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Backसीजेपी नेताओं ने रिहा होने के बाद बताया, हिरासत में उनके साथ क्या-क्या हुआ
सीजेपी नेताओं ने रिहा होने के बाद बताया, हिरासत में उनके साथ क्या-क्या हुआ
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सीजेपी नेताओं ने रिहा होने के बाद बताया, हिरासत में उनके साथ क्या-क्या हुआ

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हिरासत से रिहा होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं ने दिल्ली प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर अगवा करने और बर्बरता का आरोप लगाया। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी उन्हें किडनैप किए जाने का आरोप लगाया है।

AI-generated summary

Why It Matters

सीजेपी नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था।

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हिरासत से छूटने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह संयोजक सौरव दास ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस ने 'अगवा' किया था.

उन्होंने अपने फ़ोन क्लोन होने की आशंका भी जताई है.

सौरव दास ने आरोप लगाते हुए कहा, "ये वो सरकार है जिसने नीरव मोदी और विजय माल्या को फ़्लाइट में बैठाकर देश से बाहर भेज दिया है जबकि हमें फ़्लाइट के अंदर से उठवा लिया गया."

सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने कहा, "नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के अब तक के सबसे कायर प्रधानमंत्री हैं."

अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से रविवार को रिहा किए जाने के बाद दोपहर 2 बजे दिल्ली प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ये बातें कहीं.

इस प्रेस कान्फ़्रेंस में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके नहीं थे. रिहा होने के बाद दीपके ने बताया कि वो अपनी दादी का निधन होने के बाद गांव लौट रहे हैं.

सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक़, तीनों लीडर को इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे.

दीपके, रांका और दास को 10 अक्तूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर प्लेन से ही हिरासत में ले लिया गया था.

'हमारे फ़ोन को क्लोन किए जाने की आशंका'

शनिवार को हिरासत में लिए जाने को लेकर सौरव दास ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "जब हमें अगवा किया गया तब कोई पेपरवर्क नहीं किया गया बल्कि माफ़िया डॉन की तरह पुलिस आई और उठाकर ले गई."

"हमारे फ़ोन को जबरन ज़ब्त कर लिया गया है. महिला पुलिस के ज़रिए फ़ोन लिया गया. लेकिन कोई क़ानूनी कार्रवाई करते हुए फ़ोन नहीं लिया गया."

सौरव दास ने कहा, "मुझे आरकेपुरम में रखा, आशुतोष को बल्लभगढ़ लेकर गए थे और अभिजीत को भी कहीं लेकर गए थे. जब हमें लेकर गए तो हमने पूछा कि हमारा मूलभूत अधिकार है कि हम अपने वकील से बात करें."

"लेकिन हमसे कहा गया कि हिरासत में लेने के दौरान कोई अधिकार नहीं होता है. दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों के साथ क्या बर्बरता करती होगी."

उन्होंने कहा, "अब हमें आशंका है कि हमारे फ़ोन के साथ न जाने क्या क्या किया होगा. हमें आशंका है कि हमारे फ़ोन को क्लोन किया गया है. कल हमारे फ़ोन को क्लोन करके उसे सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा."

रांका और रत्ना सिंह ने क्या बताया?

रांका ने कहा, "शांति भंग करने का काम सिर्फ़ मोदी, शाह और दिल्ली पुलिस कर रहे हैं. हम बस जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना चाहते हैं."

उन्होंने कहा, "हम तबतक अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे जबतक की ज्ञानेश कुमार अपना इस्तीफ़ा नहीं दे देते."

रत्ना सिंह ने कहा- आईबी अधिकारी उनके पीछे पड़े थे.

सीजेपी की क़ानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों और उनके परिवारों को परेशान करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार रात से शनिवार तक पुलिसकर्मी स्वयंसेवकों के घर पहुंचे और उनके माता-पिता को डराया-धमकाया.

