
भूकंप के बाद हिमस्खलन से नदी का बहाव रुकने के कारण आई बाढ़, रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में भारी नुकसान
नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 165 लोगों की मौत हो गई है। भूकंप के कारण हुए हिमस्खलन से नदी का बहाव रुकने से यह आपदा आई, जिससे रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में भारी तबाही हुई है। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक और सुरक्षा कर्मी शामिल हैं।
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नेपाल में 2015 के भूकंप के बाद यह सबसे भीषण आपदा है। रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में भोटेकोशी नदी के किनारे स्थित बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया है।
नेपाल के भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने तीन ज़िलों में भारी तबाही मचाई.
इसमें कम से कम 165 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं.
इस आपदा में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है. यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक है.
बाढ़ उस समय आई जब एक हिमस्खलन ने भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंदे का बहाव रोक दिया. इसके बाद बाढ़ सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नज़दीक तिमुरे में पहुँची. सैकड़ों लोगों की आबादी वाले इस इलाक़े का बड़ा हिस्सा बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी तेज़ी से नीचे की ओर बढ़ा.
इलाक़े में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को इस आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली. बाढ़ आने के समय लोग रोज़मर्रा के काम में व्यस्त थे.
रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने नेपाल के अंग्रेज़ी अख़बार काठमांडू पोस्ट से बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें ज़मीन हिलती हुई महसूस हुई तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है. जब वह बाहर भागकर आए, तो उन्होंने ऊपर से तेज़ी से आती पानी की एक विशाल दीवार देखी. इसके साथ धुएं के गुबार जैसी चीज़ भी दिखाई दे रही थी और पानी तिमुरे बाज़ार की ओर तेज़ी से बढ़ रहा था.
ढुंगाना ने द काठमांडू पोस्ट से कहा, "बाढ़ एक लहर की तरह आई, जिसकी ऊंचाई करीब 100 मीटर रही होगी और बाज़ार को अपने साथ बहा ले गई. कुछ ही पलों में पूरा बाज़ार ख़त्म हो गया."
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, ''391 विदेशी नागरिकों और 44 सुरक्षा कर्मियों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं.''
बुधवार की बाढ़ ने कई पनबिजली परियोजनाओं और वाणिज्यिक बैंकों को तबाह कर दिया है. नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, बाढ़ में कई पुल और क़रीब 40 किलोमीटर हाइवे बह गए हैं. निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए कुल नुक़सान का अभी तक कोई आकलन नहीं हो पाया है.
कहा जा रहा है कि यह 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ से भी ज़्यादा विनाशकारी हो सकती है, जिसमें 1,400 लोगों की मौत हुई थी और जिसे लंबे समय से देश की सबसे बड़ी आपदा माना जाता रहा है.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए बताया है कि रसुवा में आपदा की स्थिति भूकंप के साथ आए हिमस्खलन के कारण हुई थी.
नेपाल में अमेरिका के दूतावास ने बताया है कि भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे रह रहे लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है.
लापता पर्यटकों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की बताई जा रही है और इनका आंकड़ा 100 से अधिक है.
नेपाल के पर्यटक बोर्ड ने टूर ऑपरेटरों का हवाला देते हुए कहा कि लापता भारतीयों में से अधिकांश कैलाश मानसरोवर जा रहे यात्री थे.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने देश की प्रतिनिधि सभा को संबोधित किया है. उन्होंने बताया है कि रसुवा में आपदा की स्थिति भूकंप के साथ आए हिमस्खलन के कारण हुई थी और इसकी आगे पुष्टि की जा रही है.
उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8:40 बजे रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट ज़िलों के कई इलाक़े प्रभावित हुए. उन्होंने कहा कि तिमुरे, स्याफ़रुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट समेत कई इलाक़ों में भारी नुक़सान हुआ है.
उन्होंने कहा कि यह बाढ़ सुबह 8:37 बजे आए भूकंप के कारण हुई थी और भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के तटीय क्षेत्रों में अभी भी ख़तरा बना हुआ है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में आई भारी बाढ़ के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, ''प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की. इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मज़बूती से खड़े हैं."
"भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है. हमारी टीमें राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं.''
नेपाल के गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया है कि सेना और निजी हेलीकॉप्टरों द्वारा रसुवागढ़ी, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और मैलुंग के प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान जारी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित ज़िलों को तीन महीने के लिए 'आपदा संभावित क्षेत्र' घोषित करने का भी निर्णय लिया है.
विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि रसुवा में आई बाढ़ के कारण 'राष्ट्रीय आपदा की स्थिति' उत्पन्न हो गई है. उन्होंने कहा कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के तटीय क्षेत्रों में अभी भी ख़तरा बना हुआ है और उन्होंने नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन ज़िलों के नदी किनारे और तटीय क्षेत्रों में लोगों से अत्यधिक सतर्कता बरतने का आग्रह किया.
स्थिति का जायज़ा लेने के लिए आपातकालीन बैठक करने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "चिकित्सा दल, स्काउट्स और रेड क्रॉस के समन्वय से ज़रूरी क़दम उठाने का काम शुरू हो गया है."
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने कहा है कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ से हुए नुक़सान की ख़बर से उन्हें गहरा दुख हुआ है.
2015 के भूकंप के बाद नेपाल में यह सबसे भयानक आपदा है, जिसमें क़रीब 9,000 लोगों की जान चली गई थी.
भोटेकोशी नदी के किनारे रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में कई बस्तियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं. यहाँ आबादी कम है, लेकिन उनकी सड़कें नेपाल-चीन व्यापार के लिए एक बड़ी लाइफलाइन का काम करती हैं. इलाके में हाइड्रोपावर, हाईवे और पुलों सहित ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया है.
विदुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 के वार्ड अध्यक्ष लेनिन रंजीत ने कहा कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट का ऐतिहासिक त्रिशूली बाज़ार लगभग पूरी तरह डूब गया है.
लेनिन रंजीत ने बीबीसी न्यूज़ नेपाली से कहा, "बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह डूब गया है. त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र, बाजार में बने नए और पुराने दोनों कंक्रीट के पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और घर बह गए हैं."
उन्होंने कहा, "दोस्तों ने अपनी आंखों के सामने लोगों को बहते हुए देखा है. बाजार के कुछ निवासियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है."
वार्ड अध्यक्ष रंजित ने कहा, "नदी के पास निचले बाजार के लोग तुरंत वहां से निकल गए थे, लेकिन ऊपरी बाजार के स्थानीय लोग अभी वहां से नहीं निकले थे. इससे पहले ऐसी अफवाहें भी फैलती रही थीं, लेकिन बाजार को बहा ले जाने वाली बाढ़ कभी नहीं आई थी. किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी भयानक बाढ़ आएगी."
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले 1985 में रसुवा के धुन्चे इलाके में भूस्खलन हुआ था, जिससे त्रिशूली नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था. उस समय बाजार के बह जाने के डर से पूरे बाजार को खाली करा लिया गया था. हालांकि, बाढ़ बाजार तक नहीं पहुंची थी.
नेपाल सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों के लिए चीन और भारत के साथ बातचीत चल रही है.
AI outlook — possibilities, not facts
प्रभावित ज़िलों में तीन महीने तक आपदा राहत अभियान जारी रहेगा।
Very likely · Within months
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नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही हुई है। इस आपदा में 95 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 403 लोग लापता हैं, जिनमें 100 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाढ़ का असर नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों पर पड़ा है।

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