दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट में कॉकपिट के भीतर हिंसक झड़प की घटना
दुबई से इसराइल के तेल अवीव आ रही FZ1073 फ्लाइट में को-पायलट द्वारा पायलट पर कथित हमले के बाद कॉकपिट सुरक्षा पर नई बहस छिड़ गई है।
Quick Look
दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर को-पायलट द्वारा पायलट पर कथित हमले की घटना सामने आई है, जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के ताबुक की ओर मोड़ दिया गया।
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Why It Matters
दुबई से तेल अवीव आ रही FZ1073 फ्लाइट के कॉकपिट में कथित तौर पर को-पायलट और पायलट के बीच हिंसक झड़प हुई।
दुबई से बुधवार को इसराइल के तेल अवीव आ रही FZ1073 फ्लाइट की घटना ने कॉकपिट के भीतर की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
कहा जा रहा है कि को-पायलट ने पायलट पर हमला कर उसे बुरी तरह ज़ख़्मी कर दिया और वह फ्लाइट को अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश कर रहा था.
सबसे पहले जानते हैं कि कॉकपिट क्या होता है?
कॉकपिट विमान का अगला हिस्सा होता है, जहाँ से पायलट विमान का संचालन और कंट्रोल करते हैं. कमर्शियल एविएशन में इसे फ्लाइट डेक भी कहा जाता है. अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन दोनों शब्दों को एक ही अर्थ में इस्तेमाल करता है.
कॉकपिट के अंदर क्या होता है?
बोइंग 737 मैक्स जैसे यात्री विमान के कॉकपिट में आम तौर पर ये चीज़ें होती हैं-
दो पायलट सीटें: एक कैप्टन के लिए और दूसरी फर्स्ट ऑफिसर के लिए, जिसे आम तौर पर को-पायलट कहा जाता है.
फ्लाइट कंट्रोल: कंट्रोल कॉलम/योक, रडर पैडल और थ्रस्ट लीवर, जिनका इस्तेमाल विमान को मोड़ने, ऊपर उठाने, नीचे लाने और इंजन की शक्ति नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
डिजिटल स्क्रीन और इंस्ट्रूमेंट्स: इनमें ऊंचाई, गति, दिशा, इंजन की स्थिति, विमान की लोकेशन, मौसम/रडार और चेतावनी संदेश जैसी जानकारियां दिखाई देती हैं.
कम्युनिकेशन उपकरण: रेडियो सिस्टम, जिनके ज़रिए पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल, एयरलाइन के ऑपरेशंस और केबिन क्रू से संपर्क करते हैं.
नेविगेशन और ऑटोमेशन सिस्टम: इनमें फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोपायलट कंट्रोल शामिल हैं.
चेकलिस्ट, इमरजेंसी कंट्रोल और सुरक्षा उपकरण: दो पायलटों की सीटों के पीछे अक्सर एक अतिरिक्त ऑब्जर्वर या जंप सीट भी होती है.
कॉकपिट को यात्रियों के केबिन से एक मज़बूत और आम तौर पर लॉक रहने वाले दरवाज़े से अलग किया जाता है. इसमें एंट्री अधिकृत फ्लाइट क्रू तक सीमित होता है.
बेहद नियंत्रित परिस्थितियों में किसी अन्य अधिकृत व्यक्ति, जैसे ऑब्जर्वर सीट पर बैठे किसी ऑफ-ड्यूटी पायलट को भी एंट्री की अनुमति हो सकती है.
इस सुरक्षा व्यवस्था का मक़सद यात्रियों या किसी अनधिकृत व्यक्ति को विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने से रोकना है.
यही वजह है कि कॉकपिट के अंदर पहले से मौजूद किसी पायलट से जुड़ी घटना को सामान्य कॉकपिट सुरक्षा उल्लंघन के बजाय इनसाइडर थ्रेट यानी अंदरूनी ख़तरे के तौर पर देखा जाता है.
अब तक क्या पता चला?
दुबई से तेल अवीव जा रहा फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8, जिसमें 174 लोग सवार थे. कथित तौर पर कॉकपिट में हुई हिंसक झड़प के बाद फ्लाइट सऊदी अरब के ताबुक की ओर मोड़ दिया गया.
बताया गया कि इस दौरान को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया. यात्रियों और क्रू मेंबर ने कथित हमलावर को काबू में किया जबकि विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो पोजिशनिंग पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसे उतारा.
