
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में लगातार तीन दिन प्रदर्शन हुए. दिल्ली में पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकते हुए कई कार्यकर्ताओं, नेताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया, जिनमें नेहा बोरा, सौरभ भारद्वाज और योगेंद्र यादव शामिल हैं. मुंबई में शिवसेना, एमएनएस और सीजेपी ने भी प्रदर्शन किया, जिसमें नसीरुद्दीन शाह और शबाना आज़मी जैसे कलाकार भी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और यौन हमले के आरोप लगाए हैं.
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसकी वजह अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट है, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों पर 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी.
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े को लेकर पिछले तीन दिनों से दिल्ली और मुंबई में क्या-क्या हुआ?
प्रकाशित 3 मिनट पहले
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर लगातार तीन दिन प्रदर्शन हुए. दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती के दिन शुरू हुआ प्रदर्शन शनिवार और रविवार को भी देखने को मिला.
लेकिन दिल्ली में इस बार पुलिस ज़्यादा मुस्तैद दिखी. किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर तक पहुंचने नहीं दिया गया.
रविवार को दिल्ली में आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिज़न्स मार्च' निकाला. इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए काफी लोग पहुंचे.
इस मार्च के दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया. नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस जिस गाड़ी में ले गई, उसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी.
कई और नेताओं ने भी सिटिज़न्स मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए.
इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में इंडिया गेट इलाके में पहुंचे. आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "ये हवा में मेरे जूते हैं. आज इंडिया गेट पर दिल्ली पुलिस ने मुझे उल्टा लटका दिया, ताकि कैमरों में मेरा चेहरा कैद न हो."
वीडियो में पुलिस वाले उन्हें उठाकर ले जाने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं.
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वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा, "सिटिज़न्स मार्च के दौरान आज भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर जाते हुए पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया. यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है, जो ज्ञानेश कुमार के हटने तक जारी रहेगा."
रविवार शाम को यूथ कांग्रेस ने भी ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ मार्च निकालकर प्रदर्शन किया.
यूथ कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "जंतर-मंतर को फिर से जनता को सौंपने और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जंतर-मंतर मार्ग पर धरने पर बैठे आईवाईसी के कार्यकर्ता."
वहीं, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने रविवार को मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' किया. इस मार्च में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी शामिल हुए.
शनिवार को क्या-क्या हुआ
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शनिवार को कई सामाजिक कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचने के लिए आगे बढ़े, जिन्हें केरल हाउस के पास दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
मौके पर मौजूद बीबीसी न्यूज़ हिंदी के संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने बताया कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के अंदर प्रवेश नहीं कर सके. मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने उन्हें केरल हाउस के पास रोक दिया.
दो अक्तूबर को हुए प्रदर्शन के बाद आइसा की ओर से शनिवार के लिए भी जंतर-मंतर पहुंचने की कॉल दी गई थी.
इन प्रदर्शनकारियों में आइसा के कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण जैसी हस्तियां भी मौजूद थीं, जिन्हें अन्य लोगों के साथ डिटेन कर लिया गया.
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था और उन्होंने एक महिला पुलिसकर्मी पर कोहनी मारने और नाखून से चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था.
शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान दो महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शनकारी युवती ने एक पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर यौन हमले के आरोप लगाए हैं.
एक महिला पत्रकार का आरोप है कि आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर वहां से चले गए.
वहीं, एक वरिष्ठ महिला पत्रकार और एक प्रदर्शनकारी युवती ने दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर यौन हमले के आरोप लगाए.
इसके बाद शनिवार और रविवार को पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया.
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शुक्रवार को सीजेपी ने मुंबई में किया प्रदर्शन
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 2 अक्तूबर यानी शुक्रवार को मुंबई में एक प्रोटेस्ट का कॉल दिया.
वहीं, आइसा और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए इजाज़त मांगी थी.
मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग जुटे. पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की.
मुंबई में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, "सरकार इतनी नाकाबिल है कि हमें दो महीने में दूसरी बार प्रदर्शन करना पड़ा है."
उन्होंने कहा, "अगर गांधी इस देश की आत्मा हैं, तो आंबेडकर इस देश की रीढ़ हैं. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और नेहरू ने हमें वोट देने का अधिकार दिया."
मुंबई में प्रदर्शन में शामिल होने बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आज़मी और सिंगर-कंपोज़र विशाल ददलानी भी पहुंचे.
शिवसेना उद्धव गुट ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया.
दिल्ली में पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और दिल्ली मेट्रो ने भी 10 से ज़्यादा मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया.
इसके बाद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचने की कोशिश करते रहे और उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह को हिरासत में ले लिया गया. लेकिन किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर नहीं पहुंचने दिया गया.
इस बीच चुनाव आयोग ने शुक्रवार सुबह एक्स पर पोस्ट कर स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) में छूटे हुए नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का एलान किया.
चुनाव आयोग ने विशेष अभियान के तहत मतदाता सूची के सत्यापन, छूटे मतदाताओं की पहचान और फ़ॉर्म 6 भरवाने के निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक इस अभियान के तहत बीएलओ घर-घर पहुंचेंगे, युवा मतदाताओं पर ध्यान देंगे और बूथ स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे.
क्यों कर रहे हैं ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में ख़बर छपी कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर '10 महीने में 14 बार आपत्ति' दर्ज कराई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, "ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, ख़ुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और 'अनधिकृत, गैरकानूनी' कदमों पर सवाल उठाए."
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AI outlook — possibilities, not facts
चुनाव आयोग विशेष अभियान के तहत बीएलओ घर-घर पहुंचकर मतदाता सूची का सत्यापन करेगा
Very likely · Within weeks
दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन जारी रहेंगे जब तक ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई नहीं होती
Likely · Within weeks

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