
उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
समाजवादी पार्टी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनके पिता परिमल नाथवानी एनडीए समर्थित सांसद हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में इस नामांकन को लेकर बहस छिड़ गई है।
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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी परिमल नाथवानी के पुत्र हैं।
उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर काफ़ी बहस हो रही है.
उनके पिता परिमल नाथवानी कुछ ही महीने पहले एनडीए के समर्थन से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में झारखंड से राज्यसभा पहुंचे हैं.
अब धनराज नाथवानी को विपक्षी इंडिया गठबंधन की प्रमुख घटक पार्टी सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है. इस वजह से सोशल मीडिया पर बहस तेज़ गई है.
अगले साल ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को अहम माना जा रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से बीजेपी की अगुवाई वाली गठबंधन को आठ सीटें और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलने की उम्मीद है.
बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में परिमल नाथवानी और प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव ने राज्यसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी का पर्चा भरा.
नामांकन के बाद धनराज नाथवानी ने एक्स पर लिखा, "उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए मुझे समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने पर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी का हृदय से आभार और धन्यवाद करता हूँ. सार्वजनिक जीवन के इस नए पड़ाव की ओर आज लखनऊ में माननीय अखिलेश यादव जी की उपस्थिति में राज्यसभा के लिए मैंने अपना नामांकन दाखिल किया."
समाजवादी पार्टी के एमएलसी राजेंद्र चौधरी ने संकेत दिया है कि पार्टी एक तीसरे उम्मीदवार को भी मैदान में उतारेगी. उन्होंने कहा, "हम तीसरे कैंडिडेट का नाम जल्द ही घोषित करेंगे."
चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 11 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की है. इनमें उत्तर प्रदेश की दस सीटें और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है.
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव, बसपा के रामजी और छह अन्य नेताओं का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है.
नामांकन बुधवार से शुरू हो गया है और मतदान 16 अक्तूबर को होगा.
धनराज परिमल नाथवानी के नामांकन को राजनीतिक हलके में एक सरप्राइज़ माना जा रहा है.
पत्रकारों ने जब पूछा कि एनडीए के क़रीबी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना कितना बड़ा सरप्राइज़ है तो सपा नेता एसटी हसन ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "आप देखेंगे कि सरप्राइज़ होने वाले हैं. अब भी होने वाले हैं और आगे 2027 में भी होने वाले हैं. "
उन्होंने कहा, "हम उन्हें (धनराज नाथवानी) एनडीए से तोड़ कर ले आए हैं."
जब उनसे पूछा गया कि क्या सपा और बीजेपी के बीच कोई तालमेल है तो उन्होंने कहा, "सपा और बीजेपी के बीच कभी अलायंस नहीं हो सकता. ना ही पर्दे के पीछे कोई तालमेल करते हैं. अगर हम बीजेपी को तोड़ेंगे तो ये बहुत बड़ा अचीवमेंट हैं."
लेकिन धनराज नाथवानी की बीजेपी के शीर्ष नेताओं और मुकेश अंबानी के साथ क़रीबी को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं और कुछ लोगों ने कहा है कि 'नाथवानी का उत्तर प्रदेश से कोई जुड़ाव नहीं है, फिर भी उन्हें उम्मीदवार बनाया गया.'
पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, "अखिलेश यादव ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. इससे दोनों के बीच नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा शुरू हो गई है. गांधी (राहुल) ने 'मोदी के मददगारों' की सूची से मुकेश अंबानी की तस्वीर भी हटा दी है. धनराज नाथवानी अंबानी परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के अध्यक्ष भी हैं."
एक अन्य पत्रकार पीयूष राय ने एक्स पर लिखा, "वह (धनराज नाथवानी) वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उन्हें अंबानी परिवार का बेहद क़रीबी माना जाता है. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं. उन्हें 2022 में इस पद पर निर्विरोध चुना गया था. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जगह यह ज़िम्मेदारी संभाली थी."
धनराज परिमल नाथवानी रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के डायरेक्टर हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स के डायरेक्टर परिमल नाथवानी के बेटे हैं.
बीते जून में ही झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी ने राज्यसभा के लिए जीत दर्ज की थी. इसके साथ ही परिमल नाथवानी चौथी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद पहुंचे थे.
धनराज परिमल नाथवानी के बायोडेटा के अनुसार, वह भारतीय उद्योग जगत से जुड़े स्ट्रेटेजिक लीडर हैं. वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े विभिन्न कारोबारी और संस्थागत कार्यों की देखरेख करते हैं.
वे रिलायंस कॉरपोरेट आईटी पार्क लिमिटेड के बोर्ड सदस्य हैं और जामनगर मैन्युफैक्चरिंग डिवीजनों के साथ गुजरात में रिलायंस जियो के कारोबार से जुड़े स्ट्रेटेजिक कामों की निगरानी करते हैं.
वे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़े कार्यों के साथ रिलायंस जियो डिफ़ेंस सिस्टम लिमिटेड की गतिविधियों की भी देखरेख करते हैं.
खेल प्रशासन के क्षेत्र में वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के अध्यक्ष हैं. यही एसोसिएशन नरेंद्र मोदी स्टेडियम का संचालन करती है. नाथवानी शिक्षा, पर्यावरण, वन्यजीव और विरासत से जुड़े कई संस्थानों के साथ भी जुड़े हैं.
इनमें द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष, गुजरात स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्डलाइफ़ के सदस्य, नाथद्वारा टेंपल बोर्ड के सदस्य और पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के सदस्य जैसी भूमिकाएं शामिल हैं.
धनराज नाथवावानी के पिता परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स के डायरेक्टर हैं और राजनीतिक जगत में पहचान रखने वाला चेहरा हैं.
राजनीति और बिज़नेस के अलावा वह गुजरात फ़ुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य भी हैं.
70 साल के परिमल नाथवानी ने कभी मुंबई में कोल्डड्रिंक्स के बाद साबुन की फ़ैक्ट्री लगाई. वह यहीं नहीं रुके, इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने गुजरात के वडोदरा से 40 के क़रीब पीसीओ भी चलाए.
लेकिन कभी शेयर बाज़ार में क़िस्मत आजमाने के बाद बड़े आर्थिक नुक़सान के कारण उन्हें तनाव से भी गुजरना पड़ा. लेकिन 1997 में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मालिक धीरूभाई अंबानी से हुई मुलाक़ात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.
दरअसल जामनगर भूमि अधिग्रहण नाथवानी की देखरेख में हुआ. गुजरात की इस ज़मीन पर जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफ़ाइनरी स्थापित हुई.
परिमल नाथवानी ने इसके बाद मुड़ कर नहीं देखा और इस तरह वह धीरूभाई अंबानी के काफ़ी करीब आ गए.
नाथवानी मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के लिए काफ़ी अहमियत रखते हैं.
उनकी उद्योग संबंधित समझ के कारण उनका क़द बढ़ता गया और नाथवानी को जियो नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाने का मौका मिला.
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