युवाओं में नशे के लिए दवाओं का बढ़ता चलन: शराब का 'सुरक्षित' विकल्प या जानलेवा लत?
जेन-ज़ी पीढ़ी चिंता कम करने और सामाजिक मेलजोल के लिए प्रीगाबालिन और बीटा ब्लॉकर्स जैसी दवाओं का अवैध रूप से उपयोग कर रही है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं।
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चीन और अन्य देशों में युवा शराब के विकल्प के रूप में प्रीगाबालिन और बीटा ब्लॉकर्स जैसी दवाओं का अवैध रूप से उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना चिकित्सकीय देखरेख के इनका सेवन लत, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और आत्महत्या के विचारों का कारण बन सकता है।
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Why It Matters
जेन-ज़ी पीढ़ी में चिंता के स्तर में ऐतिहासिक वृद्धि देखी गई है। युवा शराब के स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचने के लिए दवाओं को एक सुरक्षित विकल्प मानकर उनका दुरुपयोग कर रहे हैं।
दोस्तों के साथ बाहर जाने से पहले 20 वर्षीय मेई को गले में एक गांठ सी महसूस होती थी, उसके हाथ पसीने से भीग जाते थे, उसे डर लगता था कि कहीं वह कुछ ग़लत न कह दे।
इसके बाद चीन के एक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली इस छात्रा को सोशल मीडिया पर कुछ दवाओं के बारे में पता चला।
मेई ने प्रीगाबालिन नाम की दवा लेनी शुरू की। इस दवा का इस्तेमाल आमतौर पर मिर्गी, चिंता और तंत्रिका में दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही उसने एक बीटा ब्लॉकर भी लिया।
बीटा ब्लॉकर का उपयोग आमतौर पर दिल की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है और यह एंग्ज़ाइटी के लक्षणों को भी कम कर सकता है।
मेई ने ये दोनों दवाएं अवैध रूप से ऑनलाइन विक्रेताओं से खरीदीं।
मेई कहती हैं, "मुझे बेहद खुशी महसूस होती थी। मानों मैं कमरे में सबसे दिलचस्प व्यक्ति हो सकती हूं। यह बिना महसूस किए 10 ड्रिंक्स पीने जैसा है।"
इन दवाओं को अधिक मात्रा में लेने पर नशे जैसा ही अहसास होता है।
लेकिन जानकार चेतावनी देते हैं कि मेडिकल देखरेख के बिना इन दवाओं का सेवन खतरनाक हो सकता है, और कुछ मामलों में जानलेवा भी।
लंबे समय तक इनका सेवन लत का कारण बन सकता है। इसका इस्तेमाल करने वाले इन दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं। जानकार यह भी बताते हैं कि जब वे इन दवाओं का सेवन बंद करने की कोशिश करते हैं तो चिंता, अनिद्रा और आत्महत्या के विचार बढ़ जाते हैं।
मेई (यह उसका असली नाम नहीं है) के लिए जो सिलसिला रात में बाहर घूमने से शुरू हुआ, वह धीरे-धीरे आदत बन गया। अब वह ये दवाइयां रोज़ाना लेती हैं।
वह कहती हैं, "मैं इसके बिना घर से बाहर नहीं निकल सकती।"
मेई अकेली नहीं हैं। दुनिया भर में, कुछ युवा शराब के विकल्प के रूप में दवाओं का सहारा ले रहे हैं।
1997 से 2012 के बीच जन्मे जनरेशन ज़ी में चिंता का स्तर पिछली किसी भी पीढ़ी की तुलना में अधिक है।
एक अध्ययन में पाया गया कि 1990 से 2021 के बीच 10-24 आयु वर्ग के लोगों में एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (चिंता संबंधी विकारों) की वैश्विक घटनाएं एक करोड़ से बढ़कर 1.6 करोड़ हो गईं।
61 अध्ययनों की समीक्षा में यह भी पाया गया कि महामारी से पहले के स्तरों की तुलना में युवाओं में एंग्ज़ाइटी या चिंता की दर में वृद्धि हुई है।
इस बीच, शराब पीने के "स्वास्थ्यवर्धक" विकल्पों की तलाश ने सोशल मीडिया पर ऐसे पदार्थों के लिए एक नया बाज़ार बनाने में मदद की है। इन्हें बिना हैंगओवर वाले नशीले पदार्थों के रूप में प्रचारित किया जाता है।
टीसाइड विश्वविद्यालय में एडिक्शन (व्यसन) के शोधकर्ता लियाम नोल्स कहते हैं, "युवा लोग इन दवाओं को एक स्वच्छ, सुरक्षित विकल्प के रूप में देखते हैं, लेकिन यह सुरक्षा की एक झूठी भावना है।"
यह जानना असंभव है कि वास्तव में कितने युवा सामाजिक मेलजोल के लिए इन दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि उनमें से कई इन्हें अवैध रूप से हासिल करते हैं।
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2008 और 2018 के बीच प्रीगाबालिन नामक दवा की कुल वैश्विक खपत चौगुनी हो गई है। प्रीगाबालिन के दुरुपयोग और इससे होने वाली मौतों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है।
