
अज़रबैजान के स्कूलों में हिजाब प्रतिबंध को लेकर तुर्की के अधिकारियों की आलोचना पर दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया है।
अज़रबैजान की सत्तारूढ़ पार्टी ने स्कूलों में नए हिजाब प्रतिबंधों की आलोचना करने पर तुर्की पर कृत्रिम तनाव पैदा करने का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ गया है।
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अज़रबैजान ने स्कूलों में धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए नए ड्रेस कोड लागू किए हैं, जिसके तहत हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
अज़रबैजान की सत्तारूढ़ पार्टी ने मंगलवार को सीधे तौर पर तुर्की पर दोनों देशों के बीच "कृत्रिम तनाव" पैदा करने का आरोप लगाया.
यह विवाद अज़रबैजान के प्राथमिक और हाई स्कूलों में इस हफ़्ते लागू किए गए हिजाब प्रतिबंध को लेकर शुरू हुआ है.
अज़रबैजान ने मंगलवार को स्कूल यूनिफॉर्म से जुड़े नियम लागू करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया. इन नियमों के कारण इस्लामी हिजाब पर पाबंदियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
अज़रबैजान ने अपने क़रीबी सहयोगी तुर्की से अपने आंतरिक मामलों से दूर रहने को भी कहा.
अज़रबैजान के संविधान में धर्म को स्टेट से अलग रखा गया है और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है. मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाला अज़रबैजान सोवियत यूनियन से अलग हुआ था और यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है. इस विवाद से अज़रबैजान और तुर्की के संबंधों में तनाव बढ़ गया है.
यह विवाद धर्मनिरपेक्षता लागू करने में अज़रबैजान के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करता है.
सरकार ने पिछले महीने ऐसे नियम लागू किए थे, जिनके तहत स्कूली छात्रों को आधिकारिक स्कूल यूनिफॉर्म से अलग या स्टेट की शिक्षा व्यवस्था के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं होने वाले कपड़े पहनने से प्रतिबंधित किया गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इन नियमों में हिजाब का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है. हालांकि, इस सप्ताह ऐसी ख़बरों के बाद कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए कि इस्लामी हिजाब पहनने वाली कुछ छात्राओं और शिक्षकों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है.
अज़रबैजान के गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि इन नियमों को लागू करने का विरोध करते हुए सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने के आरोप में 37 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के नेतृत्व वाली न्यू अज़रबैजान पार्टी ने तुर्की के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार ओक्ताय साराल और तुर्की की सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) के अन्य अधिकारियों को निशाने पर लिया. इन अधिकारियों ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए हिजाब पर प्रतिबंध का विरोध किया था.
ओक्ताय ने एक्स पर 13 अक्तूबर को लिखा था, ''अज़रबैजान में हिजाब पहनने वाली छात्राओं के शिक्षा के अधिकार को रोकना अस्वीकार्य है!
आस्था के कारण सिर ढकने वाली किसी छात्रा को स्कूल के गेट पर ही रोक देना, यह इंसाफ़ की भावना के अनुरूप कैसे हो सकता है? हिजाब कोई बाधा नहीं है, बल्कि आस्था की एक ज़रूरत है. किसी भी विचार थोपने के लिए शिक्षा के अधिकार की बलि नहीं दी जा सकती!
हम उम्मीद करते हैं कि अज़रबैजान जल्द से जल्द इस ग़लती को सुधारेगा. युवाओं के भविष्य में बाधा डालने के बजाय उनके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खोले जाने चाहिए. आज के दौर में ऐसी मानसिकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए!''
वहीं सत्ताधारी न्यू अज़रबैजान पार्टी ने कहा कि एकेपी सरकार के क़रीबी तुर्की के मीडिया संस्थान अज़रबैजान के बारे में ऐसी ख़बरें प्रकाशित कर रहे हैं, जो तथ्यों के विपरीत हैं. उसने चेतावनी दी कि इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं.
अर्दोआन सरकार की पूर्व मंत्री और तुर्की की गाज़िआन टेप सिटी की मेयर और अर्दोआन सरकार की पूर्व मंत्री फ़ातमा साहिन ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसे अज़रबैजान में स्कूल के बार रोती हुए बच्चियों को देखा जा सकता है.
इस वीडियो को पोस्ट करते हुए फ़ातमा ने एक्स पर लिखा है, ''हम तुर्की में हिजाब पर प्रतिबंध का दौर देख चुके हैं. महिलाओं को शिक्षा, कामकाज़ी जीवन और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से बाहर रखने का हमें क्या नतीजा मिला?''
''इससे तुर्की के विकास का रास्ता किस तरह खुला, हमारा देश किस तरह मज़बूत हुआ? हमारी सुरक्षा से जुड़ी कौन-सी समस्या हल हुई, हमारा भविष्य किस तरह अधिक सुरक्षित और बेहतर बना? कुछ भी नहीं.
फातमा ने लिखा है, ''इसके उलट, इसने हमारे समाज को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया और हमारे लोगों के बीच दूरियां पैदा कर दीं. इसने हमारी लड़कियों के सपनों को अधूरा छोड़ दिया और हमारे परिवारों के दिलों में ज़ख्म दिए. इससे अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हुआ और ऐसे मानसिक आघात पैदा हुए, जिनका दर्द 20-30 साल तक दूर नहीं हो सका. इसकी क़ीमत हम सभी ने मिलकर चुकाई और आज भी हम इसके निशान ढो रहे हैं.''
