कृष्ण और यादव समुदाय पर विवादित टिप्पणियां, क्या यूपी चुनाव में इसका असर पड़ेगा?
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धीरेंद्र शास्त्री और संगीत रागी की विवादित टिप्पणियों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी इन बयानों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती बन गया है।
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Why It Matters
धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण की तुलना पर टिप्पणी की, जबकि संगीत रागी ने सपा प्रवक्ता के लिए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। दोनों ने बाद में माफ़ी मांगी है।
बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुई दो टिप्पणियों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल है.
समाजवादी पार्टी इन दोनों मुद्दों पर आक्रामक दिखाई दे रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी थोड़ी असहज नज़र आ रही है.
पहली टिप्पणी हिंदू धर्मगुरु धीरेंद्र शास्त्री की है, जिन्हें उनके अनुयायी बागेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं. दूसरी टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर और आरएसएस से जुड़े संगीत रागी की है.
धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए विवादित टिप्पणी की थी. वहीं, संगीत रागी ने एक टीवी चैनल पर लाइव डिबेट के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज यादव काका के लिए आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था.
हालांकि, संगीत रागी ने बाद में सफ़ाई देते हुए माफ़ी मांगी और कहा कि उनकी टिप्पणी किसी ख़ास समुदाय के लिए नहीं थी. वहीं, धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगी है.
लेकिन समाजवादी पार्टी लगातार दोनों पर हमलावर है.
यूपी के कुंडा में 17 नवंबर से धीरेंद्र शास्त्री का कथा कार्यक्रम प्रस्तावित है. अखिलेश यादव इन कार्यक्रमों को रद्द करवाने की मांग कर रहे हैं.
इससे पहले, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को लखनऊ के हजरतगंज थाने में धीरेंद्र शास्त्री के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी.
वहीं, सपा प्रवक्ता मनोज यादव 'काका' के समर्थन में प्रदर्शन किया और संगीत रागी का पुतला फूंकने की कोशिश की.
विपक्षी दलों के कई नेता भी इन बयानों पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं. इनमें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव शामिल हैं.
इन दोनों बयानों और शास्त्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर बीजेपी के सामने एक राजनीतिक चुनौती भी है. ख़ासकर इसलिए कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और समाजवादी पार्टी इन मुद्दों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश कर सकती है.
समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि दोनों टिप्पणियां बिल्कुल ग़लत हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव के दौरान भी इन मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी.
वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है कि ऐसे बयानों से बचने की ज़रूरत है. उनके मुताबिक़, "ये कहीं से भी शोभा नहीं देते. लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं ने क्या ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों पर टिप्पणियां नहीं कीं? उन्हें अपमानित नहीं किया? आए दिन क्षेत्रीय लोगों का अपमान किया जाता है. समाजवादी पार्टी हिंदुओं को बांटने की कोशिश कर रही है. लेकिन हमें भरोसा है कि हिंदू नहीं बंटेंगे और बीजेपी के साथ रहेंगे."
वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को सिर्फ़ समाजवादी पार्टी को होने वाले राजनीतिक फ़ायदे या नुक़सान के नज़रिए से नहीं देखना चाहिए. वह कहती हैं, "क्या धीरेंद्र शास्त्री भगवान को भी जाति के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं? यह सवाल समाजवादी पार्टी को राजनीतिक फ़ायदा होने का नहीं है, बल्कि इससे कृष्ण भक्तों को ठेस पहुंचती है."
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा भी इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं. उनका कहना है कि बीजेपी लंबे समय से उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करती रही है. ऐसे में भगवान कृष्ण को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी बीजेपी की इस रणनीति के सामने भी चुनौती खड़ी कर सकती है.
उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय तक पहुंच बनाने की बीजेपी की कोशिश कोई नई नहीं है. 2017 में यूपी की सत्ता में आने के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि पार्टी अब तक गैर-यादव ओबीसी पर ध्यान दे रही थी, लेकिन अब यादवों पर भी ज़ोर देगी.
बीजेपी की राजनीति को समझने वाले एक शख़्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भगवान राम और कृष्ण के बीच बहस जितनी बढ़ेगी, बीजेपी को उतना ही फ़ायदा होगा. बीजेपी प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने कहा, "अब जबकि चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को अचानक भगवान कृष्ण की याद आने लगी है."
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी बीजेपी की इस रणनीति पर सवाल उठाती हैं. उनका मानना है कि इन बयानों से यादव वोट बैंक और ज़्यादा एकजुट हो सकता है.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
समाजवादी पार्टी इन बयानों को आगामी चुनावों में मुख्य मुद्दा बनाएगी।
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Open Questions
- क्या ये टिप्पणियां वास्तव में यादव वोट बैंक को एकजुट करेंगी?
- क्या भाजपा इन बयानों से दूरी बनाए रखेगी?




