
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था, 25-30 हजार जवान तैनात
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात। नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अभिजीत दीपके सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए।
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कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान उसके समर्थकों और पुलिस के बीच कई जगह झड़पें होने की ख़बरें सामने आईं।
बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव के मुताबिक़, कनॉट प्लेस में शांतिपूर्वक धरना दे रहे सीजेपी के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने अचानक घेर लिया। पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बसों में ले जाने की कोशिश करने लगी।
इस बीच, एक वकील ने युवा प्रदर्शनकारियों को ले जा रही बस को रोका। इसके बाद कई प्रदर्शनकारी बस से उतरकर पुलिस हिरासत से भागने में कामयाब रहे।
राघवेंद्र राव ने सीजेपी के कई प्रदर्शनकारियों से बात की। उनमें से एक ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, एक बुज़ुर्ग महिला ने कहा, "जो आज हुआ, वैसा हमने आज तक नहीं देखा. बच्चों, महिलाओं और युवाओं को टॉर्चर किया जा रहा है. जो लोग हमारी ज़िंदगी से खेल रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओ तो हमें दबाया जा रहा है."
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, "हमारे सभी लीडर्स को डिटेन कर लो, तब भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. हर एक कॉकरोच अपने आप में एक लीडर है. हम सब अपनी ज़िम्मेदारी जानते हैं और डटे रहेंगे."
वहीं कनॉट प्लेस में ही प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों और एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की बात सामने आई है।
बीबीसी संवाददाता विष्णुकांत तिवारी ने बताया कि सीजेपी और एंटी सीजेपी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। सीजेपी विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी सपोर्टर्स के साथ धक्का-मुक्की की, उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया।
इस दौरान पुलिस ने एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। जब बीबीसी ने पुलिस से इस बारे में पूछना चाहा तो मौक़े पर मौजूद पुलिस के जवानों ने कोई जवाब नहीं दिया।
बीबीसी से बात करते हुए एक सीजेपी प्रदर्शनकारी ने कहा, "वो लोग हमारे ख़िलाफ़ भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. हिंसक नारे लगा रहे हैं. हमें पीट रहे हैं और पुलिस उन्हें कुछ नहीं कर रही है. ये कैसा दोहरा रवैया है. हमें तो पुलिस रोक रही है. आगे नहीं बढ़ने दे रही है और उन लोगों को खुली छूट है."
सीजेपी और कई वाम संगठनों के कॉल पर राजधानी दिल्ली में 10 अक्तूबर, शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
इस बीच सीपीआईएमएल ने दावा किया है कि आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली के मैदान गढ़ी डिटेंशन सेंटर ले जाया गया है।
सीपीआईएमएल के दिल्ली स्टेट कमेटी मेंबर एडवोकेट सूर्य प्रकाश ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "नेहा और आइसा कार्यकर्ता निरमा के फ़ोन उनसे ले लिये गए हैं. उन्हें अलग कमरे में रखा गया है." उन्होंने मांग की कि नेहा और उनकी साथी से वकीलों को मिलने दिया जाए.
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने तीनों नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास की सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है। तीनों को शनिवार को दिल्ली पहुंचते ही विमान से ही हिरासत में ले लिया गया।
सीजेपी ने एक्स हैंडल पर लिखा, "तीनों नेताओं की सुरक्षा को लेकर हम बेहद चिंतित हैं. दिल्ली पुलिस को इस तरह की जानकारी प्रेस में लीक करने के बजाय अभिजीत के परिवार और वकीलों को उनसे बात करने की अनुमति देनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए."
सीजेपी ने समाचार एजेंसी एएनआई की उस ख़बर का हवाला दिया जिसमें दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी है।
इस ख़बर के अनुसार, "अब यह फैसला उन्हें करना है कि वह हिरासत में रहते हुए अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापस जाना चाहते हैं."
इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के लिए सीजेपी का घोषित प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर था लेकिन नेहा बोरा समर्थकों समेत पुलिस को चकमा देकर दिल्ली हाट पहुंचकर प्रदर्शन करती दिखीं।
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के अनुसार, नेहा बोरा के साथ योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, दीपांकर भट्टाचार्य को सफ़दरजंग फ़्लाईओवर से हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने एक्स पर पोस्ट किया, "मैं हिरासत में हूं. आंदोलन नहीं. लोग अभी सफ़दरजंग फ़्लाईओवर पर जुट रहे हैं. अगर पहुंच सकते हैं, तो पहुंचिए. अगर आपको रोका जाए, तो वहीं बैठ जाइए और डटे रहिए. हमें हिरासत में लिया गया है. लेकिन इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."
"मेरे साथी जेन ज़ी, यह हमारा 1942 है. उनकी जेलों में हममें से कुछ लोग तो समा सकते हैं, लेकिन हम सब नहीं. आज हममें से किसी को भी जहां रोका जाए, वहीं बैठकर शुरुआत कर दें. हर नुक्कड़ जंतर-मंतर बन जाएगा."
मार्च निकालने से पहले उन्होंने लोगों से दिल्ली हाट आने की अपील की थी और कहा था कि अब यही जंतर-मंतर होगा। उनके साथ सीपीआई-एमएल के जनरल सेक्रट्री दीपांकर भट्टाचार्य, सीनियर वकील प्रशांत भूषण और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी मौजूद थे।
इससे पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया।
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और गोपाल राय को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
शनिवार सुबह, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली आते वक़्त विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने सीजेपी के एक्स हैंडल पर एक वीडियो अपलोड करके कहा कि आंदोलन का नेतृत्व अब अजिंक्य शिंदे करेंगे।
इससे पहले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह को हिरासत में लिया गया था।
इस बीच, मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में लिया जा रहा है और बसों में भरकर ले जाया जा रहा है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के 25 हज़ार जवानों को तैनात किया गया है। साथ ही दिल्ली के अंदर 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। जंतर-मंतर और इससे चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।
समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस की ओर से शेयर किए गए वीडियो में दिल्ली पुलिस सड़कों पर कीलें बिछाती दिख रही है। कीलें लगाने पर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने लिखा है, ''मोदी सरकार ने किसान आंदोलन वाली नुकीली कीलें जनता के स्वागत में आज फिर दिल्ली की सड़कों पर बिछा दी हैं.''
सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर शनिवार को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। ये संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं।
लीगल मामलों की न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए।
यह अवमानना याचिका गृह मंत्रालय के सचिव आईएएस गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त आईपीएस अनुराग कुमार और डीएमआरसी की अध्यक्ष आईएएस डी. थारा के ख़िलाफ़ दायर की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की 120 से ज़्यादा कंपनियों के तैनात रहने की उम्मीद है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया था. यानी प्रस्तावित प्रदर्शन से महज़ तीन दिन पहले, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है.
अभिजीत दीपके ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "मुझे हैरानी होती है कि प्रधानमंत्री इस देश के युवाओं और जनता से इतने डरे हुए क्यों हैं. सभी रेलवे सेवाएं और मेट्रो स्टेशन बंद करने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया और सड़कें रोक दी हैं."
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक़, कॉकरोच जनता पार्टी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रातभर में कम से कम 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि शनिवार रात 12:30 बजे तक हिरासत में लिए गए लोगों में से क़रीब 250 दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी ज़िले से थे।
अधिकारियों के मुताबिक, ये हिरासत एहतियातन की गई हैं. ऐसे लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है, जिनका पहले प्रदर्शनकारियों को जुटाने और 'ग़ैरक़ानूनी' स्थिति पैदा करने का इतिहास रहा है.
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