Breaking
SEStudent injured with a knife at Fagrabäck School in Växjö - suspect under 15 years oldINTLBenjamin Netanyahu Defends Gaza Military Action at UN Amid Walkouts and ProtestsESA 20-year-old young man arrested after confessing to the knife murder of a woman in Bormujos, SevilleJPNTT Docomo, Ahamo, etc. to raise prices from December for approximately 30 million linesDENews blog on federal politics: Schwesig urges Merz to meet with the Prime MinisterESThe Dutch financier in the Plus Ultra case refuses to testify and is released with precautionary measuresDEVolkswagen and Audi: Almost a million cars are at risk of steering failureRUThe Russian Armed Forces attacked military production facilities and warehouses of the Armed Forces of Ukraine in UkraineSEStockholm's subway expansion could cost close to 100 billion and be delayedRUGlobal News Roundup: Economic Forecasts, Geopolitical Tensions, and International RelationsSEStudent injured with a knife at Fagrabäck School in Växjö - suspect under 15 years oldINTLBenjamin Netanyahu Defends Gaza Military Action at UN Amid Walkouts and ProtestsESA 20-year-old young man arrested after confessing to the knife murder of a woman in Bormujos, SevilleJPNTT Docomo, Ahamo, etc. to raise prices from December for approximately 30 million linesDENews blog on federal politics: Schwesig urges Merz to meet with the Prime MinisterESThe Dutch financier in the Plus Ultra case refuses to testify and is released with precautionary measuresDEVolkswagen and Audi: Almost a million cars are at risk of steering failureRUThe Russian Armed Forces attacked military production facilities and warehouses of the Armed Forces of Ukraine in UkraineSEStockholm's subway expansion could cost close to 100 billion and be delayedRUGlobal News Roundup: Economic Forecasts, Geopolitical Tensions, and International Relations
Backचीन ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहा है
चीन ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहा है
Developing
BBC हिंदी1 hour agoWorld3 min readIndiaView translation

चीन ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहा है

Quick Look

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची के बीजिंग दौरे से कुछ दिन पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा हुआ, जिससे ईरान पर चीन का प्रभाव स्पष्ट होता है. चीन ने ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों की निंदा की, प्रतिबंधों का विरोध किया और युद्ध समाप्त करने की मांग की, विशेषकर होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने पर जोर दिया. चीन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है और ईरान से तेल खरीदना जारी रखेगा, भले ही अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात घट गया हो. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन बातचीत के माध्यम से युद्ध समाप्त कराना चाहता है लेकिन अपनी अन्य अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं को भी संतुलित रखना होगा.

AI-generated summary

Why It Matters

सात महीने पहले ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से चीन का रुख़ नहीं बदला है. उसने ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों की निंदा की है. चीन ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के प्रतिबंधों का भी विरोध किया है. इसके साथ ही चीन लगातार युद्ध ख़त्म करने की मांग करता रहा है. वह ख़ास तौर पर चाहता है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोला जाए.

Font size

Author, सईद जाफ़री पदनाम, राजनीतिक विश्लेषक और Author, ग्रेस त्सोई पदनाम, डब्ल्यूएसएल ग्लोबल जर्नलिज्म प्रकाशित 2 मिनट पहले पढ़ने का समय: 7 मिनट

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची बीजिंग पहुँचे थे. इससे इस बात को बल मिलता है कि ईरान पर चीन का कितना असर है.

ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाक़ात में ईरान युद्ध सबसे अहम मुद्दों में शामिल है.

सात महीने पहले ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से चीन का रुख़ नहीं बदला है. उसने ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों की निंदा की है. चीन ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के प्रतिबंधों का भी विरोध किया है.

इसके साथ ही चीन लगातार युद्ध ख़त्म करने की मांग करता रहा है. वह ख़ास तौर पर चाहता है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोला जाए.

चीन अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. उसके पास बड़ा तेल रिज़र्व है. इसी वजह से वह अब तक ईरान युद्ध के असर को काफ़ी हद तक संभाल पाया है.

सेफ़ ज़ोन में रहना चाहता है चीन

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्सेटर में चीन और मध्य-पूर्व मामलों के जानकार आंद्रेया गिज़ेली कहते हैं कि चीन इस स्थिति को लंबे समय तक संभाल सकता है. लेकिन समय बीतने के साथ इसका आर्थिक बोझ बढ़ता जाएगा.

उनके मुताबिक़, चीन युद्ध ख़त्म कराना चाहता है, लेकिन उसे इसके साथ अपनी दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं का भी ध्यान रखना होगा.

डॉक्टर गिज़ेली कहते हैं, "चीन नहीं चाहता कि यह संघर्ष अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में परेशानी पैदा करे. लेकिन वह ऐसा कोई क़दम भी नहीं उठाएगा, जिससे ईरान के बुनियादी हितों और मांगों को नुक़सान पहुँचे."

