तेलंगाना: आदिलाबाद के आरआईएमएस अस्पताल में आग, पांच नवजात शिशुओं की मौत
आदिलाबाद के आरआईएमएस अस्पताल के एसएनसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग, पांच नवजात शिशुओं की मौत और जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन।
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तेलंगाना के आदिलाबाद स्थित आरआईएमएस अस्पताल के एसएनसीयू में 21 सितंबर को शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। इस हादसे में पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई। सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।
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आरआईएमएस अस्पताल 2008 में आदिलाबाद के आदिवासी लोगों को सुपर स्पेशलिटी मेडिकल सेवा देने के लिए खोला गया था। यह अस्पताल 'संकल्प प्रोजेक्ट' के तहत एसएनसीयू सुविधाओं से लैस है।
पीर ख़ान ने कहा, "मैं अपनी बेटी को नहीं ढूंढ रहा था. मैंने सबसे पहले जिन 12 बच्चों को देखा, उन्हें बाहर निकाला. हमारी पाँच दिन की बच्ची की दम घुटने से मौत हो गई." उन्होंने आगे कहा, "क्या वे सब किसी और के बच्चे नहीं थे? मैं उन्हें कैसे छोड़ सकता था?"
अधिकारियों ने बताया कि 21 सितंबर की रात 11:40 बजे आदिलाबाद के आरआईएमएस अस्पताल के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में लगी आग में पीर ख़ान की बेटी समेत पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई. तीन नवजात शिशुओं की मौत 21 सितंबर को घटना के समय हुई थी और दो की मौत 23 सितंबर को इलाज के दौरान हुई.
तेलंगाना के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, "प्रारंभिक जांच के अनुसार, एसएनसीयू के एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग और जहरीली गैसें निकलीं. दुर्घटना के समय एसएनसीयू में कुल 27 नवजात थे. बचाए गए बाक़ी बच्चों को आदिलाबाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है."
तेलंगाना सरकार ने इस दुर्घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, "समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी."
जब बीबीसी की टीम दुर्घटनास्थल स्थित एसएनसीयू में पहुंची, तो वहां की दीवारें और फर्श काले पड़ गए थे और धुएं के काले निशान दिख रहे थे. छोड़े हुए चप्पल, कालिख से सना फ़र्श और चिकित्सा उपकरण इधर-उधर बिखरे पड़े थे.
इंद्रवेली मंडल के गिनेरा के रहने वाले कुमरा दिनेश ने बीबीसी को बताया, "पहले नर्सिंग स्टेशन एरिया में एसी मशीन में आग लग गई. फिर तीन धमाके सुनाई दिए. जब मैं अंदर गया, तो धुएं के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया. मैं हांफ़ते हुए बाहर आया. आधे घंटे बाद, कोई मेरी बेटी को बाहर ले आया." दिनेश ने बताया कि उनकी पत्नी ने 15 दिन पहले उसी आरआईएमएस अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था, और एसएनसीयू से बाहर निकाले जाने के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी बेटी की मौत हो गई थी.
आरआईएमएस हॉस्पिटल 2008 में आदिलाबाद ज़िले के आदिवासी लोगों को सुपर स्पेशलिटी मेडिकल सर्विस देने के मकसद से खोला गया था. उत्नूर एजेंसी इलाके के आदिवासी लोग ज़्यादातर बेहतर इलाज के लिए यहाँ आते हैं. इस इलाक़े में प्रेग्नेंट महिलाओं में थैलेसीमिया और एनीमिया आम है. इस वजह से, मांओं और उनके बच्चों को बच्चे के जन्म के समय कम वज़न, एनीमिया, सांस की दिक्कतें होने की संभावना ज़्यादा होती है.
आरआईएमएस के डायरेक्टर डॉ. जयसिंह ने बीबीसी को बताया, "नए जन्मे बच्चों की मौत की दर कम करने के लिए, केंद्र सरकार ने इन कॉम्प्लीकेशंस को ध्यान में रखते हुए 'संकल्प प्रोजेक्ट' के तहत देश भर के नौ इलाकों में एसएनसीयू बनाए हैं. आदिलाबाद आरआईएमएस हॉस्पिटल उनमें से एक है."
महाराष्ट्र के किनवट के रहने वाले पेंडुर विक्रम अपने छोटे भाई की बेटी से मिलने आए थे, जिसका आरआईएमएस में इलाज चल रहा था. विक्रम ने बीबीसी को बताया, "मेरा छोटा भाई अपनी बेटी को देखकर एसएनसीयू से बाहर आया, उसके थोड़ी देर बाद ही धमाके हुए. जब मैं अंदर गया, तो मैंने घना धुआँ देखा. वहाँ एक डॉक्टर की सलाह पर, मैंने फायर एक्सटिंग्विशर से शीशा तोड़ा. फिर मैं बच्चे को लेकर बाहर चला गया. मैं कुछ और लोगों को भी बाहर ले आया."
आदिवासी एसोसिएशन के सदस्य पूसम सचिन ने बीबीसी को बताया, "जब हमें इस मामले के बारे में पता चला, तो सब कुछ अस्त-व्यस्त लग रहा था. हर कोई भाग रहा था. हमारे आदिवासी ठीक से तेलुगु नहीं बोलते हैं. हमारे कई लोगों का यहां इलाज चल रहा है. हमने उनकी मदद की और उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया. यहां तक कि चप्पल पहनकर भी इस वार्ड के पास घूमने की इजाज़त नहीं है क्योंकि उससे इंफेक्शन फैलता है. लेकिन इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है."
कुछ परिवार वाले अपने बच्चों को ख़तरे से बाहर निकालने के लिए एसएनसीयू के अंदर गए. उनमें से एक आदिलाबाद ज़िले के अनुकुंटा गांव की कवेती निर्मला थीं. निर्मला ने कहा, "मुझे एक दिन बाद छुट्टी मिलनी थी. आग और धुएं से मुझे झटका लगा. मैं सांस नहीं ले पा रही थी. मैं अपनी पोती को बचाने के लिए अंदर गई, भले ही उसका शरीर जल रहा था. मैंने अपनी पोती को उसके कान के पास के निशान और बिस्तर पर फैले कपड़ों के रंग से पहचाना और उसे बाहर ले आई." निर्मला ने आरोप लगाया कि जब बच्चों को बाहर लाया गया तो वहां मौजूद कुछ नर्सिंग स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया.
हालांकि, आदिलाबाद आरआईएमएस अस्पताल के निदेशक डॉ. जयसिंह ने कर्मचारियों की लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारियों ने लोगों की मदद की और शिशुओं को बाहर निकाल लिया. उन्होंने घटिया एसी यूनिटों के आरोपों का भी खंडन किया. डॉ. जयसिंह ने कहा, "हम घटना के कुछ ही मिनटों के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए थे. हमारी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, विभागाध्यक्ष, कनिष्ठ डॉक्टर और अन्य स्टाफ ने मिलकर दस मिनट के भीतर बच्चों को बाहर निकाला. उन्हें एम्बुलेंस में निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया."
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
तीन सदस्यीय जांच दल द्वारा घटना की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
Very likely · Within weeks
Open Questions
- जांच समिति की रिपोर्ट कब तक आएगी?
- क्या अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था?







