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'टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे': चुनाव आयोग पर खोजी रिपोर्ट को लेकर विपक्षी नेताओं के बयान
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'टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे': चुनाव आयोग पर खोजी रिपोर्ट को लेकर विपक्षी नेताओं के बयान

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द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आयोग के कदमों पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसे विपक्षी नेताओं ने चुनाव में धोखाधड़ी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का सबूत बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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Why It Matters

द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में निर्वाचन आयोग के कदमों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें नए मतदाताओं के जोड़ने और नाम हटाने की प्रक्रिया में अनधिकृत बदलाव शामिल हैं।

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'टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे': चुनाव आयोग पर खोजी रिपोर्ट को लेकर क्या-क्या बोले विपक्षी नेता

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के छपने के बाद विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए'."

चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं.

इस रिपोर्ट को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया.

वहीं, बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ़्रेस कर कहा कि "2014 से जब से प्रधानमंत्री मोदी जी सरकार में आए हैं, तब से विपक्ष लगातार हर चुनाव में धराशायी हुआ है. लोकतांत्रिक मैदान में जनता द्वारा न चुने जाने के कारण इन पार्टियों का वजूद खतरे में आ गया है. इसलिए विपक्ष ने हमारी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम किया हुआ है."

विपक्षी नेता क्या कह रहे हैं?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "वोट की चोरी भारत के लोगों के ख़िलाफ़ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है. इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसए और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ़ ज़रूर होगा."

राहुल गांधी ने इस पोस्ट के साथ एक वीडियो जारी किया है जिसमें वो कह रहे हैं, "मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों को साफ़ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो, ग़लत कर रहे हो. ये राजद्रोह है.टाइम आएगा...हम आपको पकड़ेंगे. बचने वाले नहीं हो."

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इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की.

रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई में नए वोटर्स के लिए फ़ॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया. मई में दोनों आयुक्तों ने कहा था कि क़ानून में बदलाव किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद बदलाव किया गया और संधू ने इसे "अनधिकृत और ग़ैरक़ानूनी" बताया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और अपीलों से जुड़े मामलों में भी दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाए.

टीएमसी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने एक्स पर लिखा, "पांच महीने पहले राज्यसभा के 60 से ज़्यादा सांसदों ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, जबकि इसके लिए 50 सांसदों की ज़रूरत थी."

"आज दो चुनाव आयुक्तों के मुख्य चुनाव आयुक्त के कई फैसलों पर आपत्ति जताने की बड़ी खबर सामने आने के बाद अब समय है कि राज्यसभा में लाए गए उस प्रस्ताव को आज सामने लाया जाए. लोकतंत्र को बचाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाया जाए."

अखिलेश और तेजस्वी यादव ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया, "ज्ञानेश कुमार गुप्ता को बीजेपी संरक्षण दे रही है, ताकि भारत निर्वाचन आयोग को अंदर से खोखला किया जा सके.'

उन्होंने एक्स पर लिखा, "ज्ञानेश कुमार गुप्ता उस संस्था पर असाधारण नियंत्रण रखते हैं, जिसे चुनाव आयुक्तों को सामूहिक रूप से चलाना होता है. इस प्रक्रिया में उन्होंने बीजेपी के इशारे पर अकेले ही भारत की चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नष्ट करने की अगुवाई की है."

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट के ज़रिए इस ख़बर पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने लिखा, "ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.'

"इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं. एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं. कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर संवैधानिक अपराध है. ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है."

उन्होंने चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया से इस मामले में संज्ञान लेने को कहा

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी और दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और उसके दौरान उनकी पार्टी ने 'दोषपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया पर प्रजेंटेशन' दिया.

उन्होंने लिखा, "वोट चोरी को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने ईसी के संवैधानिक संस्था का मुखिया होने के नाते हर बार तमाम सवैधानिक परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं को तार-तार कर सबको गुमराह किया."

