
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन से पहले भारी सुरक्षा व्यवस्था और गिरफ्तारियां
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। पुलिस ने कई नेताओं और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद नेहा बोरा ने रणनीति बदलते हुए दिल्ली हाट से प्रदर्शन किया।
AI-generated summary
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग और एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के खिलाफ सीजेपी और वामपंथी संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रोटेस्ट से पहले सीपीआई-एमएल (लिबरेशन) के स्टूडेंट संगठन आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा अपने समर्थकों समेत घोषित प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर के बदले दिल्ली हाट पहुंचकर प्रदर्शन करती दिखीं.
नेहा बोरा पर पुलिस की कड़ी नज़र थीं लेकिन वो उसे चकमा देकर दिल्ली हाट पहुंच गईं. उन्होंने लोगों से दिल्ली हाट आने की अपील की और कहा कि ये अब यही जंतर-मंतर होगा.
उनके साथ सीपीआई-एमएल के जनरल सेक्रट्री दीपांकर भट्टाचार्य, सीनियर वकील प्रशांत भूषण और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी मौजूद थे.
इससे पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया.
नेहा बोरा पिछले कुछ महीनों के प्रदर्शनों के दौरान कई बार पुलिस से आमना-सामना कर चुकी हैं. जबकि दीपके के सामने ये पहला मौका था जब पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन से पहले ही गिरफ़्तार कर लिया.
अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली आते वक़्त विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया.
हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने सीजेपी के एक्स हैंडल पर एक वीडियो अपलोड करके कहा कि आंदोलन का नेतृत्व अब अजिंक्य शिंदे करेंगे.
सीजेपी मुंबई से फ्लाइट से दिल्ली आ रहे थे. लेकिन दिल्ली में विमान के उतरने के तुरंत बाद विमान के भीतर से ही दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
इससे पहले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह को हिरासत में लिया गया था.
इस बीच, मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में लिया जा रहा है और बसों में भरकर ले जाया जा रहा है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए हर तरफ़ पुलिस बलों का पहरा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के 25 हज़ार जवानों को तैनात किया गया है.
साथ ही दिल्ली के अंदर 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. जंतर-मंतर और इससे चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया है.
देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस की ओर से शेयर किए गए वीडियो में दिल्ली पुलिस सड़कों पर कीलें बिछाती दिख रही है.
कीलें लगाने पर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने लिखा है, ''मोदी सरकार ने किसान आंदोलन वाली नुकीली कीलें जनता के स्वागत में आज फिर दिल्ली की सड़कों पर बिछा दी हैं.''
सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर शनिवार को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
ये संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
इनका कहना है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं.
लोगों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने एक्स पर लिखा, '' सरकार अपने ही नागरिकों से जंग लड़ रही है.''
लीगल मामलों की न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए.
यह अवमानना याचिका गृह मंत्रालय के सचिव आईएएस गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त आईपीएस अनुराग कुमार और डीएमआरसी की अध्यक्ष आईएएस डी. थारा के ख़िलाफ़ दायर की गई है.
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि बिना किसी उचित कारण के ट्रेन सेवाएं रद्द की जा रही हैं.
याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की ओर से अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण दिल्ली में जनजीवन ठप हो गया है.
सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की 120 से ज़्यादा कंपनियों के तैनात रहने की उम्मीद है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ रणनीतिक रूप से अहम जगहों पर जवानों को तैनात किया गया है.
सुरक्षा तैयारियों और इमरजेंसी हालातों में कार्रवाई की व्यवस्था का आकलन करने के लिए कई जगहों पर मॉक ड्रिल की गईं.
नई दिल्ली ज़िले को निगरानी के लिए 20 ज़ोन में बांटा गया है. इनकी निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं.
अलग-अलग इकाइयों के प्रमुख विशेष पुलिस आयुक्त भी घटनाक्रम पर कड़ी नज़र रख रहे हैं.
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया था. यानी प्रस्तावित प्रदर्शन से महज़ तीन दिन पहले, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है.
अभिजीत दीपके ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "मुझे हैरानी होती है कि प्रधानमंत्री इस देश के युवाओं और जनता से इतने डरे हुए क्यों हैं. सभी रेलवे सेवाएं और मेट्रो स्टेशन बंद करने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया और सड़कें रोक दी हैं."
दीपके से पूछा गया कि दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर क्या उनकी गिरफ़्तारी हो सकती है?
इस पर उन्होंने जवाब दिया, "अगर वे मुझे हिरासत में लेना या गिरफ़्तार करना चाहते हैं, करें. मैं इसके लिए तैयार हूं. इससे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. यूएपीए लगा दें, एनएसए लगा दें. लेकिन हम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों तथा इस देश की लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ते रहेंगे."
