कूनो में चीते को किसने मारी गोली? शरीर से मिले 5 छर्रे, जांच के लिए केंद्र ने भेजी टीम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीता पुनर्वास परियोजना के तहत मध्य प्रदेश लाए गए चीते के शरीर से ऑपरेशन के दौरान पांच छर्रे निकाले गए, केंद्र और राज्य सरकार ने जांच दल गठित किए।
Quick Look
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते केएनजी22 की गोली के छर्रे लगने से मौत हो गई। घटना के बाद केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश वन विभाग ने उच्चस्तरीय जांच टीमें गठित की हैं।
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Why It Matters
भारत में चीता पुनर्वास परियोजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी, जिसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते लाए गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना के तहत भारत लाए गए चीतों में से एक 19 महीने के चीते की गोली के छर्रे लगने से मौत हो गई।
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निर्वा के 19 महीने के नर शावक केएनजी22 के शरीर से ऑपरेशन के दौरान गोली के पांच छर्रे निकाले गए।
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम भेजी है।
पीआईबी के मुताबिक, इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक और ब्यूरो के क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने भी वन और पुलिस अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित की है।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना के तहत उनकी संख्या बढ़ाने के साथ उनके संरक्षण और निगरानी पर साल 2022 से पहल शुरू की गई।
मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. समीता राजौरा ने बीबीसी से कहा, "केएनजी22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 के इलाके में घायल हालत में पाया गया था। हमने पूरी कोशिश की उसे बचाने की।"
राजौरा के मुताबिक़, "शुरुआती एक्स-रे में चीते के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कई फ़ॉरेन ऑब्जेक्ट्स दिखाई दिए थे। इसके बाद उसका इलाज शुरू किया गया। विशेषज्ञों से सलाह के बाद घायल चीते को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु शल्य चिकित्सा और रेडियोलॉजी विभाग में भेजा गया। वहां चीते के शरीर से पांच फायरआर्म पैलेट यानी बंदूक के छर्रे निकाले गए"।
राजौरा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा कि कई पहलुओं पर जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा, "देखिए वो इलाक़ा पहले से संवेदनशील है. कुछ समय पहले वहां तेंदुओं के शिकार की घटना सामने आई थी. तो चीते का शिकार हुआ है या किसी ग्रामीण ने अपने पशुओं के बचाव में यह किया ये भी जांच का विषय है।"
राजौरा के मुताबिक हर चीते के पीछे एक मॉनिटरिंग टीम है जो लगातार रेडियो कॉलर के सिग्नल के साथ चीते पर नज़र बनाए रखती है. जांच दल इस बात की भी जांच करेंगे कि मॉनिटरिंग टीम को गोली चलने की आवाज़ क्यों नहीं सुनाई दी और रेडियो कॉलर के सिग्नल को ट्रैक करने में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 अक्तूबर को इस मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम भेजने की जानकारी दी।
यह टीम घटना की परिस्थितियों की जांच करेगी, उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ समन्वय कर कारवाई की सिफारिश करेगी।
केंद्र सरकार ने कहा है कि टीम अपनी जांच और सिफारिशें मंत्रालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के लिए आगे के निर्देश तय किए जा सकते हैं।
मध्य प्रदेश के वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस मामले में वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "रेडियो कॉलर पहने चीते की लोकेशन शिकारियों को कैसे मिली और उसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार टीम कहां थी।"
दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा, "इलाके में पहले भी तेंदुओं के शिकार से जुड़े मामले सामने आए, लेकिन इन घटनाओं से सबक नहीं लिया गया।"
दुबे के मुताबिक, 2025 और 2026 में इस व्यापक वन क्षेत्र में अंतरराज्यीय शिकारी गिरोहों के पकड़े जाने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल बने हुए हैं।
कूनो, श्योपुर और मुरैना के आसपास के जंगल पहले भी तेंदुओं के कथित शिकार से जुड़ी जांच के केंद्र में रहे हैं।
इस साल की शुरुआत में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इलाके में तेंदुओं की हत्या और उनके अंगों की तस्करी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच की गई थी। इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबरें आई थीं।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अभी प्राथमिकता ये होनी चाहिए कि चीते को किस तरह के हथियार से चोट पहुंची, गोली किसने चलाई और क्या यह जानबूझकर किया गया हमला था"।
वन विभाग के मुताबिक़, केएनजी22 की मौत के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 58 रह गई है. इनमें 52 कूनो नेशनल पार्क, चार गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और दो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं.
भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी, जब नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
जांच टीम अपनी रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को सौंपेगी
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Open Questions
- गोली किसने और क्यों चलाई?
- मॉनीटरिंग टीम को गोली की आवाज़ क्यों नहीं सुनाई दी?




