
कराची की पहली मुग़ल शैली की इमारत हिंदू जिमखाना का इतिहास, वहां से निकले टेस्ट क्रिकेटर और उसके मालिकाना हक़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद की कहानी।
कराची के ऐतिहासिक हिंदू जिमखाना का निर्माण मुग़ल शैली में हुआ था। पाकिस्तान बनने से पहले यहाँ से कई दिग्गज हिंदू क्रिकेटरों ने अपनी शुरुआत की थी। वर्तमान में इस इमारत के मालिकाना हक़ और उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है।
AI-generated summary
हिंदू जिमखाना का निर्माण 1925 में हुआ था। यह पाकिस्तान बनने से पहले हिंदू समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का केंद्र था।
यह संभव ही नहीं है कि कराची में हिंदू जिमखाना की ऐतिहासिक इमारत के पास से गुज़रने वाला कोई व्यक्ति उस पर नज़र डाले बिना आगे बढ़ जाए।
इस इमारत में एक ऐसा आकर्षण है जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। इसे देखते ही मन मुग़ल दौर की ओर चला जाता है। इसी वजह से पूरे भरोसे के साथ कहा जाता है कि यह कराची की पहली ऐसी इमारत थी जिसे मुग़ल शैली में बनाया गया था।
हिंदू जिमखाना का निर्माण आगा अहमद हुसैन के तैयार किए गए नक़्शे के आधार पर किया गया था। कहा जाता है कि वे कराची के पहले मुस्लिम वास्तुकार थे। कराची की एक और ऐतिहासिक इमारत, मोहट्टा पैलेस का नक़्शा भी उन्होंने ही तैयार किया था।
कहा जाता है कि हिंदू जिमखाना का नक़्शा आगरा में स्थित एतमाद-उद-दौला के मक़बरे से प्रेरित होकर बनाया गया था। दीवारों के निर्माण के लिए पत्थर बीजापुर से मँगाए गए थे। इमारत की छत के बाहरी हिस्से पर बनी गुंबदनुमा छतरियाँ मुग़ल बादशाह अकबर द्वारा निर्मित फ़तेहपुर सीकरी से प्रेरित हैं।
मुख्य उभरे हुए झरोखे को दोनों तरफ़ से घेरने वाले अष्टकोणीय कोनों पर बने मीनारों के ऊपर छतरियाँ बनाई गई हैं। ये राजस्थानी वास्तुकला के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखाती हैं। बरामदे के कोनों पर छोटी छतरियाँ बनाई गई हैं। यह सब उस स्थापत्य शैली की विशेषताएं थीं जो मुग़ल बादशाह अकबर के दौर में प्रचलित थी।
ब्रिटिश सरकार ने 1921 में हिंदू जिमखाना के लिए 100 साल की लीज़ पर ज़मीन दी थी। इसकी इमारत का निर्माण 1925 में पूरा हुआ था। हिंदू जिमखाना का निर्माण हिंदू समुदाय ने कराया था। इसमें सेठ राम गोपाल गोवर्धन दास मोहट्टा की प्रमुख भूमिका थी।इसी वजह से इसका नाम उनके नाम पर रखा गया था। उनका नाम आज भी इस इमारत पर प्रमुखता से दिखाई देता है।
सेठ गोपाल गोवर्धन दास मोहट्टा के दादा शिवरतन चंद्ररतन मोहट्टा ने कराची में ऐतिहासिक मोहट्टा पैलेस का निर्माण कराया था। वहां अब एक संग्रहालय मौजूद है।
हिंदू जिमखाना के निर्माण का मुख्य उद्देश्य उस दौर के हिंदू समुदाय को ऐसी जगह उपलब्ध कराना था, जहां वे अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां जारी रख सकें। उस समय हिंदू जिमखाना कराची के उच्च वर्ग के हिंदुओं के लिए एक क्लब की तरह था।
स्थापना के बाद हिंदू जिमखाना सिर्फ़ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं था। वह उस समय खेल गतिविधियों में भी काफ़ी सक्रिय था। उस दौर में इसका अपना मैदान था। वहां विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं।
हालांकि, इस मैदान पर कभी कोई फ़र्स्ट क्लास मैच नहीं खेला गया। उस समय कराची में फ़र्स्ट क्लास मैच कराची जिमखाना में हुआ करते थे। लेकिन हिंदू जिमखाना के मंच से क्रिकेटरों को लगातार प्रोत्साहन मिलता था। इनमें नाओमल जियोमल का नाम भी शामिल है।
पाकिस्तान बनने से पहले कराची में जन्मे कई हिंदू क्रिकेटरों ने उस दौर में फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेली थी। लेकिन चार ऐसे हिंदू क्रिकेटर थे जो पाकिस्तान बनने से पहले कराची में पैदा हुए थे और उन्होंने भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेली। इनमें से एक भारतीय टीम का कप्तान भी बना।
17 अप्रैल 1904 को कराची में जन्मे नाओमल जियोमल को यह सम्मान प्राप्त है कि वे 1932 में लॉर्ड्स में भारत का पहला टेस्ट मैच खेलने वाली टीम के ओपनर थे। उस दौरे में खेले गए फ़र्स्ट क्लास मैचों में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था। उन्होंने सीके नायडू के बाद सबसे ज़्यादा रन बनाए थे।
