटिकल एजेंट के रूप में इस्तेमाल करती है. हमारे देश में सरकारी अधिकारी या न्याय प्रणाली कुछ भी अब स्वतंत्र नहीं है.
''मौलिक अधिकार के उल्लंघन की सूरत में आप अदालत जा सकते हैं लेकिन आज हमारी अदालतें भी स्वतंत्र नहीं रहीं. पुलिस आकर बोलेगी कि इस विरोध प्रदर्शन से लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन हो सकती है. पुलिस कुछ भी बहाने दिखा सकती है. ऐसे में विपक्ष बिना पुलिस की परमिशन के विरोध कर रहा है तो इसमें कोई बुराई नहीं है.''
दिल्ली पुलिस किस आधार पर अनुमति नहीं दे रही है?
ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली पुलिस किस आधार पर इस मौलिक को निलंबित कर रही है? दुष्यंत दवे कहते हैं, ''फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को आप रोक सकते हैं. अगर फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का कोई दुरुपयोग करे और कोई आपत्तिजनक बयान करे जो देश के ख़िलाफ़, सरकार को हटाने की साज़िश करे और साथ-साथ हिंसा करे, लॉ एंड ऑर्डर का भंग करे, तब पुलिस इस अधिकार को सस्पेंड कर सकती है.''
दुष्यंत दवे कहते हैं, ''पर वो तो तब होगा जब आपने परमिशन दी हो और परमिशन का दुरुपयोग हो रहा है. आप पहले परमिशन ही नहीं दे रहे हैं. मैं समझता हूँ कि सरकार को और प्रधानमंत्री मोदी जी को ख़ुद समझना चाहिए कि ये विरोध एक लोकशाही अहम हिस्सा है, जिसे रोकना नहीं चाहिए.''
पुलिस किस आधार पर इस अधिकार से वंचित करती है?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है, जबकि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है. इसलिए प्रदर्शन के अधिकार को मौलिक अधिकार मानने का यह अर्थ नहीं है कि हर प्रदर्शन को हर स्थान और हर समय अनुमति देना अनिवार्य है.
अनुच्छेद 19(2) आठ आधारों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने वाले क़ानूनों की अनुमति देता है:
1. भारत की संप्रभुता और अखंडता को ख़तरा
2. स्टेट की सुरक्षा को ख़तरा
3. दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध को ख़तरा
4. लोक व्यवस्था को ख़तरा
5. शिष्टाचार या नैतिकता का उल्लंघन
6. न्यायालय की अवमानना
7. मानहानि
8. किसी अपराध के लिए उकसाना
सरकार को जो बात पसंद नहीं है, वैसी बात करने भर से मौलिक अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता है. लेकिन इसकी व्याख्या भी एक जटिल प्रक्रिया है.

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Opposition leader Rahul Gandhi, who was protesting against the Election Commission in Delhi, was detained by the police while going to Jantar Mantar. The opposition is demanding the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar and alleging irregularities in the voter list.

Opposition MPs in Delhi are demanding the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar over alleged irregularities in the voter list. The opposition, led by Rahul Gandhi, is protesting at Jantar Mantar, while the Election Commission has rejected the allegations.

Opposition MPs continue to protest in Delhi demanding the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar. India Bloc leaders under the leadership of Rahul Gandhi are protesting at Jantar Mantar, while BJP has termed these allegations as baseless.

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