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Backस्वायत्त विमान: पायलट रहित उड़ानों का भविष्य और चुनौतियां
स्वायत्त विमान: पायलट रहित उड़ानों का भविष्य और चुनौतियां
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BBC हिंदी12 hours agoTech6 min readIndia

स्वायत्त विमान: पायलट रहित उड़ानों का भविष्य और चुनौतियां

पाइका और अन्य कंपनियां कृषि और माल ढुलाई के लिए स्वायत्त विमान विकसित कर रही हैं, लेकिन सुरक्षा और नियम अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।

Quick Look

सैन फ्रांसिस्को स्थित पाइका जैसी कंपनियां कृषि छिड़काव और माल ढुलाई के लिए स्वायत्त विमान विकसित कर रही हैं। हालांकि ये विमान दक्षता और सुरक्षा में सुधार का वादा करते हैं, लेकिन सख्त सुरक्षा मानक और पायलट संघों का विरोध इसके व्यापक विस्तार में चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

AI-generated summary

Why It Matters

स्वायत्त विमानन तकनीक का उपयोग वर्तमान में कृषि छिड़काव और माल ढुलाई के लिए किया जा रहा है। कंपनियां इसे भविष्य में यात्री परिवहन के लिए विकसित करने का लक्ष्य रखती हैं।

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कैलिफोर्निया की सैन जोकिन घाटी में एक अल्फाल्फा (एक किस्म की घास) के खेत के ऊपर, एक छोटा विमान बहुत कम ऊंचाई पर उड़कर फ़सल पर कीटनाशक का छिड़काव कर रहा है. ख़ास बात ये है कि विमान में पायलट नहीं है.

इंजीनियर रस्स मारोट्ज़के कहते हैं, "इस तरह के विमान वास्तव में एक सामान्य विमान की तुलना में ज़्यादा नीचे जा सकते हैं."

उनका कहना है कि कम ऊंचाई पर उड़ने से स्प्रे का बहाव कम होता है और इसलिए पारंपरिक विमानों से फसलों पर छिड़काव की तुलना में ऐसे विमानों से छिड़काव करने में कम केमिकल की ज़रूरत होती हैै.

यह पायलट रहित विमान पाइका कंपनी का है, जहां मारोट्ज़के फ़्लाइट इंजीनियर के रूप में काम करते हैं.

ये स्टार्ट अप सैन फ्रांसिस्को में है. यह बिना कॉकपिट वाले विमान बनाता है. इन ऑटोमेटिक (स्वचालित) विमानों को फसलों पर छिड़काव करने या माल पहुंचाने जैसे कामों के लिए डिज़ाइन किया गया है.

यह उन चुनिंदा कंपनियों में से एक है जो ऐसे विमानों को कमर्शियल सर्विस में लाने की होड़ में लगी हैं.

शहरी क्षेत्रों में उड़ने वाली हवाई टैक्सियाँ, जिन्हें इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटीओएल) विमान कहा जाता है, ने ऑटोनॉमस एवियेशन (स्वायत्त विमानन) के क्षेत्र में काफी ध्यान आकर्षित किया है.

ऐसे विमान बनाने वाली कंपनियों को उम्मीद है कि भविष्य में यात्रियों की आवाजाही के लिए भी ऐसे एरोप्लेन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

पाइका के सह-संस्थापक और सीईओ माइकल नोर्सिया ने कहा, "अब पूरी तरह से बड़े पैमाने पर ऐसे यात्री विमान बनाना ही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है."

वो मिनीबस की क्षमता वाले पाइका विमानों के एक बड़े बेड़े की कल्पना करते हैं जो अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर यात्रियों को ले जाएंगे.

"इस बात की काफी संभावना है कि हम ईवीटीओएल उद्योग से पहले उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे."

मैं पाइका के फसल छिड़काव यंत्रों के परीक्षण स्थलों में से एक पर आया हूँ, जो कंपनी के कारखाने से लगभग 80 किलोमीटर पूर्व में स्थित है और एक ऊबड़-खबड़ कच्ची सड़क से जहां पहुँचा जा सकता है.

आज मारोट्ज़के और उनके एक सहकर्मी एक प्रेक्टिस करने वाले विमान पर सॉफ्टवेयर अपडेट का परीक्षण कर रहे हैं.

लगभग एक दर्जन पाइका विमान पहले से ही ब्राजील में मौजूद हैं, जहां उनका उपयोग कपास और सोयाबीन जैसी फसलों पर छिड़काव करने के लिए किया जाता है. यह काम पहले पायलट वाले विमानों से किया जाता था.

फसल छिड़काव करने वाला यह विमान पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है. इसकी बैटरी आगे के हिस्से में लगी है. यह लगभग 35 मिनट तक उड़ान भर सकता है और अपने मध्य भाग में स्थित टैंक में 300 लीटर तक की छिड़काव सामग्री (स्प्रे) ले जा सकता है.

