
बीबीसी फ़्यूचर के लेख में बताया गया है कि वायु प्रदूषण के बावजूद कसरत के स्वास्थ्य लाभ इसके जोखिमों से अधिक होते हैं, विशेषकर कम से मध्यम प्रदूषण वाले क्षेत्रों में, लेकिन उच्च प्रदूषण वाले इलाकों में लंबे समय तक तीव्र कसरत करने से फायदे कम हो सकते हैं और जोखिम बढ़ सकते हैं। लेख में प्रदूषण के संपर्क को कम करने के उपाय भी सुझाए गए हैं।
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वायु प्रदूषण एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है जो हृदय रोग, श्वसन समस्याओं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की 99% आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेती है, जिससे प्रतिवर्ष 67 लाख समय से पहले मौतें होती हैं। लेख में कसरत के स्वास्थ्य लाभ और प्रदूषण के जोखिमों के बीच संतुलन पर चर्चा की गई है।
आम तौर पर कसरत से होने वाले फ़ायदे, वायु प्रदूषण से होने वाले ख़तरों से ज़्यादा होते हैं. फिर भी कुछ तरीक़े अपनाकर हम प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से बच सकते हैं.
हाल ही में मैं सुबह दौड़ने निकली थी. सड़क पार करने के लिए रुकी, तभी एक वैन मेरे पास आकर खड़ी हो गई. उसके साइलेंसर से निकले गहरे धुएं को सांस में जाने से मैं नहीं रोक पाई.
मैं लंदन में रहती हूं और मुझे साइकिल चलाना और दौड़ना पसंद है. मेरे रोज़ के आने-जाने में साइकिल चलाना भी शामिल है. इसलिए ट्रैफ़िक लाइट बदलने का इंतज़ार करते समय अक्सर मैं गाड़ियों के पीछे फंस जाती हूं.
प्रदूषित हवा के कारण खांसते हुए मैं अक्सर सोचती हूं कि क्या प्रदूषण वाली सड़कों पर कसरत करने से मुझे फ़ायदे के बजाय नुक़सान हो रहा है?
यहां हम इसके ख़तरों और फ़ायदों के बारे में जानेंगे.
साथ ही यह भी समझेंगे कि शहरों में कसरत करते समय प्रदूषित हवा से ख़ुद को कैसे बचाया जा सकता है.
जिस हवा में आप सांस ले रहे हैं, उसमें क्या है?
ये बात सब जानते हैं कि वायु प्रदूषण का संबंध दिल की बीमारी, सांस से जुड़ी समस्याओं और कैंसर जैसी लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों से है. इससे कम उम्र में मौत का ख़तरा भी बढ़ता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेती है. इसकी वजह से हर साल 67 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है.
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इंपीरियल कॉलेज लंदन में एसोसिएट प्रोफ़ेसर ऑड्री डी नज़ेल कसरत पर प्रदूषण के असर का अध्ययन करती हैं. उनका कहना है कि वायु प्रदूषण हमारे शरीर के लगभग हर अंग पर असर डालता है.
वह कहती हैं, "पहले हमें लगता था कि इससे केवल सांस से जुड़ी बीमारियां होती हैं. लेकिन इसका संबंध दिल की बीमारियों, डायबिटीज़, सोचने-समझने की क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से भी है."
सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पीएम 2.5 है. ये बेहद छोटे कण होते हैं, जिनका आकार सिर्फ़ 2.5 माइक्रोमीटर होता है.
ये बारीक कण इंसान के बाल की चौड़ाई से क़रीब 30 गुना छोटे होते हैं. गाड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण इन्हें सीधे हवा में छोड़ता है. ये हमारे फेफड़ों के बहुत अंदर तक पहुंच सकते हैं. वहां से ये ख़ून में मिलकर पूरे शरीर में फैल सकते हैं.
समय के साथ शरीर में इन कणों के जमा होने का असर दिमाग़ पर भी पड़ सकता है.
नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से नुकसान
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साल 2025 में प्रकाशित एक समीक्षा में 51 स्टडीज़ को देखा गया. शोधकर्ताओं की एक टीम ने 2.9 करोड़ से ज़्यादा लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया.
उन्हें तीन तरह के वायु प्रदूषण और पार्किंसंस बीमारी के बढ़ते ख़तरे के बीच संबंध मिला. इनमें पीएम 2.5 भी शामिल था.
इस अध्ययन की सह-लेखिका और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ हनीन ख़राइस कहती हैं, "जब कण इतने छोटे होते हैं, तो वे ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर सकते हैं. वे रक्त वाहिकाओं और इस सुरक्षा परत को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. इसके साथ ही ये कण दिमाग़ के भीतर भी पहुंच सकते हैं."
