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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: लंबी और बेहतर ज़िंदगी के लिए क्यों ज़रूरी है?
Health
BBC हिंदी6/18/2026Health5 min readIndia

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: लंबी और बेहतर ज़िंदगी के लिए क्यों ज़रूरी है?

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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जिसे रेजिस्टेंस ट्रेनिंग भी कहा जाता है, उम्र बढ़ने के साथ जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। यह हृदय रोग, कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के खतरे को कम करती है।

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प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

हर तरह की एक्सरसाइज आपकी सेहत के लिए और आपकी उम्र लंबी करने के लिए फ़ायदेमंद होती है. लेकिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग आपको बेहतर ज़िंदगी जीने में मदद करती है.

आइए जानते हैं कि आप खुद को कैसे ज्यादा मजबूत बना सकते हैं.

अगर आपने कुछ दिन पहले मुझे घर में खरीदारी का सामान ले जाते देखा होता, तो शायद आपको मेरा बरताव थोड़ा अजीब लगता.

मैंने दोनों हाथों में दो-दो लीटर की पानी की बोतल पकड़ी हुई थी. और मैं स्क्वैट्स कर रही थी.

यह मेरी कोशिश का हिस्सा है. मैं अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में ज्यादा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल करना चाहती हूं.

इसके पीछे वजह भी है. फिट रहने की बात हो, तो मेरे दोस्त ज़्यादातर कार्डियो पर ध्यान देते हैं.

हम अपने कदम गिनते हैं. अपनी दौड़ को ट्रैक करते हैं. वीकेंड पर साइकिल चलाते हैं.

हममें से कुछ लोग कभी-कभी हाफ मैराथन या ट्रायथलॉन में भी हिस्सा लेते हैं.

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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

ऐसी एरोबिक एक्सरसाइज आपको स्वस्थ रख सकती है. इससे लंबी उम्र जीने में भी मदद मिलती है.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसके साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी की जाए, तो उम्र बढ़ने के साथ आपकी ज़िंदगी की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़) भी बेहतर बनी रहती है.

"बात फ़िटनेस की हो तो स्ट्रेंथ सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला हिस्सा है." कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में मसल फिजियोलॉजी के रिसर्चर स्टुअर्ट फिलिप्स मुझसे यही कहते हैं.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, मैं रेजिस्टेंस ट्रेनिंग के फायदों को समझने की कोशिश कर रही हूं. साथ ही यह भी जान रही हूं कि इसे अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में सबसे अच्छे तरीके से कैसे शामिल किया जाए.

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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जिसे रेजिस्टेंस ट्रेनिंग भी कहा जाता है, उसका सबसे ज्यादा फायदा शुरुआत में मिलता है. लेकिन शुरुआत से ही बिलकुल हैवीवेट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं करनी चाहिए. यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा की एपिडेमियोलॉजिस्ट जेस गॉरज़ेलिट्ज़ कहती हैं.

वह कहती हैं, "सबसे ज्यादा जोखिम उन लोगों को है, जो बिल्कुल कुछ नहीं करते. जो लोग पहली बार शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए यह सबसे बड़ा संदेश है."

रेजिस्टेंस ट्रेनिंग शुरू करने के लिए जरूरी नहीं कि आप जिम जाएं. या कोई खास उपकरण खरीदें.

स्टुअर्ट फिलिप्स कहते हैं कि शुरुआत में हफ्ते में दो सेशन करने का लक्ष्य रखें. हर सेशन 20 से 30 मिनट का होना चाहिए.

वह सलाह देते हैं कि नीचे दी गई एक्सरसाइज करें. हर एक्सरसाइज को एक सेट में कई बार दोहराएं. फिर उसी सेट को दो से तीन बार करें.

लोअर बॉडी: सिट-टू-स्टैंड्स, स्क्वैट्स, स्टेप-अप्स या लंजेस.

अपर बॉडी पुश: वॉल पुश-अप्स, सामान्य प्रेस-अप्स या चेस्ट प्रेस.