पाइका के विमानों को बड़े ड्रोन भी कहा जाता है, लेकिन यह कहना इनकी क्षमता को कम आंकने जैसा होगा. इन सभी के पंखों का फैलाव 11.5 मीटर है.

खेत के बगल में रखे एक शिपिंग कंटेनर के अंदर, इंजीनियर कंप्यूटर पर उस क्षेत्र को चिह्नित करते हैं जहाँ वे विमान से छिड़काव करना चाहते हैं. फिर सॉफ्टवेयर रास्ते की योजना बनाता है, जिसमें पहले से ही मैप बिजली लाइनों जैसी बाधाओं को ध्यान में रखता है.

खेत के बगल में बने रनवे पर विमान टेक-ऑफ करता है. लगभग 15 मिनट बाद, स्प्रे कम होने का पता चलने पर, विमान मैन्युअल रूप से ईंधन भरने और प्रदर्शन के लिए बैटरी बदलने के लिए ख़ुद ही लैंड करता है. फिर यह दोबारा उड़ान भरता है और ठीक उसी जगह से स्प्रे करना शुरू कर देता है जहाँ से रुका था.

ऑटोनॉमस उड़ान, ऑटोपायलट से भिन्न होती है.

ऑटोपायलट, कार में क्रूज कंट्रोल और लेन-कीपिंग फंक्शन की तरह ही सहायता प्रदान करता है.

लेकिन स्वायत्त प्रणालियों का लक्ष्य सेंसर डेटा को समझने और विमान को नियंत्रित करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए, कम से कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ, टेक-ऑफ और लैंडिंग सहित पूरी उड़ान को संभालना है.

ख़ुद से उड़ने वाले विमानों का विकास ख़ुद चलने वाली कारों की तुलना में धीमा रहा है, इसके बावजूद कि वे ऐसे वातावरण में काम करते हैं जिसे आम तौर पर अधिक सिस्टमेटिक और पूर्वानुमानित माना जाता है.

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में इस फ़ील्ड के विशेषज्ञ माइकल कोचेन्डरफर का कहना है कि इसका एक कारण यह है कि बड़ी तकनीकी कंपनियों ने कारों पर अपना ध्यान दोगुना कर दिया है और टेक्नॉलॉजी में भारी मात्रा में निवेश किया है.

लेकिन इसका एक कारण यह भी है कि विमानों को कारों की तुलना में कहीं ज़्यादा सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है, जिससे तैनाती के लिए एक बहुत उच्च मानदंड निर्धारित होता है.

कोचेन्डरफर कहते हैं, "हवाई दुर्घटनाओं के परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं."

सैन्य क्षेत्र की रुचि इस तकनीक को आगे बढ़ाने में सहायक रही है. कई कंपनियों के पास अपने सिस्टम का प्रदर्शन और परीक्षण करने के लिए रक्षा अनुबंध हैं, जिनमें अक्सर नागरिक क्षेत्र की तुलना में कम बाधाएं होती हैं, और कुछ तो पहले से ही सैन्य ग्राहकों को सप्लाई कर रही हैं.

अमेरिका में, वाणिज्यिक नागरिक उपयोग के लिए अब तक स्वीकृत सबसे बड़ा इस तरह का विमान पाइका का फसल छिड़काव वाला विमान है जिसे पिछले साल ही लाइसेंस मिला है.

हालांकि, इसका संचालन एक सीमित कृषि क्षेत्र तक ही सीमित है और इसके लिए एक जमीनी संचालक और एक पर्यवेक्षक की ज़रूरत होती है. इससे पहले इसे ब्राजील में भी इसी तरह की मंजूरी मिल चुकी है, जहां नियम अधिक उदार हैं.

पाइका का लक्ष्य वर्तमान में प्रति वर्ष लगभग दो दर्जन विमानों के उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक 1000 तक पहुंचाना है. प्रत्येक विमान की कीमत 550,000 डॉलर है और ग्राहकों को उन्हें संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

ब्रिटेन ने अभी तक इस तरह के किसी भी दीर्घकालिक अभियान को मंजूरी नहीं दी है, हालांकि ब्रिटिश कंपनी विंडरेसर शेटलैंड और ओर्कनी में एक स्वायत्त मालवाहक सेवा शुरू करने की अनुमति मांग रही है. इसके विमान, जो दूरदराज के क्षेत्रों में सामान पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, यूक्रेन में भी मिशन पर उड़ान भर रहे हैं.

विंडरेसर के संस्थापक और अध्यक्ष स्टीफन राइट कहते हैं, "यह निश्चित रूप से यूके में और शायद दुनिया भर में ड्रोन द्वारा शुरू की जाने वाली पहली भारी माल ढुलाई सेवा होगी."