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

वह कहते हैं, "ईरान और चीन की सोच आम तौर पर एक जैसी है. दोनों मानते हैं कि अमेरिका और इसराइल की आक्रामक कार्रवाई के कारण यह युद्ध शुरू हुआ और अब तक जारी है."

ऊर्जा और अर्थव्यवस्था

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हामिदरेज़ा अज़ीज़ी कहते हैं कि चीन ऊर्जा का एक बड़ा उपभोक्ता है. इसलिए युद्ध जारी रहने से उसे नुक़सान हो रहा है.

अमेरिका के ऊर्जा सूचना प्रशासन की 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन में इस्तेमाल होने वाली कुल ऊर्जा में तेल की हिस्सेदारी क़रीब पांचवां हिस्सा है. लेकिन चीन अपनी ज़रूरत का 70 फ़ीसदी से ज़्यादा तेल दूसरे देशों से ख़रीदता है.

पिछले साल चीन ने ईरान से हर दिन क़रीब 14 लाख बैरल तेल ख़रीदा था. यह चीन के कुल कच्चे तेल आयात का केवल 12 फ़ीसदी था. वहीं, मध्य पूर्व के बाक़ी देशों की हिस्सेदारी 42 फ़ीसदी थी.

ईरान और खाड़ी के दूसरे देशों से मिलने वाले तेल में जो कमी आई, उसका कुछ हिस्सा चीन ने रूस, ब्राज़ील और दूसरे निर्यातक देशों से तेल ख़रीदकर पूरा कर लिया है. लेकिन इस क्षेत्र से मिलने वाली गैस का दूसरा विकल्प तलाशना कहीं ज़्यादा मुश्किल होगा.

चीन के पास कुल कितना तेल जमा है, इसे गोपनीय रखा जाता है. हालांकि, अनुमान है कि 2025 में उसके पास 100 से 140 करोड़ बैरल तेल का भंडार था.

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में चीन की ऊर्जा नीतियों पर शोध करने वाली एरिका डाउन्स कहती हैं, "अगर युद्ध शुरू होने के समय चीन के पास क़रीब 140 करोड़ बैरल तेल जमा था, तो 2025 में मध्य-पूर्व से होने वाले आयात के हिसाब से यह तेल 254 दिनों तक चल सकता था."

उनका कहना है कि चीन का तेल भंडार इससे भी लंबे समय तक चल सकता है, क्योंकि युद्ध के बावजूद मध्य-पूर्व से कुछ तेल अब भी चीन पहुंच रहा है.

हालांकि, रॉयटर्स में एशिया की कमोडिटी पर लिखने वाले क्लाइड रसेल के मुताबिक़, पिछले चार महीनों में से तीन महीनों में चीन को अपने तेल भंडार से तेल निकालना पड़ा है. इनमें अगस्त भी शामिल है.

डॉक्टर डाउन्स कहती हैं, "बीजिंग चाहेगा कि उसे जल्द से जल्द अपने तेल भंडार का इस्तेमाल बंद करना पड़े, ताकि आगे किसी ज़रूरत के लिए उसके पास पर्याप्त तेल बचा रहे."

अगर ईरान समर्थित हूती सऊदी अरब पर हमले बढ़ाते हैं और बाब अल-मंदब स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मज़बूत करते हैं, तो दुनिया के ऊर्जा बाज़ार में उथल-पुथल और बढ़ सकती है.

ईरान युद्ध से पैदा हुई आर्थिक परेशानियां दुनिया को आर्थिक संकट की तरफ़ भी ले जा सकती हैं. ऐसा होना चीन की उस अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर होगा, जो निर्यात पर काफ़ी निर्भर है.

साल 2019 से चीन की आर्थिक विकास दर धीमी हो रही है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था प्रॉपर्टी संकट, पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक तनाव और स्थानीय सरकारों के बढ़ते क़र्ज़ जैसी समस्याओं से जूझ रही है.

वॉशिंगटन के थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के मुताबिक़, पिछले साल चीन की जीडीपी में जितनी बढ़ोतरी हुई, उसमें शुद्ध निर्यात का योगदान 32.7 फ़ीसदी था. यह 1997 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था.

चीन में लोग अब भी कम ख़र्च कर रहे हैं. ऐसे में निर्यात उसकी आर्थिक तरक़्क़ी का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है.

युद्ध अब ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहाँ कोई भी पक्ष आगे बढ़ता दिखाई नहीं दे रहा. इस बीच ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा रहा है.

वॉशिंगटन ने चेतावनी दी है कि ईरान की अर्थव्यवस्था की मदद करने वाली कंपनियों, बैंकों और देशों पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

अमेरिका ने चीन की कई कंपनियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं. लेकिन अब तक उसने चीन के बड़े बैंकों को निशाना नहीं बनाया है. अमेरिका यह सावधानी ऐसे समय बरत रहा है, जब वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापारिक तनाव पहले से काफ़ी ज़्यादा है.