'मोदी ने लोकप्रियता नहीं लूटप्रियता से चुनाव जीता'

शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता संजय राउत ने ज्ञानेश कुमार को 'सस्पेंड किए जाने और उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई' करने की मांग की है.

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया और कहा, "चुनाव आयोग गृह मंत्रालय के अधीन आता है. अगर प्रधानमंत्री देश को बचाना चाहते हैं तो उन्हें अमित शाह को उनके पद से हटाना चाहिए."

उधर डीएमके ने भी इस मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफ़ा मांगा है.

डीएमके के एक्स हैंडल पर पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन का बयान छापा है, जिसमें उनके हवाले से कहा गया है, "यह सामने आया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफ़ा और गुप्त रूप से काम कर रहे हैं. उन्हें अब इस पद पर और नहीं बने रहना चाहिए. ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटा दिया जाना चाहिए."

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अख़बार की रिपोर्ट को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "देश भर का चुनाव लूटने के अपराध में ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए. दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल के सारे चुनाव बेईमानी से जीते गये ये सभी चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द किये जाए. मोदी ने 'लोकप्रियता' नहीं 'लूटप्रियता' से चुनाव जीता है."

पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार मनमुताबिक आदेश दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो सदस्य होते हैं, जो मिलकर या तो सर्वसम्मति से फैसला लेते हैं या बहुमत से. लेकिन ज्ञानेश कुमार अकेले चुनाव आयोग चला रहे हैं और अफसरों को अपने मनमुताबिक आदेश दे रहे हैं."

"बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा कि चुनाव आयोग के अप्रूवल के बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं."

"बिना चुनाव आयोग के अप्रूवल के जितने भी आदेश जारी किए गए हैं, वे सब गैरकानूनी हैं. पूरा एसआईआर का प्रोसेस गैरकानूनी है. हम मांग करते हैं पूरा एसआईआर का प्रोसेस तुरंत रद्द होना चाहिए."

बीजेपी और चुनाव आयुक्त के बयान

इस खोजी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग (ईसीआई) ने प्रेस नोट में कहा कि आयोग के सदस्यों की ओर से उठाई गई टिप्पणियां, सुझाव और सवाल उसकी सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

आयोग ने अपने बयान में कहा कि इनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को और बेहतर, पारदर्शी और कानून के अनुसार बनाना है.

आयोग के अनुसार, किसी भी अंतिम फैसले से पहले अलग-अलग राय और सुझाव देना सामान्य बात है. आयोग के तीनों आयुक्तों के अलावा उसके अधिकारी भी चुनाव व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव दे सकते हैं.

ईसीआई ने कहा कि पिछले 10 महीनों की कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग से देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल शुरू की गईं और कई चुनाव सुधार किए गए.

चुनाव आयोग के बयान के साथ-साथ बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि विपक्षी दलों ने चुनाव न जीत पाने की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं पर वार करने और उन्हें बदनाम करने को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है.

उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग ने अपने पहले ही पैराग्राफ़ में साफ़ लिखा है कि सारे आधिकारिक और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श होने के बाद अंत में एसआईआर का फ़ैसला सर्वसम्मति से हुआ."

"कुल मिलाकर कहानी इतनी है कि भारत का चुनाव आयोग या भारत की कोई भी संवैधानिक संस्था तानाशाही शासन के अधीन नहीं है. वे लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे हैं और भारत के लोकतंत्र को बनाए हुए हैं."

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What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है।

    Possible · Within weeks

  • सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका दायर की जा सकती है।

    Possible · Within months

  • चुनाव आयोग के आंतरिक सुधार प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक संसदीय समिति गठित की जा सकती है।

    Possible · Within months

Open Questions

  • क्या चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की जांच के लिए कोई तंत्र है?
  • क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई औपचारिक जांच शुरू की जाएगी?
  • आपत्तियों में उठाए गए具体 मुद्दों पर अंतिम निर्णय क्या रहा?
  • क्या इन आपत्तियों के आधार पर किसी चुनाव के परिणाम को चुनौती दी जा सकती है?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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