राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप, कहा- वोट चोरी से संविधान खतरे में
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लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस की इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों पर 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है और वोट चोरी हो रही है, जिससे संविधान और लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा और उनसे सरकारी गवाह बनने की अपील की। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशू त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाए।
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Why It Matters
द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर आपत्तियां शामिल हैं। राहुल गांधी लगातार तीन साल से 'वोट चोरी' का मुद्दा उठा रहे हैं।
प्रकाशित 24 सितंबर 2026, 17:46 IST
अपडेटेड 2 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में बुधवार को छपी एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक ख़ास प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.
राहुल गांधी ने इस दौरान दावा किया कि वो लगातार तीन सालों से सुबूत के साथ 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाते रहे हैं और अब दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है.
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस का जवाब देने के लिए बीजेपी की ओर से सुधांशू त्रिवेदी आए. उन्होंने राहुल गांधी को राजनीतिक दृष्टि से विवेक शून्य बताते हुए कहा कि "एंटी इनकंबेंसी कांग्रेस के ख़िलाफ़ हमेशा से मज़बूत रही है, लेकिन जब से पारदर्शी चुनाव हो रहे हैं तब से उनको सत्ता में आने के लाले पड़ गए हैं."
कांग्रेस नेता ने इस दौरान फ़रवरी 2025 से लेकर अब तक उन प्रेस कॉन्फ़्रेंस और कार्यक्रमों का ज़िक्र किया जब-जब उन्होंने कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया था.
राहुल गांधी ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता के शिखर पर भी चुनाव हारीं लेकिन बीते कई चुनावों के बाद 'एंटी-इनकंबेंसी' जैसे ख़त्म सी हो गई है.
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा कि लोकतंत्र को बर्बाद नहीं होने देना है. साथ ही राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से मांग करते हुए कहा कि वो सरकार गवाह बन जाएं.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या छपा था?
अंग्रेज़ी अख़बार की खोजी रिपोर्ट के छपने के बाद विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
अख़बार की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.
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रिपोर्ट के मुताबिक़, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए'."
चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं.
राहुल गांधी ने क्या-क्या सवाल खड़े किए?
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी, जैसे राज्यों में हमेशा चुनावों के बाद सरकारें बदलती थीं लेकिन अचानक चुनावों में एंटी-इनकंबेंसी ही ख़त्म हो गई.
उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज़्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं. लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता. क्योंकि भारत में 'एंटी-इनकंबेंसी' (मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी) नाम की एक बुनियादी ताक़त होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को नहीं बख़्शती."
"इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीतती हैं, अपनी लोकप्रियता के शिखर पर होती हैं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही ज़बरदस्त एंटी-इनकंबेंसी और भारी दबाव का सामना करना पड़ता है."
"एक के बाद एक, कई नेताओं के साथ ठीक यही होता है. ऐसा कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ होता है, लेकिन किसी वजह से, नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा कभी नहीं होता. अमित शाह के साथ ऐसा नहीं होता, बीजेपी के साथ ऐसा नहीं होता."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, "हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पॉलिटिकल फ़ोर्स कहां गायब हो गई है. इसके हम जवाब ढूंढ रहे थे और आख़िर हमें इसका जवाब मिला. वोट हमारे देश की बुनियाद है. वोट जिसे चुनाव आयोग सुरक्षित रखता है. इसे संविधान से ताक़त मिलता है. अगर वोट तबाह हो रहे हैं तो हमारा संविधान तबाह होगा."
"इसकी कोई ताक़त नहीं रहेगी, इसका कोई काम नहीं रहेगा. अगर संविधान तबाह होता है तो हमारे क़ानून ख़त्म हो जाएंगे और संस्थानों का कोई मतलब नहीं रहेगा. ये हमारे वोट पर हमला है. ये हर नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है. हम लगातार कह रहे हैं कि वोट के साथ कोई न कोई दिक्कत है. चुनाव आयोग इसको सुरक्षित रखता है."
बीजेपी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर उठाए सवाल
सुधांशू त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राहुल गांधी को राजनीति के बारे में ज्ञान शून्य होने का दावा किया.
उन्होंने कहा, "1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस नहीं लौटी है, बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस कभी वापस नहीं लौटा है. बिहार में 1990 के बाद से कभी कांग्रेस नहीं रही है. यूपी में 1989 के बाद से गांधी परिवार के गृह राज्य में उनकी सरकार नहीं रही है. 1999 के बाद से ओडिसा में सरकार नहीं रही है. राहुल गांधी को ज्ञान नहीं है."