विमान ने पहले 7700 का नॉर्मल इमरजेंसी कोड भेजा और उसके बाद 7500 कोड भेजा, जो अनलॉफुल इंटरफेयरेंस का संकेत है. इसके बाद इसराइली लड़ाकू विमानों को अलर्ट किया गया था.
अहम बात यह है कि अधिकारियों और एयरलाइन ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह स्थापित नहीं किया है कि हमले का मक़सद क्या था, क्या इसका संबंध आतंकवाद से था, हथियार की पहचान या स्थिति क्या थी, या वह कॉकपिट तक कैसे पहुँचा.
इसराइल का आकलन आगे बदल सकता है, लेकिन नेतन्याहू ने कहा था कि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि इसमें ईरान शामिल था या नहीं. फ्लाईदुबई ने कहा कि जांच पूरी होने तक घटना के मूल कारण अज्ञात हैं.
दो लोगों वाले कॉकपिट का नियम
दो लोगों वाले कॉकपिट के नियम का मतलब है कि हर समय फ्लाइट डेक पर दो अधिकृत लोग मौजूद रहें.
अगर कोई ऑपरेटिंग पायलट अस्थायी रूप से कॉकपिट से बाहर जाता है, जैसे टॉयलेट जाने या किसी अन्य परिचालन कारण से, तो उसके वापस आने तक ट्रेंड केबिन क्रू का एक सदस्य कॉकपिट में मौजूद रहता है.
2015 में जर्मनविंग्स फ्लाइट्स 9525 की घटना के बाद इस नीति पर नए सिरे से ध्यान गया था. उस घटना में को-पायलट ने कप्तान के कॉकपिट से बाहर जाने के बाद उन्हें अंदर आने से रोक दिया था.
यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएएसए) ने शुरुआत में एयरलाइनों से फ्लाइट डेक पर दो अधिकृत लोगों को रखने की अपील की थी.
2016 में इस रुख़ में ढील दी गई और अब फिर से दो लोगों की मौजूदगी को पसंदीदा व्यवस्था के तौर पर समर्थन दिया गया है. हालांकि, यह पूरी दुनिया में लागू कोई एक समान और बाध्यकारी नियम नहीं है. अमेरिका, चीन और जापान समेत कई देशों में यह अनिवार्य है.
टु पर्सन रूल का मतलब हर समय दो योग्य पायलटों का मौजूद रहना नहीं है.
सामान्य कॉमर्शियल उड़ान में पहले से ही नियंत्रण पर दो लाइसेंसधारी पायलट होते हैं.
अतिरिक्त व्यक्ति वाला नियम उस स्थिति से जुड़ा है, जब कोई एक पायलट कॉकपिट से बाहर जाता है.
हर छोटी या मध्यम दूरी की उड़ान में तीसरे योग्य पायलट को रखना अलग और अधिक महंगी व्यवस्था होगी.
इससे एक पायलट के घायल या अक्षम होने की स्थिति में व्यवस्था की मज़बूती बढ़ सकती है, लेकिन यह अपने आप दो लोगों के बीच होने वाले किसी आपसी हमले को नहीं रोकती.
इस घटना में दो ऑफ ड्यूटी पायलटों की मौजूदगी से जबरदस्त फ़ायदा मिला. बताया जा रहा है कि वे क्रू-पोजिशनिंग के लिए यात्रा कर रहे थे, जिसे डेडहेडिंग कहा जाता है.
737 मैक्स और कॉकपिट सुरक्षा
ऐसा कोई सार्वजनिक संकेत नहीं है कि यह घटना बोइंग 737 मैक्स की डिजाइन संबंधी किसी समस्या के कारण हुई.
सुरक्षा से जुड़े सवाल फ्लाइट डेक तक पहुँच, चालक दल की जांच, हथियारों के नियंत्रण और अंदरूनी ख़तरे से निपटने की प्रतिक्रिया से जुड़े हैं.
आधुनिक बड़े यात्री विमान, जिनमें 737 मैक्स भी शामिल है, 9/11 के बाद लागू कॉकपिट सुरक्षा मानकों के तहत संचालित होते हैं.
इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइज़ेशन (आईसीएओ) के मानकों के तहत संबंधित विमानों में मज़बूत फ्लाइट डेक दरवाज़ा होना ज़रूरी है, जिसे जबरन प्रवेश के साथ-साथ छोटे हथियारों की गोलियों और ग्रेनेड के छर्रों से भी सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है.