चीन में, प्रीगाबालिन के दुरुपयोग के पहले मामले 2024 में सामने आने शुरू हुए। इस साल सरकार ने इस दवा पर नियंत्रण कड़ा करने की योजना की घोषणा की।
भारत ने भी इस साल मई में इसके इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है। जॉर्डन और यूक्रेन के शोधकर्ताओं ने भी इसके दुरुपयोग में इज़ाफ़ा देखा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दवाओं से संबंधित हैशटैग हज़ारों वीडियो सामने लाते हैं। इनमें यूज़र्स को दवाओं का अपना खुद का कॉकटेल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिसे ऑनलाइन "स्टैकिंग" के रूप में जाना जाता है।
लेकिन ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया युवाओं को ना सिर्फ़ इन दवाओं से परिचित करवा रहा है बल्कि इन्हें हासिल करने में भी मदद कर रहा है।
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने पाया कि कुछ इन्फ्लुएंसर अपने प्रोफाइल पर इन दवाओं को बेच रहे थे।
मेई का कहना है कि उन्होंने चीनी सोशल मीडिया के माध्यम से दवा ख़रीदी थी।
मेई कहती हैं, "इसे बेचने वाले हज़ारों विज्ञापन हैं। इन्हें ढूंढना और ऑर्डर करना आसान है।"
यह तस्वीर सिर्फ़ चीन तक सीमित नहीं है।
यूक्रेन की 26 वर्षीय कस्टमर सर्विस वर्कर लोरा ने बीबीसी को बताया कि इन दवाओं को ऑनलाइन या दोस्तों के ज़रिए से हासिल करना आसान है।
इन पदार्थों में बढ़ती रुचि ऐसे समय में सामने आ रही है जब युवा तेज़ी से शराब से दूर हो रहे हैं।
इसके कारण जेन-ज़ी को 'नशे से दूर रहने वाली पीढ़ी' का उपनाम मिला है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 2025 में शराब के शेयरों में 830 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रवृत्ति युवाओं के शराब पीने के व्यवहार में बदलाव के कारण है, जिसका कारण लागत और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हैं।
शोधकर्ता नोल्स का कहना है कि उन्होंने जिन युवाओं को मनोरंजन के लिए प्रीगाबालिन का उपयोग करते हुए देखा है, उनमें से कई अपने स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
उन्होंने बताया, "लोग कैलोरी और उससे अपने वज़न पर पड़ने वाले असर के प्रति सजग हैं।"
यह तर्क ब्रिटेन के 22 वर्षीय मैट को भी सही लगता है, जो नियमित रूप से जिम जाते हैं और मानते हैं कि शराब पीने की तुलना में इन दवाओं का उनके लीवर और हार्ट पर बहुत कम असर पड़ता है।
मैट कहते हैं, "इस समूह के लोग मानते हैं कि ये दवाएं शराब से ज़्यादा हेल्दी हैं।"
शराब का रिश्ता कम से कम सात तरह के कैंसर से जोड़ा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2023 में चेतावनी दी थी कि किसी भी मात्रा में शराब का सेवन जोखिम पैदा करता है।
लंदन के इंपीरियल कॉलेज में न्यूरोसाइकोफार्माकोलॉजिस्ट प्रोफेसर डेविड नट लंबे समय से मादक पदार्थों से संबंधित क़ानूनों में ढील देने के लिए अभियान चला रहे हैं।
उनका तर्क है कि मेई जो दवाएं ले रही हैं वो शराब पीने की तुलना में कम हानिकारक हो सकती हैं, भले ही उनके अपने अलग जोखिम हों।
उनका कहना है कि जब प्रीगाबालिन का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता है तो स्थिति बदल जाती है।
डेविड नट कहते हैं, "अगर वे इसका इस्तेमाल नशे के लिए कर रही हैं तो उन्हें इसकी लत लगने का ख़तरा है। उस मायने में ये 'फ्री लंच' नहीं है।"
जो लोग मनोरंजन के लिए प्रीगाबालिन का उपयोग करते हैं, उनमें इसकी सहनशीलता विकसित हो सकती है।
इसका अर्थ है कि उन्हें आराम या उत्साह की समान अनुभूति हासिल करने के लिए लगातार अधिक मात्रा में खुराक की ज़रूरत हो सकती है।
प्रीगाबालिन की अधिक मात्रा लेने पर सांस धीमी हो सकती है और कुछ मामलों में जानलेवा भी हो सकती है। बीटा ब्लॉकर्स की अधिक मात्रा लेने से बेहोशी और दिल की धड़कन खतरनाक रूप से धीमी हो सकती है।
किंग्स कॉलेज लंदन की मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर एमिली जोन्स का तर्क है कि इन दवाओं और शराब के शारीरिक नुकसानों की तुलना करने से एक अधिक मौलिक प्रश्न छूटने का खतरा है।
ये सवाल है: क्या होता है जब लोग यह मानने लगते हैं कि वे केवल केमिकल हेल्प से ही सामाजिक मेलजोल कर सकते हैं?