समर्थकों का कहना है कि स्वायत्त विमान पायलटों की कमी को दूर कर सकते हैं, लोगों को फसल छिड़काव जैसे खतरनाक कामों से मुक्त कर सकते हैं, दक्षता में सुधार कर सकते हैं . इनसे लागत में कटौती की जा सकती है क्योंकि एक ही संचालक कई विमानों की देखरेख कर सकता है.

वे यह भी तर्क देते हैं कि ऑटोमेटिक फ़्लाइंग से हवाई यात्रा अधिक सुरक्षित हो सकती है, और वो स्वचालित प्रणालियों की शुरुआत के साथ दुर्घटनाओं में आई पिछली गिरावट का हवाला देते हैं.

दूसरी ओर पायलटों के संगठन अभी भी सतर्क हैं.

यूएस एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन पायलटों को हटाने को "सुरक्षा के साथ एक गंभीर जुआ और एक अतिवादी कदम" बताती है.

फसलों पर कीटनाशक छिड़काव करने वाले पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले अमेरिकी राष्ट्रीय कृषि विमानन संघ का कहना है कि छोटे मानवरहित विमानों को उनके पायलटों के लिए देखना मुश्किल हो सकता है. संघ का यह भी कहना है कि पायलट वाले विमान कहीं अधिक बड़े क्षेत्र में तेजी से छिड़काव कर सकते हैं.

पाइका और विंडरेसर कंपनियां विमानों का निर्माण बिल्कुल नए सिरे से कर रही हैं, उनका तर्क है कि इससे शुरुआत से ही स्वायत्तता को डिजाइन में शामिल किया जा सकता है और विमान को काम के अनुरूप बनाया जा सकता है.

कुछ अन्य लोग मौजूदा बड़े विमानों को ही संशोधित कर रहे हैं.

बोइंग की निवेश शाखा द्वारा समर्थित, अमेरिका स्थित रिलायबल रोबोटिक्स वर्तमान में सेसना 208बी ग्रैंड कारवां पर अपने सिस्टम का परीक्षण कर रही है, जो एक सिंगल-पायलट कार्गो विमान है जो सैकड़ों किलोमीटर तक लगभग 1360 किलोग्राम पेलोड ले जा सकता है.

अमेरिका स्थित मर्लिन लैब्स भी बड़े सैन्य विमानों पर काम कर रही है और अब अपनी प्रणाली को दो पायलट वाले लॉकहीड मार्टिन सी-130जे सैन्य परिवहन विमान में लागू कर रही है, जिसके बाद वाणिज्यिक बहु-चालक दल वाले कार्गो विमानों की योजना है.

इन कंपनियों का एआई को लेकर दृष्टिकोण भी अलग-अलग है.

रिलायबल इससे पूरी तरह बच रहा है, यह तर्क देते हुए कि इससे प्रमाणन प्रक्रिया जटिल हो जाएगी.

स्वायत्त उड़ान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है पायलट की अन्य विमानों और बाधाओं को पहचानने और उनके आसपास सुरक्षित रूप से पैंतरेबाजी करने की क्षमता की नकल करना, और इसमें ग़लती की गुंजाइश लगभग न के बराबर है.

अभी तक कोई सटीक समाधान न होने के कारण, कंपनियां अतिरिक्त बैकअप प्रदान करने के लिए विभिन्न सेंसर सिस्टम जोड़ रही हैं और साथ ही उन सिस्टमों की नकल भी बना रही हैं जो पहले से ही मानक के रूप में मौजूद हैं. फिर भी बिना पायलट वाले विमानों में जोख़िम बहुत ज़्यादा है.

वहीं, मर्लिन एआई से संचालित कैमरों का उपयोग करके वस्तुओं का पता लगाने और उन्हें वर्गीकृत करने का काम कर रही है.

पाइका ने शुरुआत से ही पेड़ों, वाहनों, बड़े पक्षियों और भूभाग का पता लगाने के लिए लिडार का उपयोग किया है. लेकिन इसकी रेंज सीमित है, इसलिए कंपनी इसमें एआई-संचालित कैमरे जोड़ने की भी योजना बना रही है.

इस बीच, भले ही पूरी तरह से स्वायत्त यात्री उड़ान अभी भी दूर की कौड़ी बनी हुई है, लेकिन कई लोगों को उम्मीद है कि जिस तकनीक का आविष्कार किया जा रहा है वह धीरे-धीरे वाणिज्यिक विमानन में प्रवेश करेगी, जिससे पायलट द्वारा संचालित उड़ान अधिक सुरक्षित हो सकती है.

अमेरिकी पायलट संघ, एएलपीए का कहना है कि यह एक स्वागत योग्य कदम होगा.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • पाइका 2030 तक प्रति वर्ष 1000 विमानों के उत्पादन का लक्ष्य रखेगी।

    Possible · Within years

Open Questions

  • स्वायत्त विमानों के लिए वैश्विक सुरक्षा मानक कब तक तय होंगे?
  • पायलट संघों के विरोध का उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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