अपर बॉडी पुल: रेजिस्टेंस बैंड या मशीन की मदद से रोइंग मूवमेंट्स.

ट्रंक/कोर: प्लैंक्स या लोडेड कैरीज़. इसमें वजन पकड़कर चलते हुए एक्सरसाइज की जाती है.

घर पर भी करना आसान

जैसे-जैसे आप ट्रेनिंग करते जाएंगे, वैसे-वैसे एक्सरसाइज की मात्रा बढ़ा सकते हैं. इससे आपको और ज्यादा फायदा मिलेगा.

अगर स्क्वैट्स जैसी किसी एक्सरसाइज में सिर्फ अपने शरीर के वजन से अभ्यास करना आसान लगने लगे, तो आप हल्के वजन का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं.

बड़े मूवमेंट्स पर ध्यान दें. रेजिस्टेंस ट्रेनिंग शुरू करने के लिए जरूरी नहीं कि आप जिम जाएं. या कोई खास उपकरण खरीदें. (बीबीसी स्पोर्ट ने बिना किसी उपकरण के घर पर एक्सरसाइज करने का तरीका भी बताया है.)

जेस गॉरज़ेलिट्ज़, जो खुद भी पावरलिफ्टर हैं, कहती हैं कि हम कुर्सी की मदद से आसानी से बॉडीवेट स्क्वैट्स कर सकते हैं.

सोफा या बिस्तर की मदद से बैठने और उठने की प्रैक्टिस की जा सकती है. इस दौरान शरीर की हरकत पर पूरा कंट्रोल रखा जा सकता है.

वहीं, घर में मौजूद खाने के डिब्बे या पानी की बोतलों का इस्तेमाल बाइसेप कर्ल्स करने के लिए किया जा सकता है.

जो लोग जिम जाते हैं, उन्हें जेस गॉरज़ेलिट्ज़ पूरे शरीर पर असर डालने वाली इन तीन बड़ी एक्सरसाइज पर ध्यान देने की सलाह देती हैं.

बारबेल बैक स्क्वैट्स.

बेंच प्रेस.

डेडलिफ्ट्स.

वह शोल्डर प्रेस करने की सलाह भी देती हैं. उनका कहना है, "आपकी पीठ कभी भी जरूरत से ज्यादा मजबूत नहीं हो सकती."

अच्छी पोश्चर बनाए रखने के लिए पीठ का मजबूत होना बहुत जरूरी है. इससे पीठ दर्द से बचाव होता है. रीढ़ की हड्डी भी ज्यादा स्थिर रहती है.

खुद को चुनौती दें

अगर आपको अपनी एक्सरसाइज बहुत आसान लगने लगे, तो वजन बढ़ाएं. या रिपीटेशन बढ़ाएं. या फिर ज्यादा सेट करें.

समय के साथ हमारी ताकत बढ़ती है. ऐसे में शरीर उस चुनौती का आदी हो जाता है.

स्टुअर्ट फिलिप्स कहते हैं, "इसके लिए बहुत बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं है. कई महीनों तक लगातार छोटे-छोटे बदलाव ही सबसे ज्यादा असर दिखाते हैं."

मान लीजिए, शुरुआत में आप सिर्फ 15 सेकंड से भी कम समय तक प्लैंक कर पाते हैं. लेकिन जैसे-जैसे आपकी ताकत बढ़ेगी, आप इसे ज्यादा देर तक कर पाएंगे.

फिलिप्स कहते हैं कि एक्सरसाइज इतनी चुनौतीपूर्ण होनी चाहिए कि मेहनत महसूस हो. लेकिन उसे करना आपके लिए संभव भी हो.

वह कहते हैं, "जिम से इस हालत में बाहर निकलने की जरूरत नहीं कि आप घायल जानवर जैसे लगें. धीरे-धीरे आगे बढ़ें."

बहुत ज्यादा करने की कोशिश करने से बेहतर है कि आप नियमित रहें.