नाओमल ने अपने फ़र्स्ट क्लास करियर में सात शतक बनाए थे। कराची के प्रति उनका गहरा लगाव हमेशा बना रहा। पाकिस्तान बनने के बाद भी उन्होंने कराची छोड़ना उचित नहीं समझा। वे कराची में ही कोचिंग करते रहे और चयनकर्ता भी रहे।
वे 1971 में भारत चले गए थे। वहां 18 जुलाई 1980 को 76 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। उनके बेटे हरि नाओमल ने भी कराची और कराची यूनिवर्सिटीज़ की ओर से तीन फ़र्स्ट क्लास मैच खेले थे। हरि नाओमल अब 86 वर्ष की उम्र में राजस्थान के मुनाबाव में रहते हैं।
कराची में जन्मे पन्नन मल पंजाबी ने अपने फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट करियर का शुरुआती हिस्सा कराची में खेला था। बाद में वे भारत चले गए थे। उनके लिए वह पल बहुत भावुक था, जब वे 1954-55 में वीनू मांकड़ की टीम के साथ पाकिस्तान आए थे।
गोगुमल किशनचंद ने भारत की ओर से पांच टेस्ट मैच खेले थे। वे कराची की स्कूल क्रिकेट में अपनी शानदार बल्लेबाज़ी की वजह से पहचान में आए थे। उन्होंने फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में 15 शतक बनाए थे। 1997 में उनका निधन बड़ौदा में हुआ था।
कराची में जन्मे इन चार हिंदू टेस्ट क्रिकेटरों में गुलाब राय रामचंद को टेस्ट क्रिकेट में भारत की कप्तानी का सम्मान भी मिला था। उन्होंने बाकी तीन क्रिकेटरों की तुलना में ज़्यादा, यानी 33 टेस्ट मैच खेले थे।
पाकिस्तान बनने के बाद बड़ी संख्या में हिंदू भारत चले गए थे। इसलिए हिंदू जिमखाना का नियंत्रण भी पाकिस्तान सरकार के पास आ गया था। समय के साथ इसकी ज़मीन अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विभिन्न संस्थाओं को दी जाती रही।
साठ के दशक में भगवान दास चावला, सेठ मोतन दास और खूबचंद भाटिया ने हिंदू जिमखाना को हिंदू समुदाय को सौंपने के लिए आंदोलन भी चलाया था। अदालतों में पेश किए गए सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, हिंदू जिमखाना का मूल क्षेत्रफल 39,178 वर्ग गज था, जो अब घटकर केवल 4,816 वर्ग गज रह गया है।
इस दौरान पुलिस विभाग, फ़ेडरल सर्विस कमीशन और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्वॉयज़ एसोसिएशन को ज़मीन दी गई। सैन्य शासक ज़िया-उल-हक़ के दौर में हिंदू जिमखाना की इमारत को गिराने का फ़ैसला भी कर लिया गया था, लेकिन हेरिटेज फ़ाउंडेशन ने समय रहते दख़ल देकर इसे बचा लिया।
यह मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कराची के क्लिफ़्टन इलाक़े में स्थित श्रीरत्नेश्वर महादेव वेलफ़ेयर सेवा मंडली समिति के उपाध्यक्ष अशोक मोटवानी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, "2005 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के दौर में ज़िया मोहिउद्दीन पर विशेष कृपा करते हुए हिंदू जिमखाना की मूल हैसियत ख़त्म कर दी गई और वहाँ नेशनल एकेडमी ऑफ़ परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स स्थापित कर दी गई।"
डॉ. अशोक मोटवानी कहते हैं, "2007 में हमने सिंध हाई कोर्ट में हिंदू जिमखाना को हिंदुओं के हवाले करने और एकेडमी को यहाँ से हटाने की याचिका दायर की थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। 2014 से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।"
2008 में सिंध सरकार ने नेशनल एकेडमी ऑफ़ परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स को नोटिस भेजकर इमारत खाली करने को कहा था। अदालत ने 2018 में नापा को किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने का आदेश भी दिया था, हालांकि इस पर अमल नहीं हो सका।
डॉ. मोटवानी कहते हैं, "हम सिर्फ़ हिंदू जिमखाना को उसके मूल स्वरूप में फिर से देखना चाहते हैं। हम भी पाकिस्तान के नागरिक हैं। हमने इस धरती को नहीं छोड़ा और यहीं रह गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हम लोग अपने विशेष त्योहारों के मौक़े पर नापा की इमारत में कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं।"
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सुप्रीम कोर्ट में हिंदू जिमखाना के मालिकाना हक़ को लेकर सुनवाई जारी रहेगी।
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