
एंडी बर्नहैम, जो लेबर पार्टी के नेता बनने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं, ने मेकरफ़ील्ड उपचुनाव में जीत हासिल की है. यह जीत उन्हें पार्टी नेतृत्व के लिए एक मज़बूत दावेदार बनाती है.
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एंडी बर्नहैम की लेबर पार्टी का लीडर बनने की चाहत नई नहीं थी. 10 साल से भी ज़्यादा समय पहले उन्होंने दो बार पार्टी के शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
अब कई लेबर सांसद उन्हें पार्टी के लिए फिर से मज़बूती हासिल करने का सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
पार्टी कई महीनों से जनमत सर्वेक्षणों में पिछड़ रही थी और मई में हुए चुनावों में उसे बड़ा झटका लगा था.
मेकरफ़ील्ड उपचुनाव में बर्नहैम ने दक्षिणपंथी पार्टी रिफ़ॉर्म यूके को हराया. रिफ़ॉर्म यूके दूसरे स्थान पर रही.
इस जीत के साथ ग्रेटर मैनचेस्टर पूर्व मेयर ने लेबर के वोट प्रतिशत को 2024 के आम चुनाव में 45 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंचा दिया.
आंकड़ों से आगे बढ़कर देखें तो बर्नहैम की जीत ने नेतृत्व की किसी संभावित चुनौती में उनके सामने मौजूद एक बड़ी बाधा भी दूर कर दी, क्योंकि पार्टी नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने के लिए सांसद होना ज़रूरी है.
मतदान से पहले बर्नहैम ने कहा था कि अगर वो मेकरफ़ील्ड में जीतते हैं तो प्रधानमंत्री सर किएर स्टार्मर को चुनौती देने के लिए किसी भी संभावित नेतृत्व चुनाव में उतरेंगे.
फ़ुटबॉल और संगीत के शौकीन
1970 में लिवरपूल में जन्मे बर्नहैम का बचपन वारिंगटन के पास एक गांव में बीता.
उनके पिता ब्रिटिश टेलीकॉम में इंजीनियर थे और मां रिसेप्शनिस्ट थीं. दोनों लेबर पार्टी के मज़बूत समर्थक थे और बर्नहैम की राजनीति में दिलचस्पी कम उम्र में ही शुरू हो गई थी.
बर्नहैम ने बताया है कि 14 साल की उम्र में उन्हें बीबीसी टीवी ड्रामा "बॉयज़ फ्रॉम द ब्लैकस्टफ़" देखकर लेबर पार्टी से जुड़ने की प्रेरणा मिली थी. यह कार्यक्रम लिवरपूल में बेरोज़गारी भत्ता पाने वाले लोगों के जीवन पर आधारित था.
एवरटन क्लब के आजीवन समर्थक बर्नहैम को उनके दोस्त प्रतिस्पर्धी और खेलों के प्रति जुनूनी बच्चे के रूप में याद करते हैं. वह लैंकाशर स्कूलबॉय क्रिकेट टीम में तेज़ गेंदबाज़ भी थे.
रोमन कैथोलिक स्कूल में उनके अंग्रेज़ी शिक्षक को याद है कि बर्नहैम ने मॉक चुनाव में लेबर उम्मीदवार के रूप में हिस्सा लिया था और भारी अंतर से जीत हासिल की थी.
बर्नहैम और उनके दो भाई अपने परिवार में कॉलेज जाने वाले पहले सदस्य थे. एंडी ने कैम्ब्रिज में अंग्रेज़ी की पढ़ाई की.
अपनी किताब "हेड नॉर्थ" में बर्नहैम ने लिखा कि विश्वविद्यालय में उन्हें "खुद को वहां का हिस्सा महसूस करने में कठिनाई होती थी" और उन्हें लगता था कि वह "बाहरी व्यक्ति" हैं.
हालांकि संगीत प्रेमी बर्नहैम, जो 'द स्मिथ्स' और 'द स्टोन रोज़ेज' जैसे इंडी बैंड के प्रशंसक हैं. उन्होंने एक बार कहा था कि "मैनचेस्टर के संगीत में बढ़ती दिलचस्पी ने मुझे एक पहचान दी."
सांसद से ग्रेटर मैनचेस्टर मेयर तक
ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी व्यापार पत्रिकाओं के लिए काम किया.
बीस की शुरुआती उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौक़ा मिला. उन्होंने दिवंगत टेसा जोवेल के लिए रिसर्चर के रूप में काम किया, जो उस समय डुलविच और वेस्ट नॉरवुड की सांसद थीं. जोवेल बाद में टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में मंत्री बनीं.
