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Backअरुणाचल प्रदेश: चीन के मेगा डैम का 'मुक़ाबला' करने वाले भारत के इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सड़कों पर क्यों उतरे लोग
अरुणाचल प्रदेश: चीन के मेगा डैम का 'मुक़ाबला' करने वाले भारत के इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सड़कों पर क्यों उतरे लोग
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अरुणाचल प्रदेश: चीन के मेगा डैम का 'मुक़ाबला' करने वाले भारत के इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सड़कों पर क्यों उतरे लोग

सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के बांध के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ की, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बातचीत की अपील की।

Quick Look

अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है।

AI-generated summary

Why It Matters

चीन तिब्बत में यारलुंग सांगपो नदी पर एक विशाल बांध बना रहा है। अरुणाचल सरकार का तर्क है कि सियांग परियोजना बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगी।

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Author, दिलीप कुमार शर्मा

पदनाम, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

"अगर सियांग नदी पर बांध बन गया तो हमारा सब कुछ ख़त्म हो जाएगा. सरकार को हमारी याचिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिए."

यह कहना है सियांग घाटी में रहने वाले आदि जनजाति के 29 साल के गुपु (बदला हुआ नाम) का.

अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग, सियांग और अपर सियांग जिलों में शुक्रवार को सियांग नदी पर प्रस्तावित बांध के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई से लोग डरे हुए हैं.

सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के "सियांग अपर मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट" का स्थानीय जनजातियां पिछले कई दिनों से विरोध कर रही हैं.

उन्हें डर है कि इस परियोजना के जलाशय में उनके गांव डूब सकते हैं और नदी के साथ उनके गहरे रिश्ते टूट सकते हैं.

शुक्रवार को 12 घंटे के बंद के दौरान इस प्रस्तावित बांध का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा हिंसा में बदल गया.

इस बंद का आह्वान सियांग बांध प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग स्वदेशी किसान मंच की युवा शाखा, आदि गैलो वेलफेयर सोसाइटी और 'जेन-ज़ी' के युवाओं ने किया था.

पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति लेने के बाद तोड़फोड़ की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) के एक दफ़्तर में कथित तौर पर आग लगा दी. इसके अलावा पासीघाट थाने में खड़े पुलिस वाहनों को भी जला दिया.

अधिकारियों का आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष कालिंग मोयोंग, पासीघाट वेस्ट के विधायक निनोंग एरिंग और मारियांग-गेकू के विधायक ओनी पान्यांग के घरों में भी तोड़फोड़ की.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं.

सियांग नदी पर बांध का विरोध कर रहे संगठन बांध विरोधी कार्यकर्ताओं की रिहाई के साथ-साथ परियोजना के प्री-फ़िज़िबिलिटी अध्ययन के लिए सियांग घाटी में तैनात सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं.

अपर सियांग जिले के गेकु गांव में रहने वाले मिंगकैंग कहते हैं, "हम लोग किसान हैं. खेती करते हैं. बाग़वानी करते हैं. अगर यह मल्टीपर्पज़ बांध बन गया तो हम लोगों पर बहुत असर पड़ेगा. बहुत नुक़सान होगा. हम लोगों की ज़मीन पानी में डूब जाएगी. हम लोग कहां रहेंगे?"

इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध कर रहे 'आदि बाने केबांग-यूनाइटेड' के एक कार्यकर्ता का कहना है कि जलाशय बनने से नदी के किनारे बसे गांव और धान के उपजाऊ खेत पानी में डूब सकते हैं.

इससे स्थानीय जनजातियों की पारंपरिक आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर ख़तरा पैदा हो सकता है.

उन्होंने कहा, "अगर नदी बांध में कुछ अनहोनी होती है तो 35 गांव पानी में डूब सकते हैं और करीब डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो सकते हैं."

इसके अलावा, लोग इतने बड़े बांध के निर्माण को लेकर भी चिंतित हैं क्योंकि यह पूरा इलाक़ा पर्यावरण और भूकंप के लिहाज़ से काफ़ी संवेदनशील माना जाता है.

इस हिंसा को लेकर रविवार को पासीघाट में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (केंद्रीय क्षेत्र) हिबू तमांग ने कहा, "हिंसा फैलाने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई कर रही है. कम से कम 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं."

आईजी के मुताबिक़, "पुलिस ने हिंसा, आगज़नी, पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों पर कथित हमलों से जुड़े छह मामले दर्ज किए हैं."

पुलिस अधिकारी ने कहा, "युवा प्रदर्शनकारियों को भड़काने के लिए कथित तौर पर ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने और हिंसा में उनकी भूमिका तय करने के लिए विस्तृत जांच चल रही है. उचित क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी."

ईस्ट सियांग जिले के जनसंपर्क अधिकारी मिडिंग मोड ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों ने शांतिपूर्ण धरना देने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी. प्रदर्शनकारियों को दोपहर 2 बजे तक विरोध करने की अनुमति दी गई थी. लेकिन वे शाम तक वहां डटे रहे और नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर दिया. हाईवे पर जब वाहनों की लंबी कतार लग गई तो मजिस्ट्रेट ने भीड़ को हटाने का आदेश दिया."

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'सियांग अपर मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट' और स्थानीय लोगों के विरोध के दौरान हुई हिंसा पर बात की.

सीएम खांडू ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है. लेकिन भीड़ ने काफ़ी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है. पुलिस स्टेशन और एनएचपीसी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और कई चुने हुए प्रतिनिधियों के घरों में भी तोड़फोड़ की गई."

खांडू ने कहा, "हिंसा करने के बजाय, हमसे सवाल पूछें और हमारे साथ बातचीत करें."

दरअसल, चीन तिब्बत में इसी नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध बनाने की तैयारी कर रहा है. चीन 60,000 मेगावाट का एक विशाल बांध बनाने की योजना पर काम कर रहा है.

अरुणाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि "सियांग अपर मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट" बाढ़ को नियंत्रित करने और चीनी बांध के असर का "मुक़ाबला" करने में मदद करेगा.

सीएम खांडू का कहना है कि प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट किसी बांध परियोजना की तकनीकी व्यावहारिकता और संभावित प्रभावों का शुरुआती आकलन होती है. यह निर्माण कार्य शुरू करने की मंजूरी नहीं होती.

कई वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ भी इस प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जता चुके हैं. 114 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने 2025 में सियांग अपर मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट से जुड़ी निर्माण, सर्वे और मंजूरी की गतिविधियां रोकने की मांग की थी.

चीन ने जुलाई 2025 में एक ऐसे बांध के निर्माण की शुरुआत की थी जिसे लेकर भारत और बांग्लादेश में चिंता जताई जा रही है.

यह नदी तिब्बती पठार से निकलकर भारत और बांग्लादेश तक बहती है. इस परियोजना की आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि इसकी वजह से नीचे की ओर बहाव वाले इलाक़े (डाउनस्ट्रीम) में भारत और बांग्लादेश के करोड़ों लोगों, स्थानीय तिब्बती आबादी और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है.

ऑस्ट्रेलिया स्थित थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की 2020 की एक रिपोर्ट में कहा गया था,"तिब्बती पठार में बहने वाली इन नदियों पर नियंत्रण चीन को भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालने की एक बड़ी ताक़त देता है."

जनवरी 2025 में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि भारत ने चीन के साथ मेगा बांधों के असर को लेकर अपनी चिंता जताई है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • परियोजना के खिलाफ और अधिक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • क्या सरकार परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करेगी?
  • गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों का भविष्य क्या होगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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