
बारामूला में दिए गए बयान पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह घिरे, बीजेपी ने बताया भारत विरोधी और कांग्रेस ने भी की निंदा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह द्वारा बारामूला में दिए गए एक बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने इसे भारत विरोधी और देशद्रोह करार दिया है, वहीं कांग्रेस और अन्य नेताओं ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की है।
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फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने बारामूला में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान और कश्मीर के विशेष दर्जे को लेकर बयान दिया था।
कश्मीर को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के दिए बयान पर सियासी हंगामा मच गया है. बीजेपी ने उनके बयान को 'भारत विरोधी' बताया है.
फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िले में नेशनल कॉन्फ़्रेंस के एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान का बिना नाम लिए कहा, "वो हमें बचा रहे हैं."
फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के इस बयान पर बीजेपी ने जहां कड़ी प्रतिक्रिया दी है वहीं, कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था.
कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के बयान की निंदा की है.
फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने क्या कहा था?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह बारामूला में बीते शनिवार, 24 अक्तूबर को एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.
अब्दुल्लाह ने अपने भाषण में आर्टिकल 370 के तहत कश्मीर को मिले विशेष दर्जे के हटाए जाने और परिसीमन का ज़िक्र करते हुए बीजेपी पर मुसलमानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "आप दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं? ये इंसाफ़ करेंगे- अरे, हिम्मत रखो उनका मुकाबला करने के लिए. नहीं रखोगे तो मिट जाओगे, तुम्हारा नामो-निशान मिट जाएगा. ये आज चुप हैं क्योंकि दुनिया में शोर है और हमारा पड़ोसी लगा हुआ है इनके पीछे. हर जगह वो पहुंच जाता है, ये कह कर कि कश्मीर का फ़ैसला नहीं हुआ है. वो हमें बचा रहा है.
"इनके इरादे नेक नहीं हैं. ये कहते एक बात हैं और करते बिल्कुल उसके ख़िलाफ़ हैं. ताक़त रखो ताकि सच्चाई को पकड़ सको, सच कहना आसान नहीं है."
उन्होंने अपने भाषण में आगे कहा, "हर तरीक़े से कोशिश की कि जम्मू-कश्मीर के इंसान के लिए मुश्किलें खड़ी की जाएं. ये उठ नहीं सकते, ये रेंगते रहें और हम भीख मांगते रहें उनसे. जब तक आप लोग अपने पैर पर खड़े नहीं होंगे, कभी भी अपनी इज़्ज़त हासिल नहीं कर सकेंगे. ये मेरी बात याद रखना."
अब्दुल्लाह ने अपने भाषण में कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वो भारतीय नहीं हैं. उनका कहना था कि उन्होंने बार-बार कहा है कि वो महात्मा गांधी के, जवाहरलाल नेहरू के और मौलाना आज़ाद के भारत में शामिल हुए.
देश में बीजेपी शासित राज्यों में मुसलमानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा, "उन्हें कभी ये उम्मीद नहीं थी कि ऐसा दौर आएगा, जहां पर मुसलमान और हिंदू को आपस में लड़ाया जाएगा, सिर्फ़ इस कुर्सी के लिए, भारत का हाल ख़राब कर दिया गया है."
बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर ने अब्दुल्लाह के बयान को भारत विरोधी बताते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ़्रेंस का रुख़ ही भारत विरोधी रहा है.
उन्होंने कहा, "यह देश के सामने एक खुली बग़ावत है. उनका यह बयान देश की एकता और अखंडता के ख़िलाफ़ है. नेशनल कॉन्फ़्रेंस हमेशा देश विरोधी रही है. फ़ारूक़ अब्दुल्ला का जो बयान आया है वह पूरी तरह से देश विरोधी बयान है. उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए."
बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, "जिस पाकिस्तान का फ़ारूक़ अब्दुल्लाह साहब गुणगान कर रहे हैं, पाकिस्तान ने कश्मीर के इस हिस्से को क्या दिया-आतंकवाद, अलगाववाद, लोगों को पत्थरबाज़ बनाने का."
उन्होंने कहा कि केंद्र में बीजेपी के आने के बाद कश्मीर मुख्यधारा के साथ जुड़ा है और कश्मीर में निवेश आ रहे हैं. यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी है.
बीजेपी नेता रवींद्र रैना ने कहा, "डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने कश्मीर और पाकिस्तान के संदर्भ में दिया है, वो बहुत निंदनीय और ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान है, उन्होंने एक बार फिर राष्ट्रद्रोह किया है, पाकिस्तान कैसे जम्मू-कश्मीर की जनता का हितैषी हो सकता है, कभी नहीं."
कांग्रेस और सपा नेताओं का भी आया बयान
कांग्रेस के नेताओं ने भी अब्दुल्लाह के इस बयान की आलोचना की है.
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "पाकिस्तान तो अपने आप को नहीं बचा पाता. अगर पाकिस्तान अच्छा होता तो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में कश्मीरियों के साथ अच्छा व्यवहार होता. पाकिस्तान तो धूर्त मुल्क है, पाकिस्तान से कोई उम्मीद नहीं करना. मुझे नहीं समझ आया कि फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने ऐसा बयान क्यों दिया, शेख़ अब्दुल्लाह, फ़ारूक़ अब्दुल्लाह से लेकर उमर अब्दुल्लाह तक उनकी नीति हमेशा भारत के लिए रही है."
मसूद ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उन्होंने किस संदर्भ में ये बयान दिया है, लेकिन ऐसा बयान दिया है तो वो इसका समर्थन नहीं कर सकते.
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, "आज तक फ़ारूक़ अब्दुल्लाह जी से कभी ऐसी बात सुनने को नहीं मिली है. ऐसा कभी बयान उन्होंने नहीं दिया. बताइए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के कश्मीरी कितने परेशान हैं. वो भारत के साथ मिलना चाहते हैं, अगर वो खुशहाल होते पाकिस्तान में तो क्या भारत में मिलने के लिए संघर्ष करते."
समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, "कश्मीर भी हमारा है और कश्मीरी भी हमारे हैं, हम समाजवाद के लोग, सब को सम्मान देने की बात करते हैं, जो अशांति कश्मीर में रही है, पाकिस्तान की दख़लअंदाज़ी, उसकी ग़लत नीतियों की वजह उसने कश्मीरियत को भी नुक़सान पहुंचाया, उसने कश्मीरी मुसलमानों को नुक़सान पहुंचाया, पंडितों को और सिखों को भी नुक़सान पहुंचाया."
उन्होंने कहा कि पता नहीं किस वजह से फ़ारूक़ अब्दुल्लाह साहब ऐसा बयान दे रहे हैं.
देवबंदी उलेमा क़ारी इशाक़ गोरा ने कहा, "फ़ारूक़ अब्दुल्लाह का बयान निंदनीय है. उन्हें भारत के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए."
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्ज़ीक्यूटिव मेंबर मौलाना ख़ालिद रशीद फ़िरंगी महली ने कहा, "इसमें कोई शक़ नहीं है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा हमेशा हमारे सुरक्षा बलों ने सुनिश्चित की है. यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए वहां सेना, सीआरपीएफ़ और जम्मू-कश्मीर पुलिस समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं."
"इसमें कोई शक़ नहीं है कि वहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान क़ुर्बान की है. इसलिए यह कहना कि कोई दूसरा देश जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा कर रहा है, बिल्कुल अस्वीकार्य है. यह आपत्तिजनक और निंदनीय है. जिसने भी यह बयान दिया है, उसे अपने बयान पर सफ़ाई देनी चाहिए."
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