आम तौर पर बोर्डिंग पूरी होने और विमान के बाहरी दरवाज़े बंद होने के बाद से लेकर लैंडिंग के बाद विमान के दोबारा खुलने तक कॉकपिट का दरवाज़ा लॉक रहता है. हालांकि अधिकृत प्रवेश की अनुमति होती है.
पायलट फ्लाइट डेक की दोनों सीटों से दरवाज़े को लॉक और अनलॉक कर सकते हैं और दरवाज़े के बाहर के इलाक़े की निगरानी कर सकते हैं. केबिन क्रू एक एक्सेस कीपैड के ज़रिए प्रवेश का अनुरोध कर सकता है.
कई विमानों में, अगर पायलट की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है, तो सिस्टम निर्धारित समय के बाद प्रवेश की अनुमति दे सकता है, जब तक कि पायलट सक्रिय रूप से प्रवेश को रोक न दे.
अमेरिकी एयरलाइनों के लिए बनाए जाने वाले नए यात्री विमानों में मुख्य कॉकपिट दरवाज़ा खुलने पर उसके आगे की जगह की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त बैरियर, होना ज़रूरी है.
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़एए) का यह नियम आगे बनाए जाने वाले विमानों पर लागू होता है और हर पुराने विमान में इसे लगाना अनिवार्य नहीं है.
ये सुरक्षा परतें कॉकपिट में घुसने की कोशिश करने वाले यात्री के ख़िलाफ़ बेहद प्रभावी हैं. लेकिन कॉकपिट के अंदर पहले से मौजूद किसी पायलट के ख़िलाफ़ यह बहुत प्रभावी नहीं होगा. यही वजह है कि यह मामला, अगर रिपोर्ट के मुताबिक़ इसकी पुष्टि होती है, एक इनसाइडर-रिस्क केस है.
भीतर का ख़तरा
आईसीएओ भीतरी ख़तरे को उस जोखिम के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें विमानन क्षेत्र के कर्मचारी अपने अधिकृत प्रवेश या विशेष जानकारी का इस्तेमाल ग़ैर-क़ानूनी हस्तक्षेप के लिए करते हैं या उसमें मदद करते हैं.
इसमें कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्टर, अस्थायी कर्मचारी और प्रतिबंधित क्षेत्रों या संवेदनशील जानकारी तक पहुँच रखने वाले अन्य लोग शामिल हो सकते हैं.
आईसीएओ यह भी चेतावनी देता है कि भीतरी ख़तरे की पहचान के लिए बहुत आसान प्रोफ़ाइलिंग नहीं की जानी चाहिए. अंदरूनी ख़तरा जानबूझकर की गई दुर्भावना, वैचारिक मक़सद, दबाव, बदले की भावना या आर्थिक दबाव से पैदा हो सकता है, लेकिन लापरवाही, आत्मसंतुष्टि, थकान, ख़राब निगरानी और प्रक्रियाओं का पालन न करने जैसी वजहों से भी पैदा हो सकता है.
9/11 के बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था को मुख्य रूप से ऐसे बाहरी हमलावरों को रोकने के लिए दोबारा डिजाइन किया गया था जो कॉकपिट तक पहुँचने की कोशिश करते हैं.
मज़बूत दरवाज़ा कॉकपिट के बाहर मौजूद हमलावर को रोक सकता है, लेकिन वह कॉकपिट के अंदर मौजूद एक पायलट को दूसरे पायलट से सुरक्षा नहीं दे सकता. FZ1073 की घटना, अगर रिपोर्ट के मुताबिक़ इसकी पुष्टि होती है, तो इसी बचे हुए जोखिम को सामने लाती है.
पायलटों की जांच
इस मामले में अभी हथियार की पुष्टि नहीं हुई है. एक संभावना के तौर पर कॉकपिट क्रैश एक्स का ज़िक्र किया गया है, जिसे विमान में आपात स्थिति में बाहर निकलने या किसी पैनल के पीछे लगी आग तक पहुँचने के लिए रखा जा सकता है.
यह ज़रूरी नहीं कि यात्रियों की सुरक्षा जांच के ज़रिए छिपाकर लाया गया हथियार हो.