बाद के वर्षों में वेस्टमिंस्टर की राजनीति को लेकर असंतोष व्यक्त करने के बावजूद, बर्नहैम ने तेज़ी से राजनीतिक सफर तय किया. वह संस्कृति सचिव क्रिस स्मिथ के विशेष सलाहकार बने और फिर 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के अपने गृह क्षेत्र ली से सांसद चुने गए.
उन्होंने सबसे पहले ब्लेयर सरकार में मंत्री के रूप में काम किया, लेकिन बाद में ब्राउन सरकार में संस्कृति और स्वास्थ्य मंत्री बने.
संस्कृति, मीडिया और खेल मामलों के मंत्री के रूप में काम करते समय हिल्सबरो त्रासदी की 20वीं बरसी पर आयोजित एक स्मृति कार्यक्रम में बर्नहैम के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी हुई थी.
साल 1989 में स्टेडियम में मची भगदड़ में लिवरपूल के 97 प्रशंसकों की मौत हुई थी.
इस घटना के बाद बर्नहैम ने इस मुद्दे को कैबिनेट में उठाया, जिससे इस त्रासदी की दूसरी जांच शुरू करने में योगदान मिला.
2010 में आम चुनाव में लेबर की हार के बाद गॉर्डन ब्राउन ने इस्तीफा दिया और बर्नहैम पार्टी नेता बनने की दौड़ में उतरे.
वह पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे और एड मिलिबैंड से हार गए, लेकिन अगले पांच वर्षों तक उन्होंने पार्टी के ज़मीनी समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मज़बूत की.
साल 2015 में उन्होंने फिर कोशिश की, लेकिन इस बार जेरेमी कॉर्बिन ने उन्हें हरा दिया.
बर्नहैम के आलोचकों ने उन्हें ऐसा नेता बताया है जिसकी राय राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रही ताकि उनकी सफलता की संभावना बढ़ सके.
ब्रेग्ज़िट जनमत संग्रह के दौरान वह यूरोपीय संघ में बने रहने के समर्थक थे और उन्होंने कहा है कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को फिर से यूरोपीय संघ में शामिल होते देखना चाहते हैं.
उन्हें पार्टी के ब्लेयर समर्थक मध्य-दक्षिणपंथी धड़े से जुड़ा माना जाता था. समय के साथ बर्नहैम के विचार ज़्यादा वामपंथी होते गए. उन्होंने पानी और ऊर्जा सेवाओं के राष्ट्रीयकरण का समर्थन किया.
साल 2016 में कॉर्बिन के नेतृत्व के विरोध में इस्तीफ़ा देने वालों में वह शामिल नहीं थे. इसके बजाय 2017 में उन्होंने ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले मेयर बनने के लिए पद छोड़ दिया.
बर्नहैम ने 60 प्रतिशत से ज़्यादा वोट हासिल कर चुनाव जीता और 2021 में उससे भी बड़े अंतर से फिर चुने गए.
'बी नेटवर्क' और लॉकडाउन टकराव
मेयर के रूप में उन्हें अपने इलाके की परिवहन व्यवस्था में बदलाव के लिए सराहना मिली.
उनके नेतृत्व में ग्रेटर मैनचेस्टर लंदन के बाहर पहला ऐसा इलाक़ा बना, जहां बस सेवाओं को फिर से सार्वजनिक नियंत्रण में लाया गया और उन्हें "बी नेटवर्क" ब्रांड के तहत अन्य परिवहन साधनों से जोड़ा गया.
उनके अन्य बड़े वादों में साल 2020 तक ग्रेटर मैनचेस्टर में खुले में रहने वाले लोगों की समस्या ख़त्म करना शामिल था, हालांकि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका.
कोविड महामारी के दौरान उनकी पहचान और बढ़ी. उन्होंने क्षेत्रीय लॉकडाउन प्रतिबंधों को लेकर कंज़र्वेटिव सरकार पर इंग्लैंड के उत्तरी हिस्से के साथ "तिरस्कारपूर्ण व्यवहार" करने का आरोप लगाया.
इस टकराव के बाद उन्हें "किंग ऑफ द नॉर्थ" कहा जाने लगा.
साल 2025 में लेबर पार्टी सम्मेलन के समय तक बर्नहैम शीर्ष पद के लिए खुलकर सक्रिय दिख रहे थे और उन्होंने नेतृत्व की दौड़ में उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया था.
जनवरी में बर्नहैम को संसद में लौटने का एक और मौक़ा मिला. ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने पद छोड़ने की घोषणा की जिसके बाद उनके हलके में उपचुनाव की स्थिति बनी.
इसके बाद बर्नहैम को उस सीट से लेबर उम्मीदवार चुना गया और अगले महीने उन्होंने वेस्टमिंस्टर में वापसी सुनिश्चित कर ली.
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