
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) ने चेतावनी दी है कि समोसा, बोंडा, भजिया जैसी तली हुई खाने की चीज़ों को अख़बार या छपे हुए काग़ज़ में लपेटकर देना या परोसना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि स्याही में सीसा और अन्य रसायन होते हैं जो गर्मी के कारण खाने में मिल सकते हैं और लीवर, किडनी, दिमाग़ जैसे अंगों को नुक़सान पहुंचा सकते हैं, विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम अधिक है।
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पिछले कुछ सालों में समोसे और तली हुई चीज़ों को अख़बार में लपेटकर देना आम हो गया है, लेकिन एफ़एसएसएआई ने इस प्रथा को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए प्रतिबंधित कर दिया है।
Author, शेख़ अंसारी
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रकाशित 3 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 6 मिनट
कई शहरों में समोसा अक्सर अख़बार के टुकड़े पर रखकर दिया जाता है.
कई दुकानदार समोसे और दूसरी तली हुई चीज़ों को अख़बार या छपे हुए पर्चों में लपेटकर भी पार्सल के रूप में भी देते हैं.
वैसे तो खाने-पीने की ऐसी चीज़ों को आम तौर पर पत्तल या पत्तों से बनी चीज़ों में दिया जाता रहा है. पार्सल के लिए यही प्रक्रिया थी, मगर पिछले कुछ सालों में इसमें बड़ा बदलाव आया है.
अब समोसे, पकौड़ी और ऐसी ही तली चीज़ों को परोसने के लिए भारी मात्रा में अख़बार उपयोग हो रहा है, और प्लास्टिक की थैलियों में पार्सल पैक होने लगे हैं.
हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफ़एसएसएआई ने स्ट्रीट फूड बेचने वालों, होटलों और खाने-पीने का सामान बेचने वाले दूसरे कारोबारियों के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं.
एफ़एसएसएआई ने क्या चेतावनी दी?
एफ़एसएसएआई ने कहा है कि समोसे, बोंडा और भजिया जैसी खाने की चीज़ों को अख़बार या दूसरे छपे हुए काग़ज़ों में लपेटकर देना या इन काग़ज़ों पर परोसना सेहत के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.
एफ़एसएसएआई के मुताबिक़, काग़ज़ पर छपाई के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही में रसायनों के साथ सीसा जैसी चीज़ें भी हो सकती हैं.
जब इस काग़ज़ पर गर्म समोसा या दूसरी खाने की चीज़ रखी जाती है, तो ये पदार्थ खाने में मिल सकते हैं. इस तरह ये खाने के साथ पेट में पहुंचकर बीमारियों की वजह बन सकते हैं.
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इस बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए बीबीसी ने हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात की.
हाल ही में एफ़एसएसएआई ने मुंबई में एक रेहड़ी-पटरी वाले को अख़बार में खाना लपेटकर देते हुए पाया था.
इस बारे में दिशानिर्देश पहले से मौजूद हैं. इसके बावजूद एफ़एसएसएआई ने एक बार फिर आदेश दिया है कि अख़बार में खाना रखकर नहीं दिया जाना चाहिए.
एफ़एसएसएआई के खाद्य सुरक्षा और मानक यानी पैकेजिंग नियम, 2018 के मुताबिक़, खाने को रखने या परोसने के लिए अख़बार या ऐसी किसी दूसरी सामग्री का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है.
अख़बार का इस्तेमाल किन कामों के लिए नहीं करना चाहिए?
1- खाने से अतिरिक्त तेल सोखने के लिए.
2- खाने की चीज़ों या खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को ढकने के लिए.
3- खाना परोसने के लिए.
4- खाना पैक करने के लिए.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
अख़बार पर गर्म समोसा या दूसरी खाने की चीज़ रखकर खाने से क्या ख़तरे हो सकते हैं, इस बारे में बीबीसी ने कुरनूल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर श्याम प्रसाद से बात की. डॉक्टर श्याम प्रसाद सोनोलॉजिस्ट हैं.
उन्होंने बताया कि छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही शरीर में जाने पर क्या हो सकता है, इससे किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और शरीर के अंदरूनी अंगों पर इसका क्या असर पड़ सकता है.
सवाल: छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही शरीर में चली जाए, तो क्या हो सकता है?
