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Backनशरा नईम: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास में उपाध्यक्ष पद पर जीतने वाली पहली महिला कौन हैं?
नशरा नईम: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास में उपाध्यक्ष पद पर जीतने वाली पहली महिला कौन हैं?
Politics
BBC हिंदी1 hour agoPolitics3 min readIndiaView translation

नशरा नईम: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास में उपाध्यक्ष पद पर जीतने वाली पहली महिला कौन हैं?

एएमयू के 105 साल के इतिहास में नशरा नईम उपाध्यक्ष बनने वाली पहली महिला बनीं, छह साल बाद बहाल हुए छात्र संघ चुनाव में छात्रों ने क्षेत्रवाद को नकार कर मुद्दों को प्राथमिकता दी।

Quick Look

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में मोहम्मद नोमान अशरफ़ अध्यक्ष और नशरा नईम उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। 105 साल के इतिहास में नशरा उपाध्यक्ष बनने वाली पहली महिला हैं। छह साल के अंतराल के बाद बहाल हुए इन चुनावों में छात्रों ने क्षेत्रवाद के बजाय मुद्दों पर मतदान किया।

AI-generated summary

Why It Matters

एएमयू छात्र संघ चुनाव 2018 के बाद पहली बार हुए हैं। 2019 से प्रशासन ने हिंसा और अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए यूनियन को निलंबित कर रखा था।

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में बिहार के सहरसा के रहने वाले मोहम्मद नोमान अशरफ़ ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है, जबकि नशरा नईम उपाध्यक्ष चुनी गई हैं।

वहीं, मोहम्मद हमदान ने ऑनरेरी सेक्रेटरी पद पर जीत हासिल की.

इसी साल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के आंदोलन के बाद स्टूडेंट्स यूनियन की बहाली हुई थी. इससे पहले एएमयू स्टूडेंट्स यूनियन के आख़िरी चुनाव 2018 में हुए थे.

चुनाव की सबसे अहम बात ये है कि नशरा नईम इस संस्थान के 105 साल के इतिहास में स्टूडेंट्स यूनियन की उपाध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली महिला हैं.

प्रेसीडेंट पद पर जीतने वाले नोमान अशरफ़ भी मानते हैं कि इस बार नशरा नईम की जीत के साथ स्थिति बदली है.

इस चुनाव में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन, विमेंस कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन और एएमयू कोर्ट के स्टूडेंट्स प्रतिनिधियों के पदों के लिए मतदान हुआ था.

कौन हैं मोहम्मद नोमान अशरफ़

प्रेसीडेंट पद पर जीतने वाले मोहम्मद नोमान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में पीएचडी स्कॉलर हैं. वह बिहार के सहरसा ज़िले के रहने वाले हैं और 2017 से यूनिवर्सिटी के छात्र हैं.

नोमान अशरफ़ ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि उन्होंने स्टूडेंट्स के लिए रोज़गार और प्लेसमेंट के अवसर, महिलाओं की सुरक्षा, यूनिवर्सिटी के भीतर परिवारवाद और भ्रष्टाचार और यूनिवर्सिटी की ज़मीन को बचाने जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा था.

अपनी जीत पर उन्होंने बताया कि क्षेत्रवाद की राजनीति लंबे समय से इस यूनिवर्सिटी का हिस्सा रही है, लेकिन इस बार उन्होंने इस राजनीति को चुनौती दी है.

नोमान ने कहा, "इस बार चुनाव में बड़ी संख्या में नए स्टूडेंट्स थे और उन्हें यूनिवर्सिटी के अलग-अलग लॉबियों के बारे में जानकारी भी नहीं थी. इसलिए स्टूडेंट्स ने उम्मीदवारों के विज़न और विचारों को ध्यान में रखकर वोट किया."

नोमान के मुताबिक़, स्टूडेंट्स ने क्षेत्रवाद की किसी लॉबी में शामिल होने के बजाय यूनिवर्सिटी से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी."

पिछले दिनों कैंपेन के दौरान सोशल मीडिया पर नोमान का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो ग़ज़ा, फ़लस्तीन और सूडान की बात करते हुए नज़र आ रहे थे.

इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "हिंदुस्तान हो या दुनिया के जितने भी मज़लूम लोग हैं उनके लिए आवाज़ उठाना गुनाह है? ग़ज़ा हो, फ़लस्तीन हो, बांग्लादेश हो या मुल्क में कहीं भी ज़ुल्म या बर्बरता हो रही है तो उनके लिए हम इस प्लेटफ़ॉर्म से आवाज़ नहीं उठाएंगे तो कौन उठाएगा."