लेकिन हवा में दूसरे प्रदूषक भी मौजूद होते हैं.
व्यस्त सड़कों या शहरों में कसरत करते समय हम नाइट्रोजन डाइऑक्साइड भी सांस में लेते हैं. इस समीक्षा में इसका संबंध भी पार्किंसंस बीमारी के बढ़ते ख़तरे से पाया गया.
माना जाता है कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से फेफड़ों में सूजन हो सकती है. लंबे समय में यह फेफड़ों के विकास और उनके काम करने की क्षमता पर असर डाल सकती है.
इसके अलावा हवा में सल्फ़र डाइऑक्साइड, अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड और ज़मीन के पास बनने वाली ओज़ोन भी होती है.
जब हम दौड़ते, साइकिल चलाते या तेज़ कसरत करते हैं, तो हमारी सांस तेज़ और गहरी हो जाती है. इसका मतलब है कि पैदल चलने के मुक़ाबले दौड़ते समय हम ज़्यादा प्रदूषित हवा अपने भीतर लेते हैं.
एक ही दूरी तय करते समय तेज़ कसरत करने वाले लोगों के फेफड़ों में ज़हरीले कणों की ज़्यादा मात्रा पहुंचती है.
लेकिन शायद यह जानकर हैरानी हो कि कार में बैठने से भी वायु प्रदूषण से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती.
शहरी लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
इंपीरियल कॉलेज लंदन एनएचएस ट्रस्ट में सांस की बीमारियों और फेफड़ों के कैंसर के विशेषज्ञ डॉक्टर रूडी सिन्हारे कहते हैं, "साइकिल चलाते समय प्रदूषण से आपका संपर्क कार में बैठे व्यक्ति के मुक़ाबले कम होता है. साइकिल चलाते समय आप आगे बढ़ते रहते हैं और आसपास थोड़ी ज़्यादा हवा भी चलती रहती है."
प्रदूषण केवल सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से नहीं होता. लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों की भूमिगत रेल सेवाओं में भी बारीक कणों की मात्रा बहुत ज़्यादा हो सकती है.
इनमें से ज़्यादातर कण धातु वाली धूल के होते हैं, जो पहियों, रेल की पटरियों और ब्रेक के बीच होने वाली रगड़ से पैदा होती है. फ़ायदे, नुक़सान से ज़्यादा हैं.
डी नज़ेल कहती हैं, "अच्छी बात यह है कि प्रदूषित शहरों में भी कसरत करने के फ़ायदे इसके ख़तरों से ज़्यादा होते हैं."
उनके मुताबिक़, कसरत ख़ुद हमारे शरीर को प्रदूषण के असर से बचाने में मदद कर सकती है.
साल 2016 के एक अध्ययन में डी नज़ेल और उनके साथियों ने इसी बात को समझने की कोशिश की.
कंप्यूटर मॉडल पर आधारित इस अध्ययन में उन्होंने अनुमान लगाया कि पैदल चलने और साइकिल चलाने से होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रदूषित हवा से होने वाले नुक़सान से ज़्यादा होते हैं.
सिर्फ़ बहुत ज़्यादा प्रदूषण वाली जगहों पर लंबे समय तक कसरत करने के ख़तरे इसके फ़ायदों के बराबर या उनसे ज़्यादा हो सकते हैं. इनमें भारत के दिल्ली जैसे दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर शामिल हैं.
प्रदूषित इलाक़ों में भी कसरत करने से समय से पहले मौत का ख़तरा कम होता है.
हाल में प्रकाशित एक समीक्षा में पाया गया कि प्रदूषित हवा में कसरत करने वाले लोगों में, कसरत न करने वाले लोगों के मुक़ाबले मौत का ख़तरा 26 प्रतिशत कम था.
उम्मीद के मुताबिक़, साफ़ हवा में कसरत करना ज़्यादा बेहतर पाया गया. इससे मौत का ख़तरा 31 प्रतिशत कम हुआ.
डी नज़ेल कहती हैं कि शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह जानकारी हौसला बढ़ाने वाली है.
हालांकि, हर स्थिति में बाहर कसरत करने के फ़ायदे वायु प्रदूषण के ख़तरों से ज़्यादा नहीं होते. इसके लिए अपनी सेहत और बीमारियों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है.
किसे ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
अस्थमा या दिल की बीमारी जैसी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
दूसरे शोधों में पाया गया है कि प्रदूषित इलाक़ों में भी कसरत करने से फेफड़ों की काम करने की क्षमता बेहतर होती है और ब्लड प्रेशर कम होता है.
कसरत प्रदूषण के कारण सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ने वाले कुछ असर को भी कम कर सकती है. लेकिन आप जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह कितनी प्रदूषित है, इससे भी बड़ा फ़र्क पड़ता है.