उन्होंने सरकार को डरा हुआ बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस उसके इशारे पर काम कर रही थी. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पहुंचने के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने उनका पीछा किया.

उनके मुताबिक, अधिकारी उनके पीछे ऐसे पड़े थे, जैसे वह कोई अपराधी हों.

रत्ना सिंह ने कहा, "चार पुलिसकर्मी मेरे अपार्टमेंट में आए. उन्होंने सुबह डोरबेल बजाकर मेरे साथ रहने वाले लोगों को परेशान किया. बाद में, जब मैं बाहर निकली और कार में बैठी थी, तभी अचानक चार गाड़ियां आ गईं. इन गाड़ियों ने मुझे दोनों तरफ से घेरकर हिरासत में ले लिया. मैं जंगपुरा में नौ घंटे तक चार गाड़ियों के बीच बैठी रही. इससे इलाके के सभी निवासियों को परेशानी हुई. पुलिसकर्मी बार-बार कहते रहे कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं. 30 से 35 अधिकारी आए और उन्होंने कहा कि या तो मुझे हिरासत केंद्र जाना होगा या फिर घर में नजरबंद रहना होगा. वे हमें गलत तरीके से हमारी मर्जी के खिलाफ कैसे रोक सकते हैं?"

इससे पहले, रविवार को सुबह सीजेपी के तीनों लीडर्स को एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया.

तीनों को एसईएम न्यायालय, दिल्ली कैंट के सामने पेश किया गया था. तीनों के वकील सौतिक बनर्जी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वो अब यहां से बाहर जा सकते हैं.

दिल्ली पुलिस ने एक्स पर बताया, ''मजिस्ट्रेट ने तीनों को अच्छे आचरण और शांति बनाए रखने की शर्त पर 50 हज़ार रुपये के बॉन्ड पर एक साल की अवधि के लिए रिहा किया है.''

ध्रुव राठी ने कहा- 'मुझे किडनैप किया गया था'

मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनका 'किडनैप' कराया था और उन्हें चोट भी आई है.

ध्रुव राठी ने यह भी स्पष्ट किया कि वो भारतीय नागरिक हैं, इस दौरान उन्होंने अपना पासपोर्ट भी दिखाया.

ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर कहा, "मैं साफ़ करना चाहूंगा कि ये है मेरा पासपोर्ट है और मैं एक भारतीय नागरिक हूं और भारतीय ही रहूंगा. यह सरासर झूठ है कि मैं फ़ॉरेन पासपोर्ट होल्डर हूं और प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हो सकता. मैं भारतीय नागरिक हूं और मेरे भी उतने ही अधिकार हैं, जितने किसी एक आम नागरिक के होने चाहिए."

"10 अक्तूबर की सुबह क़रीब 7 बजे मैं अपने बेडरूम में सो रहा था और मेरी मम्मी सुबह उठकर दरवाज़ा खोलती है क्योंकि बाहर काफ़ी सारे लोग घूम रहे थे. ये लोग पुलिसकर्मी नहीं बल्कि आम कपड़ों में थे और ये एकदम से उन्हें धक्का मारकर घर में घुस घुस आते हैं. ये लोग मेरे बेडरूम में आकर मुझे किडनैप कर ले जाते हैं. मैं यहां पर किडनैप शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं क्योंकि ये कोई अरेस्ट या डिटेंशन नहीं है. डिटेंशन तो तब होता अगर मैं प्रोटेस्ट में जाता. अरेस्ट तब होता अगर कोई पुलिस वाला आता, अपनी वर्दी दिखाता, नेम प्लेट दिखाता."