"राहुल जी और सोनिया जी के आने के बाद एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा है. गांधी परिवार 100 साल से कांग्रेस पार्टी की सत्ता में है. आज एंटी इनकंबेंसी इतनी मज़बूत हो गई है कि वो अपनी सीट बिना सहयोगी दल की बैसाखी के नहीं जीत सकते."
"25 साल से रायबरेली और अमेठी सीट समाजवादी पार्टी के समर्थन से कांग्रेस जीतती रही है वरना सोनिया गांधी और राहुल गांधी में क्षमता नहीं है कि अपनी ख़ानदानी सीट अपने दम पर निकाल लें. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वायनाड की सीट मुस्लिम लीग के समर्थन से जीती थी."
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल पूछा कि क्या इस रिपोर्ट में किसी भी चुनाव आयुक्त का बयान है?
उन्होंने कहा, "उस न्यूज़ रिपोर्ट में क्या किसी भी चुनाव आयुक्त का कोई बयान है? नहीं है तो फिर किस आधार पर कोई बोल रहा है कि चुनाव आयुक्त ने ये बोल रहा है. मैं समाचार पत्रों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए कहता हूं कि बाकायदा संबंधित व्यक्ति से पूछा जाता है. क्या उनका बयान है? नहीं है."
"क्या आपके पास कोई ऐसी रिपोर्ट है कि सर्वसम्मति से निर्णय न हुआ हो? क्या आपके पास ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ़्रेंस है जिसमें तीनों कमिश्नर न रहे हों? तो इस बात का आधार क्या है? मैं सीधा सवाल कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं कि जिस रिपोर्ट में किसी भी चुनाव आयुक्त का कोई बयान नहीं है, ऑफ़ द रिकॉर्ड भी कोई जवाब नहीं है. तो उसका आधार क्या है?"
'वोट चोरी, क़ानून चोरी और फिर संस्थान चोरी'
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा, "कृपया समझें कि यहां क्या हो रहा है. आपने जो किया है, वह भारतीय राष्ट्र के ख़िलाफ़ एक काम है. यह चुनाव में कोई छोटी-मोटी धांधली नहीं है. यह भारत के संविधान पर हमला है, यह हमारे देश के कानूनी ढांचे पर हमला है, और आप ही वह व्यक्ति थे जिन्हें यह सुनिश्चित करना था कि वोट सुरक्षित रहें."
"हम भारत में लोकतंत्र को ख़त्म नहीं होने देंगे. और जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें सज़ा ज़रूर मिलेगी- आज नहीं तो कल या परसों. उन्हें सज़ा मिलेगी ही. ज्ञानेश कुमार को अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए."
राहुल गांधी ने पीएम मोदी, अमित शाह और गौतम अदाणी समेत सात लोगों की तस्वीरों को दिखाते हुए कहा कि ये लोकतंत्र को तबाह करने वाले लोग हैं और भारतीय चुनावों में 100 फ़ीसदी धांधली हो रही है.
"दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार सवाल उठाए हैं. मैंने लगातार ये सवाल उठाए लेकिन अब दो चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए हैं. ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने चुना है. अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार हमारे वोटिंग सिस्टम को हो रहे नुक़सान के लिए ज्ञानेश कुमार ज़िम्मेदार हैं. वोट चोरी के बाद क़ानून चोरी होती है और फिर संस्था चोरी होती है. अगर वोट चुरा लिया गया है और संसद में बैठा कोई सांसद कोई भी क़ानून बनाता है तो ये अवैध है."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक टाइमलाइन भी इस दौरान दिखाई जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने कब-कब चुनाव आयोग में गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया था.
राहुल गांधी ने ये भी कहा कि उन्होंने अपनी असहमति का नोट ज्ञानेश कुमार के चयन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था लेकिन उन्होंने ज्ञानेश कुमार को चुना.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
चुनाव आयोग के कामकाज की संसद में जांच होगी
Likely · Within weeks
चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज आपत्तियों की जांच के लिए एक समिति गठित की जा सकती है
Possible · Within months
Open Questions
- चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज आपत्तियों की具体内容 क्या है?
- चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की है?
- क्या इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
- राहुल गांधी के दावों के समर्थन में क्या ठोस सबूत हैं?