साल 2018 में सिन्हारे और उनके साथियों ने एक अध्ययन के लिए स्वस्थ लोगों के साथ कुछ बुज़ुर्गों को भी शामिल किया. इन बुज़ुर्गों को फेफड़ों की पुरानी बीमारी सीओपीडी या दिल की कोरोनरी बीमारी थी.
इन लोगों को दो घंटे तक पैदल चलने के लिए कहा गया. कुछ लोगों ने पार्क में सैर की और कुछ ने लंदन की एक व्यस्त सड़क के किनारे.
शोधकर्ताओं ने पाया कि सिर्फ़ दो घंटे बाद ही साफ़ हवा वाले इलाक़े में चलने वाले लोगों के फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं के काम करने की क्षमता बेहतर हुई.
ज़्यादा प्रदूषण वाले इलाक़े में चलने वाले लोगों को इसका कम फ़ायदा हुआ. सीओपीडी वाले लोगों में प्रदूषित हवा के संपर्क के बाद बीमारी के लक्षण और बिगड़ गए.
दूसरे शब्दों में कहें तो कसरत प्रदूषण से होने वाले कई नुक़सान को कम करती है. लेकिन इसका उलटा भी सही है. ज़्यादा प्रदूषण कसरत से शरीर को मिलने वाली सुरक्षा को कम कर देता है.
यह कसरत से सोचने-समझने की क्षमता को मिलने वाले फ़ायदे को भी कम कर देता है.
इसलिए ज़्यादातर मामलों में कसरत के फ़ायदे इसके ख़तरों से ज़्यादा होते हैं. लेकिन प्रदूषित हवा में कसरत करना फिर भी सही स्थिति नहीं है.
प्रदूषित हवा से संपर्क कैसे कम करें
व्यस्त शहरों में रहने वाले लोग दौड़ने के लिए अपना घर छोड़कर गांव नहीं जा सकते. लेकिन हमारे पास अगला बेहतर विकल्प यह है कि आसपास की सबसे हरी-भरी या कम भीड़ वाली जगह खोजी जाए.
मिसाल के तौर पर, मैं सुबह काम पर जाते समय कम ट्रैफ़िक वाली सड़क से साइकिल चला सकती हूं. हालांकि, उस रास्ते से जाने में कुछ मिनट ज़्यादा लगते हैं.
डी नज़ेल कहती हैं कि शोध से पता चलता है कि ज़्यादा ट्रैफ़िक वाली सड़क से केवल एक या दो गलियां दूर जाने पर प्रदूषण से संपर्क 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है.
अगर आप छोटी या अंदर की गलियों से जा सकते हैं, तो यह और भी बेहतर है. एक अध्ययन में पाया गया कि व्यस्त सड़कों के बजाय अंदर की गलियों से जाने पर प्रदूषण से संपर्क 50 प्रतिशत तक कम हो गया.
अगर संभव हो तो सुबह-शाम ट्रैफ़िक के सबसे व्यस्त समय में बाहर निकलने से बचना भी अच्छा है.
ख़राइस कहती हैं कि ट्रैफ़िक में एक जगह खड़ी गाड़ियां प्रदूषण के ऐसे हिस्से बना देती हैं, जहां इसकी मात्रा बहुत ज़्यादा होती है.
उनकी सलाह है कि गर्म और तेज़ धूप वाली दोपहर में ओज़ोन की बढ़ी हुई मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए. वह बताती हैं कि बहुत ज़्यादा गर्मी और तेज़ धूप में ज़मीन के पास ओज़ोन बनने लगती है. अगर इसके साथ व्यस्त समय का वायु प्रदूषण भी जुड़ जाए, तो समस्या और बढ़ जाती है.
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वह कहती हैं, "यह पूरे सिस्टम से जुड़ी समस्या है. निजी तौर पर किए गए चुनाव प्रदूषित हवा से किसी व्यक्ति का संपर्क कम कर सकते हैं. लेकिन सबसे असरदार सुरक्षा तभी मिलेगी, जब प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों से निकलने वाले उत्सर्जन को रोका जाए.
मैं अपनी अगली दौड़ के लिए स्थानीय पार्क में ही जाना पसंद करूंगी.
- मेलिसा होगेनबूम बीबीसी में वरिष्ठ स्वास्थ्य संवाददाता हैं. वह 'ब्रेडविनर्स' और 'द मदरहुड कॉम्प्लेक्स' किताबों की लेखिका हैं. इंस्टाग्राम पर उनका नाम (melissa_hogenboom) है.
- इस लेख में दी गई सभी जानकारियां केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं. इन्हें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.

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