बीजिंग ने ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक अभियान में शामिल होने की वॉशिंगटन की मांग को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है.

चीन का कहना है कि वह "ग़ैर-क़ानूनी और एकतरफ़ा प्रतिबंधों" का विरोध करता है. उसका यह भी कहना है कि ईरान के साथ उसका सहयोग अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में होता है.

अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल ख़रीदना बंद नहीं करेगा चीन

ईरान मामलों के जानकार अज़ीज़ी कहते हैं कि अमेरिकी दबाव के कारण चीन ईरानी तेल ख़रीदना बंद नहीं करेगा.

वह कहते हैं, "चीन ऐसी मिसाल नहीं बनने देना चाहता, जिसमें अमेरिका दबाव डालकर चीनी कंपनियों और बैंकों से अपनी नीतियां लागू करवा सके."

हालांकि, अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान के लिए चीन तक तेल पहुंचाना बहुत मुश्किल हो गया है.

मार्च में ईरान हर दिन 20 लाख बैरल तेल का निर्यात कर रहा था. अगस्त में यह घटकर प्रतिदिन 2 लाख 20 हज़ार से 2 लाख 55 हज़ार बैरल के बीच रह गया.

रॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिका ने 14 जुलाई को समुद्री नाकाबंदी दोबारा शुरू की थी. उसके बाद से ईरान का कच्चा तेल लेकर कोई भी जहाज़ होर्मुज़ से निकलकर चीन नहीं पहुंच पाया है.

अमेरिका की जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में ईरान मामलों के जानकार मोहम्मद ग़ाएदी कहते हैं कि अगर नाकाबंदी जारी रहती है, तो ईरान और चीन का व्यापार धीरे-धीरे ज़मीनी रास्तों तक सीमित हो जाएगा.

लेकिन ज़मीनी रास्तों से सामान भेजना समुद्री रास्तों के मुक़ाबले महंगा पड़ता है. इन रास्तों से बहुत कम सामान भी भेजा जा सकता है.

चीन वित्तीय प्रतिबंधों का असर कम करना चाहता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह समुद्री नाकाबंदी को चुनौती देने की स्थिति में है या ऐसा करना चाहता है.

अगर चीन ने इस नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की, तो बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच टकराव कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकता है. अभी ऐसा कोई संकेत नहीं है कि चीन का नेतृत्व इसकी क़ीमत चुकाने के लिए तैयार है.

डॉक्टर गिज़ेली कहते हैं कि चीन साफ़ कर चुका है कि वह बातचीत के ज़रिए युद्ध ख़त्म करना चाहता है. उनके मुताबिक़, चीन शायद ईरान को युद्ध और बढ़ाने से रोकेगा.

वह कहते हैं, "चीन बातचीत दोबारा शुरू कराने में मदद कर सकता है और शायद ऐसा करेगा भी. वह ईरान पर कुछ रियायतें देने का दबाव भी डाल सकता है. इससे राष्ट्रपति ट्रंप किसी तरह की जीत का दावा कर सकेंगे और इसे युद्ध ख़त्म करने की वजह बना पाएंगे."

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • चीन बातचीत दोबारा शुरू कराने में मदद कर सकता है और शायद ऐसा करेगा भी. वह ईरान पर कुछ रियायतें देने का दबाव भी डाल सकता है.

    Possible · Within months

Open Questions

  • क्या चीन अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान से तेल खरीदना जारी रख पाएगा?
  • क्या होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है?
  • चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर लंबे समय तक युद्ध के क्या प्रभाव पड़ेंगे?

Related Topics

This article was originally published by BBC हिंदी.

Related Stories

US and Iran discuss phased resolution to reopen Strait of Hormuz
Urgent·

US and Iran discuss phased resolution to reopen Strait of Hormuz

Iran has given the US six days to respond to its proposal for reopening the Strait of Hormuz, which includes lifting sanctions, releasing frozen assets, and ending regional military operations. British Foreign Secretary Ed Miliband met Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi in New York amid rising tensions, urging a diplomatic solution. The Strait remains vital for global energy shipments, with disruptions affecting oil supplies and trade, while Iran-backed Houthis control the Bab al-Mandab Strait, raising concerns over additional trade route disruptions.

Times of India
2 min read
Netanyahu again attacks Mayor Zohran Mamdani at the United Nations, calling him anti-Semite and war criminal
BREAKING·

Netanyahu again attacks Mayor Zohran Mamdani at the United Nations, calling him anti-Semite and war criminal

Israeli Prime Minister Binyamin Netanyahu accused New York Mayor Zohran Mamdani of anti-Semitism at the UN General Assembly and said his criticism endangered the safety of New York's Jewish community. Mamdani also described Netanyahu as a war criminal and demanded his arrest. Tension is rising between the two, while Netanyahu is targeting Mamdani in the election campaign.

BBC हिंदी
3 min read
More on this topicचीन