जांचकर्ता अन्य संभावनाओं पर भी विचार कर सकते हैं-
किसी अनुमति प्राप्त इमरजेंसी टुल का कॉकपिट के अंदर ग़लत इस्तेमाल.
क्रू एक्सेस रूट और स्क्रीनिंग व्यवस्था में ऐसा अंतर जो यात्रियों की सुरक्षा जांच से अलग हो.
स्टाफ स्क्रीनिंग, रैंडम स्क्रीनिंग, सेकेंडरी स्क्रीनिंग या रिस्ट्रिक्टेड-एरिया एक्सेस कंट्रोल में खामियां.
अधिकृत एक्सेस रखने वाले किसी व्यक्ति का प्रतिबंधित वस्तु को एयरसाइड क्षेत्र में ले जाना.
आईसीएओ के दिशा-निर्देशों में विशेष रूप से कहा गया है कि यात्रियों के अलावा अन्य लोगों और उनके साथ ले जाई जाने वाली वस्तुओं की भी सिक्यॉरिटी-रिस्ट्रिक्टेड एरियाज में प्रवेश से पहले स्क्रीनिंग होनी चाहिए.
इसमें रैंडम और अनप्रेडिक्टेबल स्क्रीनिंग की ज़रूरत बताई गई है, क्योंकि इनसाइडर नॉलेज रखने वाले कर्मचारी अन्यथा यह सीख सकते हैं कि नियमित सुरक्षा जांच से कैसे बचा जाए.
कोड 7500 और इमरजेंसी लैंडिंग
ट्रांसपॉन्डर स्क्वाक चार अंकों का एक कोड होता है, जिसे विमान एयर ट्रैफिक कंट्रोल को भेजता है.
7500 अनलॉफुल इंटरफेयरेंस के लिए होता है, जिसे आम तौर पर हाईजैक कोड कहा जाता है. 7600 रेडियो कम्युनिकेशन में ख़राबी के लिए होता है.
7700 सामान्य आपात स्थिति यानी विमान को किसी भी आपात स्थिति के लिए तत्काल प्राथमिकता दी जाती है, चाहे वह मेडिकल, तकनीकी, आग, नियंत्रण संबंधी समस्या या कोई अन्य ख़तरा हो.
कोड 7500 अपने आप यह साबित नहीं करता कि पारंपरिक अर्थ में हाइजैकिंग हुई है. यह संकेत देता है कि कोई व्यक्ति विमान में ग़ैर-क़ानूनी हस्तक्षेप कर रहा हो सकता है.
इसमें हाइजैक की कोशिश, कॉकपिट में हिंसक घुसपैठ, दबाव डालना या विमान के नियंत्रण को ख़तरे में डालने वाली कोई अन्य होस्टाइल एक्ट शामिल हो सकती है.
यह कोड इसलिए अहम है क्योंकि जब सामान्य वॉइस कम्युनिकेशन सुरक्षित न हो, तब चालक दल इसे कंट्रोलर्स को चुपचाप अलर्ट करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है.
यह एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मार्ग है, जो अब्राहम एकॉर्ड्स के बाद बना. विमान में बड़ी संख्या में इसराइली यात्री सवार थे और इसे सऊदी अरब की ओर मोड़ दिया गया, जिसने इसराइल के साथ राजनयिक संबंध कायम नहीं किए हैं.
7500 सिग्नल के बाद इसराइल ने कथित तौर पर अपनी एयर डिफेंस पोस्चर बढ़ाई, जबकि सऊदी अरब तत्काल लैंडिंग, मेडिकल मदद और जांच का अधिकार रखने वाला देश बन गया.
इस घटना से यूएई, इसराइल और सऊदी अरब से जुड़े कई सवाल भी उठते हैं, जिनमें यात्री सुरक्षा, एविएशन-रूटिंग अरेंजमेंट्स, इटेलिजेंस शेयरिंगऔर संदिग्ध व्यक्ति के साथ जांच तक पहुँच शामिल हैं.
उड़ान का मार्ग और क्षेत्र में मौजूद सुरक्षा माहौल जियोपॉलिटिकल मक़सद को जांच का एक वैध पहलू बनाते हैं, लेकिन हमले का मक़सद अभी साबित नहीं हुआ है.
Open Questions
- हमले का मक़सद क्या था?
- क्या इसका संबंध आतंकवाद से था?
- वह कॉकपिट तक कैसे पहुँचा?