नशरा नईम की ऐतिहासिक जीत

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में महिला उम्मीदवारों ने कई पदों पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है.

शनिवार को घोषित नतीजों के अनुसार, उन्होंने 13 में से 6 पदों पर जीत हासिल की, जिसमें पांच कैबिनेट और एक उपाध्यक्ष का पद भी शामिल है.

पांच निर्वाचित महिला कैबिनेट सदस्यों में हानिया ख़ान, अरीबा दिलशाद, शाज़िया शमीम, अनिका रुम्मन राही और शाहीन परवीन हैं.

नशरा नईम इस संस्थान के 105 साल के इतिहास में छात्र संघ की उपाध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली महिला बनीं.

एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी की ओर से जारी दस्तावेज़ के मुताबिक़, उन्हें 7,091 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराया, जिन्हें 5,818 वोट मिले थे.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली एलएलबी की इस छात्रा का यूनिवर्सिटी से पुराना नाता है.

उन्होंने अपनी हायर सेकेंडरी की पढ़ाई एएमयू के ही एक 'विमेंस कॉलेज' से की है, उनके पिता भी इसी विश्वविद्यालय के स्टूडेंट रहे हैं.

'इंडियन एक्सप्रेस' से बात करते हुए नशरा ने बताया, "शुरुआत में मैंने कहा था कि मैं अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहती हूँ. लेकिन मेरे पिता विश्वविद्यालय को बहुत अच्छी तरह जानते हैं. उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि उन्हें लगा कि यूनियन बहाल होने के तुरंत बाद कैंपस शायद किसी महिला अध्यक्ष को स्वीकार न करे."

उन्होंने कहा, "मैंने इस बात पर गौर किया, क्योंकि मैं जीतने के लिए चुनाव लड़ रही हूँ, इसलिए मैंने उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया. लेकिन इस पूरे सफ़र में मेरे परिवार ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है."

अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करने वाले नोमान अशरफ़ ने बताया कि इससे पहले हुए छात्र संघ चुनावों में भी महिलाओं ने उपाध्यक्ष के साथ-साथ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी. इस बार नशरा नईम की जीत के साथ यह स्थिति बदली है.

उन्होंने कहा, "अलीगढ़ ने यह संदेश दिया है कि कोई भी यूनिवर्सिटी का नेतृत्व कर सकता है."

एएमयू का स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव क्यों अहम

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े स्टूडेंट्स राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर होकर अपनी आवाज़ उठाते रहे हैं.

छात्र संघ चुनाव के महत्व पर बात करते हुए नोमान ने कहा, "हम मानते हैं कि इस यूनिवर्सिटी से अल्पसंख्यक समुदाय के जज़्बात और अहसास जुड़े हुए हैं."

"ऐसे में यहाँ से उनके हक़ में एक मज़बूत और बेबाक आवाज़ उठती है, जो आगे चलकर नेतृत्व भी करती है. इसलिए यह चुनाव महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इससे अल्पसंख्यक नेतृत्व को बढ़ावा मिलता है."

यूनिवर्सिटी में आख़िरी बार छात्र संघ चुनाव 2018 में हुए थे. एएमयू में आठ साल के अंतराल के बाद छात्र संघ के लिए मतदान हुआ.

दरअसल, प्रशासन ने कैंपस में हिंसा, अनुशासनहीनता और क़ानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए 2019 से स्टूडेंट्स यूनियन को निलंबित कर रखा था.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव की मांग को लेकर 21 सितंबर 2026 से स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन शुरू किया. इस दौरान एमए के छात्र यासिर फ़हद भूख हड़ताल पर बैठ गए थे.

इस बीच स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन पर दबाव बनाकर आंदोलन ख़त्म करवाने की कोशिश की. इसके बाद उन्होंने छात्र संघ की मांग के साथ प्रॉक्टर को हटाने की भी मांग की थी.

क़रीब 20 दिनों के आंदोलन के बाद 9 अक्तूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगें स्वीकार कर लीं.

Open Questions

  • नई छात्र यूनियन का कार्यकाल कैसा रहेगा?
  • प्रशासन और छात्र यूनियन के बीच भविष्य के संबंध कैसे होंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.