अगर कभी आपका मन न करे, तो एक बात याद रखें. एक्सरसाइज में थोड़ा-बहुत करना भी, बिल्कुल कुछ न करने से बेहतर होता है.

कई बीमारियों से बचाव

नियमित रूप से मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करने से लंबी उम्र की संभावना बढ़ जाती है.

एक बड़े अध्ययन की समीक्षा के मुताबिक, इससे दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और समय से पहले मौत का खतरा भी कम हो सकता है.

इसमें पाया गया कि हफ्ते में सिर्फ 30 से 60 मिनट मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करने से, किसी भी वजह से होने वाली मौत का खतरा 10 से 17 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

एक हालिया बड़े अध्ययन में पाया गया कि जितनी ज्यादा एक्सरसाइज करेंगे, फायदे भी उतने ज्यादा मिलेंगे.

इस अध्ययन के मुताबिक, अगर आप हफ्ते में 90 मिनट से दो घंटे तक रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करते हैं, तो समय से पहले मौत का खतरा 13 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

वहीं, जो लोग रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और कार्डियो, दोनों करते हैं, उनमें यह खतरा 58 प्रतिशत तक कम पाया गया.

स्टुअर्ट फिलिप्स कहते हैं, "इसे आसान भाषा में समझें तो एरोबिक फिटनेस आपको लंबी उम्र जीने में मदद करती है. लेकिन मसल्स की ताकत आपको उस लंबी ज़िंदगी को बेहतर तरीके से जीने में मदद करती है. सबसे अच्छा यही है कि हम दोनों करें."

हर उम्र में करें स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

रिसर्च बताती है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का फायदा हर उम्र में मिलता है.

जेस गॉरज़ेलिट्ज़ की रिसर्च में पाया गया कि 70 साल से ज्यादा उम्र के जो लोग नियमित रूप से वेट ट्रेनिंग करते थे, उनमें मौत का खतरा उन लोगों की तुलना में कम था, जो बिल्कुल वेट ट्रेनिंग नहीं करते थे.

गॉरज़ेलिट्ज़ कहती हैं, "खासकर बढ़ती उम्र में इससे रोजमर्रा के काम करने की क्षमता बेहतर होती है. शरीर पहले से ज्यादा सक्षम बनता है. मसल्स भी मजबूत होते हैं."

स्टुअर्ट फिलिप्स कहते हैं कि ज्यादा मसल्स बनाना भविष्य के लिए बचत करने जैसा है.

वह कहते हैं, "जब बीमारी, चोट, सर्जरी या बढ़ती उम्र का असर सामने आएगा, और ऐसा अक्सर होता है, तब आपके शरीर में ताकत का अतिरिक्त भंडार होना चाहिए."

वह कहती हैं, "जिम जाकर एक्सरसाइज करने से शरीर का तनाव और चिंता काफी हद तक दूर हो जाती है."

जेस गॉरज़ेलिट्ज़ और स्टुअर्ट फिलिप्स, दोनों का कहना है कि सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसी एक्सरसाइज चुनें, जिन्हें आप आसानी से कर सकें. और जिन्हें अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में शामिल करना भी आसान हो.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, मैं पहले से ही काफी कार्डियो करती हूं. इसलिए अब मैं सुबह कॉफी पीने से पहले या मीटिंग्स के बीच प्लैंक और कुछ स्क्वैट्स भी करने लगा हूं.

मेरा लक्ष्य है कि धीरे-धीरे इन्हें और बढ़ाऊं. मुझे भरोसा है कि भविष्य में मेरा शरीर इसके लिए मेरा शुक्रिया अदा करेगा.

(मेलिसा होगेनबूम बीबीसी में सीनियर हेल्थ संवाददाता हैं. वह ब्रेडविनर्स और द मदरहुड कॉम्प्लेक्स की लेखिका भी हैं. इंस्टाग्राम पर उनका अकाउंट मेलिसा_होगेनबूम है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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