वह कहती हैं, "अधिक मात्रा में शराब का सेवन खतरनाक है, लेकिन डॉक्टर की देखरेख के बिना नियमित रूप से दवा लेना भी उतना ही खतरनाक है।"
उन्हें इस बात की फ़िक्र है कि चिंताजनक भावनाओं से बचने के लिए दवा का उपयोग करने से व्यक्ति की यह धारणा मज़बूत हो सकती है कि सामान्य सामाजिक परिस्थितियां असुरक्षित हैं।
एमिली जोन्स कहती हैं, "अगर आप खुद को यह विश्वास करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं कि आप तभी सुरक्षित रहेंगे जब आप रात में बाहर जाने से पहले (इन दवाओं) का सेवन करेंगे, तो यह धारणा आसानी से सामान्य होने लगती है।"
जोन्स का कहना है कि समय के साथ, लोग दवा के बिना समस्याओं से निपटने की अपनी क्षमता से विश्वास खो सकते हैं।
वह कहती हैं, "आप चीज़ों से प्रभावी ढंग से निपटने की अपनी क्षमता पर से विश्वास खो देते हैं।"
लोरा ने इस निर्भरता का अनुभव किया।
वह शुरू में पार्टियों और सामाजिक कार्यक्रमों से पहले चिंता कम करने वाली दवा लेती थी, लेकिन जल्द ही उसने इसे दफ़्तर में भी लेना शुरू कर दिया।
लोरा कहती हैं, "इससे मुझे मदद मिली। मैं लोगों के साथ काम करती हूं। इससे संवाद करना और समस्याओं को हल करना आसान हो गया।"
जब उसे दो सप्ताह तक दवा नहीं मिल पाई, तो उसने बताया कि उसे अवसाद के दौरे पड़ने लगे और आत्महत्या के विचार आने लगे।
वह कहती हैं, "मुझे समझ नहीं आया कि मेरे साथ क्या हुआ। मैं चिंतित थी, मैं खाना नहीं खा पा रही थी, मैं दोस्तों से मिल नहीं पा रही थी।"
जैसे-जैसे अधिक से अधिक देश इन दवाओं पर नकेल कसने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, कुछ लोगों का तर्क है कि इनकी उपलब्धता को और प्रतिबंधित करने से अलग तरह के ख़तरे पैदा हो सकते हैं।
महामारी विज्ञानी और यूक्रेन की नुकसान कम करने वाली संस्था माइंड गेम्स की प्रमुख मिकिता लापिन का कहना है कि पदार्थों पर बैन लगाने से ज़रूरी नहीं कि लोग उनका सेवन करना बंद कर दें।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ख़रीदी गई प्रीगाबालिन के मामले में यह बात हमेशा लागू नहीं होती।
उनके मुताबिक शराब के साथ ऐसा नहीं होता है।
मेई को इस बात की फ़िक्र है कि वह शायद कभी भी पूरी तरह से इस आदत से छुटकारा नहीं पा सकेंगी।
वह कहती हैं, "यह डरावना है, मुझे नहीं पता कि मैं इसके बिना कैसे रह पाऊँगी।"
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AI outlook — possibilities, not facts
चीन और अन्य देश प्रीगाबालिन जैसी दवाओं के वितरण पर और अधिक कड़े प्रतिबंध लागू करेंगे।
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Open Questions
- इन दवाओं के अवैध ऑनलाइन व्यापार को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
- युवाओं में बढ़ती चिंता के मूल कारणों को संबोधित करने के लिए क्या दीर्घकालिक उपाय हैं?