''आज हम नहीं चाहते कि अज़रबैजान में भी लोगों को उसी दर्द से गुजरना पड़े. हमारा दिल इसे स्वीकार नहीं कर सकता. हम यह बात आपको दुख पहुंचाने या आपके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के रूप में कह रहे हैं, जिसने ख़ुद इस अनुभव को झेला है, और एक भाई के नाते कह रहे हैं.''
''हमें विश्वास है कि हमारा प्यारा अज़रबैजान अपने सभी बच्चों को साथ लेकर चलने से और मज़बूत बनेगा, न कि अपने ही लोगों को एक-दूसरे के सामने खड़ा करके. अपनी मूल पहचान से जुड़े रहकर वह इस ग़लती से जल्द पीछे हटेगा.''
अज़रबैजान में स्कूलों के लिए नए ड्रेस कोड नियम 21 सितंबर को छात्रों और 6 अक्तूबर को शिक्षकों के लिए लागू किए गए थे.
मध्य-पूर्व के न्यूज़ वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''सोमवार को हिजाब प्रतिबंध के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के आरोप में बाकू में कम से कम 37 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. उन पर सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया. ख़बरों के मुताबिक, सरकार ने उसी दिन इंटरनेट की स्पीड भी सीमित कर दी, जिससे एक्स, टिक टॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रभावित हुई.''
पिछले सप्ताह अलीयेव की ओर से तुर्की की कड़ी आलोचना किए जाने के बावजूद अंकारा ने इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से परहेज किया है.
अलीयेव की यह आलोचना बाकू के उस आकलन के बाद आई थी, जिसमें सोशल मीडिया पर अज़रबैजान को निशाना बनाकर की जा रही टिप्पणियों को सरकार समर्थित अभियान का हिस्सा बताया गया था.
साराल सोशल मीडिया पर विभिन्न मुद्दों पर अपनी निजी राय व्यक्त करने के लिए जाने जाते हैं. हालांकि, उनके हस्तक्षेप के बाद अज़रबैजान की सत्तारूढ़ पार्टी ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में विवाद के कई मुद्दों पर एक विस्तृत बयान जारी किया.
हिजाब विवाद के अलावा, एक्स पर तुर्की के कई यूज़र्स ने इसराइल के साथ अज़रबैजान के क़रीबी संबंधों की आलोचना की है.
पिछले महीने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल से बाहर नहीं जाने के अज़रबैजान के फ़ैसले के बाद बाकू के ख़िलाफ़ नकारात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई थी.
सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि इसराइल के साथ अज़रबैजान के संबंध अंतरराष्ट्रीय क़ानून और आपसी हितों पर आधारित हैं. उसने फ़लस्तीन के लोगों के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया और कहा कि बाकू ने फ़लस्तीन को वित्तीय और मानवीय सहायता दी है.
बयान में कहा गया, "अज़रबैजान में फ़लस्तीन के दूतावास का संचालन भी अज़रबैजान सरकार की वित्तीय सहायता से जारी है."
पार्टी ने कहा कि अलीयेव बार-बार दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करते रहे हैं, जिसके तहत पूर्वी यरुशलम फलस्तीन राष्ट्र की राजधानी होगा.
अज़रबैजान की सत्ताधारी पार्टी ने क्या कहा?
हिजाब प्रतिबंध की आलोचना का जवाब देते हुए पार्टी ने कहा कि इस्लामी दुनिया के किसी भी देश को दूसरे मुस्लिम समुदायों पर अपनी इच्छा थोपने, उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने या ख़ुद को उनसे श्रेष्ठ समझने का अधिकार नहीं है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए पार्टी ने कहा कि मुस्लिम दुनिया की एकता के लिए काम करने का कोई भी दावा समानता के आधार पर सहयोग और आपसी सम्मान से साबित होना चाहिए, न कि वर्चस्ववादी प्रवृत्तियों के ज़रिए.
हिजाब प्रतिबंध पर सीधे बात करते हुए पार्टी ने कहा कि अज़रबैजान का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है.
बयान में कहा गया, "हमारा मानना है कि सिर ढकने जैसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिक हेरफेर और विभाजन के साधन के रूप में इस्तेमाल न तो तुर्की लोगों की एकता के हित में है और न ही पूरी मुस्लिम दुनिया की एकजुटता के."
बयान में कहा गया, "इस तरह के मुद्दों का इस्तेमाल अज़रबैजान पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करना विशेष रूप से अस्वीकार्य है. हम एकेपी सरकार से इस नुकसानदेह नीति से दूर रहने की अपील करते हैं."
2020 में दूसरे नागोर्नो-काराबाख युद्ध के दौरान तुर्की अज़रबैजान का सबसे प्रमुख समर्थक था. उसने बाकू को ड्रोन, हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराया था. इसके अलावा, युद्ध में अज़रबैजान की जीत में मदद के लिए एफ़-16 लड़ाकू विमान और विशेष बल भी तैनात किए थे.
AI outlook — possibilities, not facts
तुर्की और अज़रबैजान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी जारी रह सकती है।
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