जवाब: छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में सीसा यानी लेड नाम की धातु होती है. ये खाने में मिलकर शरीर में पहुंच सकती है और लिवर को नुक़सान पहुंचा सकती है.
यह ख़ून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों को भी नुक़सान पहुंचा सकती है. कुछ मामलों में इससे दिमाग़ को भी नुक़सान पहुंचने का ख़तरा रहता है.
सवाल: घरों में भी कई महिलाएं चपाती या पूरी बनाने के बाद उन्हें पुराने अख़बार पर रख देती हैं. इसका क्या असर हो सकता है?
जवाब: इस आदत का असर बड़ों के मुक़ाबले बच्चों पर ज़्यादा होता है.
यह बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है. बच्चों के शरीर के अंग पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते. इसलिए उन पर इसका असर ज़्यादा हो सकता है.
सवाल: गर्भवती महिलाओं पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: गर्भवती महिलाओं को छपे हुए काग़ज़ में रखा खाना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए. यह बहुत ख़तरनाक हो सकता है.
बच्चे के बनने की शुरुआती अवस्था में ये रसायन गर्भवती महिला के शरीर में चले जाएं, तो गर्भपात होने, बच्चे के मानसिक विकलांगता के साथ पैदा होने या मृत बच्चे के जन्म का ख़तरा भी हो सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस मामले में ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
केवल फूड-ग्रेड पैकेजिंग इस्तेमाल करने की सलाह
एफ़एसएसएआई ने खाने का कारोबार करने वालों से कहा है कि खाने की बिक्री और उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए केवल सुरक्षित और आधिकारिक रूप से मंज़ूर फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाए.
एफ़एसएसएआई ने ग्राहकों को भी इस मामले में सतर्क रहने की सलाह दी है.
नियमों में यह भी साफ़ किया गया है कि खाना रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले काग़ज़, पेपर बॉक्स, प्लेट और कप बनाने की सामग्री फूड-ग्रेड मानकों के मुताबिक़ होनी चाहिए. इस सामग्री में प्रदूषण या बीमारी फैलाने वाले तत्व नहीं होने चाहिए.
सेहत को क्या ख़तरे हो सकते हैं?
अख़बारों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में बाइंडर, रंग, रसायन, मिनरल ऑयल हाइड्रोकार्बन और भारी धातुएं होती हैं.
जब गर्म समोसा या दूसरी खाने की चीज़ अख़बार पर रखी जाती है, तो गर्मी की वजह से स्याही में मौजूद रसायन खाने में मिलने की आशंका रहती है.
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा खाना खाने से ये रसायन शरीर में पहुंच सकते हैं और अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकते हैं.
साफ़-सफ़ाई से जुड़ी समस्या
डॉक्टर श्याम प्रसाद कहते हैं, 'अख़बार कई लोगों के हाथों से होकर गुज़रते हैं और अलग-अलग तरह की जगहों से आते हैं.'
'इस वजह से उन पर धूल, बैक्टीरिया और दूसरी गंदगी जमा होने की आशंका रहती है. इसमें रखकर खाना खाने वाले लोग बीमार पड़ सकते हैं.'
क्या आप घर में भी अख़बार का इस्तेमाल करते हैं?
कुछ लोग घर में भी पूरी या दूसरी तेल वाली चीज़ों को रखने और पैक करने के लिए अख़बार का इस्तेमाल करते हैं. घर में भी अख़बार पर रखकर खाना या कोई तली हुई चीज़ नहीं खानी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक़, समोसा या दूसरी खाने की चीज़ें स्टेनलेस स्टील के बर्तनों, सूखे पत्तों या कांच के बर्तनों में परोसना बेहतर है.
अख़बार में खाना बेचने पर शिकायत कहां करें?
अगर कोई दुकानदार या कारोबारी अख़बार या छपे हुए पर्चों में समोसा या दूसरी खाने की चीज़ें रखकर बेचता है, तो लोग इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर सकते हैं.
खाद्य सुरक्षा शिकायत पोर्टल यानी FoSCoS: foscos.fssai.gov.in/consumergrievance
एफ़एसएसएआई की आधिकारिक वेबसाइट: www.fssai.gov.in
टोल-फ़्री हेल्पलाइन नंबर: 1800-11-2100. यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है.
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