राठी ने कहा, "जब मैं घर से बाहर आया तो मुझे पता चला कि पचास से ज़्यादा लोग खड़े थे. इन्हें चाहे पुलिसकर्मी कह लो या कोई एजेंसी वाला कह दो. ये मुझे इस तरह घसीटकर ले गए जैसे किसी अपराधी को ले जाया जाता है. मुझे काफ़ी चोट भी लगी है. ये मुझे जीप में बैठाकर एक पुलिस स्टेशन ले गए, वहां से दूसरे स्टेशन ले गए. इसका कोई वीडियो भी मौजूद नहीं है क्योंकि इन्होंने मेरा फ़ोन छीन लिया था. इन्होंने मुझे वकील या फ़ोन एक्सेस भी नहीं दिया. लगभग 22-23 घंटों तक इन्होंने मुझे बिठा कर रखा."

"मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहूँगा. क्या आपने किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसा होते हुए सुना है कि एक आम नागरिक, जिसने कोई क़ानून नहीं तोड़ा, जिसने सिर्फ़ सच के लिए और देशहित में आवाज़ उठाई, जिसने एक बेहतर चुनाव आयोग की माँग की, उसे उसके घर में घुसकर बेडरूम से उठा लिया जाए, उसका अपहरण कर लिया जाए? उसके माता-पिता के साथ मारपीट की जाए, हाथापाई की जाए और फिर उसे इस तरह अपने साथ ले जाया जाए?"

"ये किसी डेमोक्रेटिक देश में ऐसा नहीं होता. नरेंद्र मोदी ने इस देश को डिक्टेटरशिप बना दिया है. ये सीधे तौर पर एक अनऑफ़िशियल इमरजेंसी है. सीजेपी लीडर्स समेत 7 हज़ार लोगों को डिटेन किया गया था. ये चीज़ें इमरजेंसी और नॉर्थ कोरिया में होती हैं, अब हमारे देश में हो रही हैं."

उन्होंने आरोप लगाया, "मेरे चारों तरफ़ इन लोगों ने कम से कम पंद्रह लोग छोड़ रखे हैं , जो मेरे ऊपर निगरानी रख रहे हैं. इन्होंने मुझे एक अघोषित हाउस अरेस्ट पर रख लिया है."

राठी ने कहा, "मैं नरेंद्र मोदी से कहना चाहूंगा कि इतना भी मत डराओ किसी को कि सारा डर ख़त्म हो जाए. सोनम वांगचुक जी का धन्यवाद, उन्होंने सरकार को भूख हड़ताल की चेतावनी थी."

गौरतलब है कि गुरुग्राम से हिरासत में लिए गए ध्रुव राठी को पुलिस ने कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया था.

रविवार को नेहा बोरा हिरासत में

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा रविवार को आरके आश्रम मार्ग पर प्रदर्शनकारियों के साथ पहुंचीं.

हालांकि वह वहां रुककर प्रदर्शन नहीं कर सकीं. नेहा बोरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है. वीडियो में उन्हें दूसरे लोगों के साथ भागते हुए देखा जा सकता है.

सीजेपी ने दिल्ली में रविवार को भी प्रोटेस्ट का एलान किया था. इसे देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास रविवार को पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी.

कुछ वामपंथी संगठनों से जुड़े युवाओं ने भी दिल्ली में राजीव चौक से मार्च निकालने की कोशिश की.

इन संगठनों के करीब 50-60 प्रतिनिधियों को हिरासत में ले लिया गया. इनमें एआईएसएफ़, एसएफ़आई और केवाईएस से जुड़े युवा शामिल हैं. ये लोग राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 से जनपथ की रेडियल रोड 1 की ओर मार्च निकाल रहे थे.

पुलिस का कड़ा पहरा

कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा है कि 10 अक्तूबर की तरह ही 11 अक्तूबर को भी प्रदर्शन के एलान को देखते हुए पुलिस ने कड़ा इंतज़ाम किया है.

Open Questions

  • फ़ोन क्लोनिंग के आरोपों पर पुलिस की क्या प्रतिक्रिया है?
  • प्रदर्शनकारियों को किस विशिष्ट कानूनी आदेश के तहत हिरासत में लिया गया था?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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