
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार प्याज़ के खुदरा दामों में साल-दर-साल 59 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, सरकार ने 35 रुपये प्रति किलो की दर पर आपूर्ति बढ़ाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाईं
भारत में प्याज़ के खुदरा दामों में 59% की वृद्धि के बाद, केंद्र सरकार ने नासिक से प्रमुख शहरों तक प्याज़ पहुंचाने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' विशेष ट्रेनें शुरू की हैं। एनसीसीएफ़ और नेफ़ेड के माध्यम से प्याज़ 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
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अगस्त-सितंबर के दौरान त्योहारों और मौसमी कारणों से प्याज़ की क़ीमतों में अक्सर तेज़ी देखी जाती है। सरकार प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन फ़ंड के तहत बफ़र स्टॉक रखती है।
चीनी के बाद अब देशभर में प्याज़ के दामों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने उपभोक्ता मामले मंत्रालय के हवाले से बताया है कि 24 अगस्त को पूरे भारत में प्याज़ का औसत खुदरा मूल्य साल-दर-साल 59 फ़ीसदी बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो हो गया, जो एक साल पहले 27.37 रुपये प्रति किलो था.
मंत्रालय ने बताया है कि औसत थोक मूल्य 68 फ़ीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गया, जो एक साल पहले इसी समय में 21.23 रुपये प्रति किलो था.
पीटीआई के मुताबिक़, सोमवार को चेन्नई में प्याज़ के खुदरा दाम 60 रुपये प्रति किलो (बीते साल 33 रुपये प्रति किलो), दिल्ली में 55 रुपये प्रति किलो (बीते साल 35 रुपये) और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो थे.
हालांकि देश के कई हिस्सों में प्याज़ का खुदरा भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है.
प्याज़ के बढ़ते दामों को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने जनता को राहत दिलाने का फ़ैसला किया है.
सरकार ने प्याज़ का केंद्र कहे जाने वाले नासिक के लासलगांव से देश के प्रमुख स्थानों के लिए एक विशेष ट्रेन चलाई है जो वहां प्याज़ लेकर पहुंचेगी.
इस विशेष ट्रेन को 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है. ग़ौरतलब है कि प्याज़ को कांदा भी कहा जाता है.
भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के आधिकारिक एक्स हैंडल ने जानकारी दी है कि "कांदा एक्सप्रेस के ज़रिए प्रमुख बाज़ारों तक प्याज़ की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है, जिससे उपलब्धता मज़बूत होगी, क़ीमतों में स्थिरता आएगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी."
इस एक्स पोस्ट में बताया गया है कि 800 मीट्रिक टन प्याज़ को लेकर ये विशेष ट्रेनें नासिक से पांच प्रमुख शहरों में जा रही हैं, जिसे 35 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचा जाएगा.
सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्नील निला ने बीबीसी हिन्दी के संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े को बताया है कि नासिक के लासलगांव से प्याज़ की रेक की लोडिंग शुरू हो गई है जो ट्रेन दिल्ली के आदर्श नगर जाएगी.
हमारे स्थानीय सहयोगी पत्ररार और संवाददाता अक्षय से मिली जानकारी के अनुसार, कांदा एक्सप्रेस अभी तक लासलगांव से रवाना नहीं हुई है. एनसीसीएफ़ ने पुष्टि की है कि प्याज को अभी तक भेजा नहीं गया है और ट्रेन के रवाना होने में देरी हुई है.
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक्स पर बताया है कि विशेष ट्रेन को "शुरुआत में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी के लिए शामिल किया गया है. ज़रूरत के अनुसार अन्य केंद्रों को भी जोड़ा जाएगा."
"सरकार उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्याज़ की उपलब्धता और क़ीमतों को संतुलित रखने के लिए समयबद्ध क़दम उठा रही है."
ऐसा नहीं है कि ये प्याज़ बाज़ार में सीधे तौर पर उपलब्ध होगा बल्कि इस प्याज़ को एनसीसीएफ़, नेफ़ेड और केंद्रीय भंडार के स्टोरों के ज़रिए 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध कराया जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कांदा एक्सप्रेस पहल का मक़सद बड़े पैमाने पर प्याज़ की ढुलाई के लिए रसद की क्षमता को बढ़ाना है. इसे साल 2024-25 में शुरू किया गया था और तब से इसका काफ़ी विस्तार किया गया है.
हालिया 'कांदा एक्सप्रेस' की हर ट्रेन में 40 ट्रकों तक के बराबर प्याज़ ले जाई जा रही है.
साल 2024-25 में, लगभग 12 हज़ार टन प्याज़ का बफ़र स्टॉक ले जाने वाले 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे. 2025-26 में, इसे बढ़ाकर 86 रेक कर दिया गया है, जो देश भर के 16 बड़े शहरों में लगभग 88 हज़ार टन प्याज़ ले जा रहे हैं.
एक अहम सवाल ये भी है कि ये प्याज़ आख़िर किससे लिया जा रहा है? पीटीआई के मुताबिक़, प्याज़ का बफ़र स्टॉक केंद्र का स्ट्रेटेजिक रिज़र्व है, जिसे ख़ास तौर पर सप्लाई कम होने पर क़ीमतों में तेज़ी से मार्केट को बचाने के लिए बनाया गया है. सरकार प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन फ़ंड स्कीम के तहत अलग-अलग उत्पादक राज्यों में प्याज़ का स्टॉक रखती है.
साल 2026 के लिए लगभग 1.21 लाख टन प्याज़ का बफ़र स्टॉक रखा गया है.
पीटीआई ने सरकार के मुताबिक़ बताया, आने वाले महीनों में घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए प्याज़ की उपलब्धता ठीक-ठाक बनी हुई है, जिसे 2025-26 में अनुमानित 307.37 लाख टन प्रोडक्शन से सपोर्ट मिलेगा, जो 'मोटे तौर पर पिछले साल के 307.67 लाख टन के बराबर है.
आमतौर पर अगस्त-सितंबर से त्योहारों, मौसम से जुड़ी दिक्कतों, सप्लाई चेन में बदलाव और बदलते डिमांड पैटर्न के कारण प्याज़ की क़ीमतों में सीज़नल तेज़ी देखी जाती है.
इस विशेष ट्रेन की सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है. भारत सरकार में उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने एक्स पर लिखा, "जल्द आ रही है: कांदा एक्सप्रेस दिल्ली में लगभग 800 मीट्रिक टन प्याज़ ला रही है, जिसे नेफ़ेड, एनसीसीएफ़ और केंद्रीय भंडार स्टोर पर 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा. कांदा एक्सप्रेस शुरू में चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी पहुंचेगी."
करण राजपाल नाम के एक यूज़र ने एक्स पर लिखा, "बताओ आज देश ने तुम्हारे लिए क्या किया? कांदा एक्सप्रेस शुरू की."
वरुण भसीन न एक्स पर लिखा, "'कांदा एक्सप्रेस' की लोडिंग शुरू हो गई है. प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन स्कीम के तहत लासलगांव से दिल्ली 840 टन प्याज़ भेजा जाएगा."
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कांदा एक्सप्रेस के माध्यम से अन्य केंद्रों को भी जोड़ा जाएगा।
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