शुक्रवार को उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ''यदि गिरफ़्तारी मेरी गिरफ़्तारी हो जाती है तो भी निष्पक्ष चुनाव के लिए लड़ाई जारी रहेगी.''
कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए मुंबई से दिल्ली रवाना हो चुके हैं.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, '' मोदी ने हमारे प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हार मान ली है. प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर कार्रवाई और दिल्ली को बंद कर देना मज़बूती के नहीं, बल्कि इस बात के संकेत हैं कि एक नेता अपने ही लोगों से डरा हुआ है.''
अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक़, कॉकरोच जनता पार्टी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रातभर में कम से कम 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया. अब ये संख्या और भी बढ़ गई है.
दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि शनिवार रात 12:30 बजे तक हिरासत में लिए गए लोगों में से क़रीब 250 दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी ज़िले से थे.
इनमें ख़ास तौर पर शाहीन बाग के आसपास के इलाक़ों के लोग शामिल थे. साल 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र शाहीन बाग ही था.
दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 100 से अधिक लोगों को शाहदरा और पूर्वी दिल्ली ज़िले से हिरासत में लिया गया है. ये दोनों ज़िले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, ये हिरासत एहतियातन की गई हैं. ऐसे लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है, जिनका पहले प्रदर्शनकारियों को जुटाने और 'ग़ैरक़ानूनी' स्थिति पैदा करने का इतिहास रहा है.
प्रदर्शन से पहले हर ज़िले में निर्धारित किए गए 13 प्रमुख हिरासत केंद्रों में इन लोगों को ले जाया जाएगा.
दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर में बड़े पैमाने पर जवानों की तैनाती की है. कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे राजधानी पहुंचने की संभावना है.
'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़ मौक़े पर 30,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे जबकि दिल्ली के सभी सीमावर्ती इलाक़ों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी.
तैनाती योजना के मुताबिक़, इन स्थानों पर पहली पाली में पुलिस इंस्पेक्टरों के साथ पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की प्लाटून और टुकड़ियां तैनात रहेंगी.
सेंट्रल दिल्ली और नई दिल्ली ज़िले के बीच अंतर-ज़िला सीमा चौकियां स्थापित की गई हैं. इसके अलावा दक्षिण, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली ज़िलों को जोड़ने वाले स्थानों पर भी ऐसी चौकियां बनाई गई हैं.
नई दिल्ली के नज़दीकी इलाक़ों, जैसे अशोक रोड और टॉल्स्टॉय रोड, से भी प्रवेश करना मुश्किल होगा. ये इलाक़े पैदल दूरी पर हैं, लेकिन इस मार्ग पर 10 बैरिकेड लगाए गए हैं और दर्जनों अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं
उन्होंने बताया, ''पुलिस लगातार बैरिकेड बढ़ाती रही और सड़कों के कई किलोमीटर लंबे हिस्से में पाबंदियां लगा दीं. पुलिस सतर्क नज़र आई और उसने हमारी फ़िल्मिंग और हिरासत में लिए गए लोगों से बात करने की कोशिशों पर रोक लगाई.''
''हमने हिरासत में लिए गए दर्जनों लोगों को ले जा रही दो बसें देखीं, लेकिन अधिकारियों ने उनकी संख्या की पुष्टि नहीं की.रात भर जामिया, जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसरों में सुरक्षा बढ़ाए जाने की ख़बरें आईं.''
AI outlook — possibilities, not facts
सुप्रीम कोर्ट अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा।
Likely · Within days
US President Donald Trump cast doubt on plans to livestream the December 3 execution of former Army psychiatrist Nidal Hasan, who killed 13 people at Fort Hood in 2009. The proposal has faced widespread criticism from lawmakers, human rights groups, and religious leaders.
Activists Yogendra Yadav and Prashant Bhushan were detained by Delhi Police near INA Market while marching towards a planned 'Jantar Mantar 2.0' protest against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar over electoral rolls revision.
Congress president Mallikarjun Kharge and other opposition leaders slammed the Indian government over mass detentions during protests in Delhi against the CEC and voter-list revisions.
Delhi Police detained around 500 Cockroach Janata Party (CJP) protesters in New Delhi after denying permission for a demonstration against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar over alleged voter-list manipulation.
Congress MP Shashi Tharoor criticised heavy security arrangements in Delhi ahead of a CJP protest against the Election Commission, calling the restrictions and internet suspensions regressive and repressive.
Former West Bengal CM Mamata Banerjee, Kerala opposition leader Pinarayi Vijayan, and former Delhi CM Arvind Kejriwal were detained by Delhi Police during protests against CEC Gyanesh Kumar over electoral roll revisions.