मुरादाबाद: सर्किट हाउस के पास नमाज़ पढ़ने के वायरल वीडियो पर समाजवादी पार्टी नेता के ख़िलाफ़ एफ़आईआर
वायरल वीडियो के आधार पर मुरादाबाद पुलिस ने सपा ज़िला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के ख़िलाफ़ सार्वजनिक रास्ते में बाधा और उपद्रव का मामला दर्ज किया है। विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है।
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस के पास गाड़ी के पीछे नमाज़ पढ़ने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने समाजवादी पार्टी के ज़िला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की निंदा की है।
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Why It Matters
मई 2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक ज़मीन पर नमाज़ पढ़ने का दावा कानूनी अधिकार के तौर पर नहीं किया जा सकता।
Author, शहबाज़ अनवर
पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
प्रकाशित 6 सितंबर 2026, 15:49 IST
उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नमाज़ पढ़ने वाले एक वीडियो के आधार पर एक बुज़ुर्ग शख़्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
हालांकि पुलिस ने इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है और न ही बीबीसी इस वीडियो की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि कर पाया है.
वीडियो बिलारी के समाजवादी पार्टी विधायक मोहम्मद फ़हीम इरफ़ान के चाचा और समाजवादी पार्टी के ज़िला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान का बताया जा रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि वो एक गाड़ी के सामने नमाज़ पढ़ रहे हैं.
इस वीडियो के आधार पर मुरादाबाद के मझोला थाने में शुक्रवार को दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है, "हाजी मोहम्मद उस्मान नाम के शख़्स 3 सितंबर को मुरादाबाद सर्किट हाउस के आने-जाने वाले मार्ग में खड़ी गाड़ी के पीछे नमाज़ पढ़ रहे हैं."
"इससे गाड़ियों और लोगों को रास्ते से निकलने में दिक्कत हुई. इसलिए इस मामले में कार्रवाई की जाए."
मुरादाबाद पुलिस ने हाजी मोहम्मद उस्मान के ख़िलाफ़ बीएनएस की धारा 285 (सार्वजनिक रास्ते या जलमार्ग में बाधा डालना) और धारा 292 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
एफ़आईआर दर्ज करने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राज्य की बीजेपी सरकार की निंदा की है.
मुरादाबाद (नगर) के पुलिस अधीक्षक रणविजय सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि मझोला थाना क्षेत्र स्थित सर्किट हाउस के जेई ने एक आवेदन मझोला थाने को दिया था.
रणविजय सिंह ने कहा, ''शिकायतकर्ता ने इस आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके पास एक वीडियो आया था और उसमें हाजी उस्मान नाम का एक शख़्स सर्किट हाउस के प्रांगण में अनाधिकृत तौर पर नमाज़ अदा कर रहे थे. उनकी इस तरह की गतिविधियों से वहां यातायात प्रभावित हुआ था. इन सभी आरोपों के आधार पर पुलिस ने कुछ धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया और मामले की जांच की जा रही है.''
वहीं हाजी मोहम्मद उस्मान ने कहा है कि उन्हें पता चला है कि ऐसा कोई वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो नमाज़ पढ़ते दिखाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, "जो वीडियो वायरल हो रहा है उसकी सत्यता पर सवाल है. ये कब बनाया. इसे कहां, किसने किस परिस्थिति में बनाया, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है."
उन्होंने कहा, ''लोग सार्वजनिक जगहों पर एकांत तलाश कर नमाज़ पढ़ लेते हैं. इस पर इतना हंगामा नहीं होना चाहिए. हमारे देश में शैक्षणिक कार्यक्रमों से पहले सरस्वती वंदना होती है. कोई निर्माण कार्य होता है तो भूमि पूजन होता है. अगर सिर्फ़ नमाज़ पर सवाल उठाया जाता है तो ये पूरा भेदभाव का मामला है.''
उन्होंने कहा, ''जो वीडियो दिखाई दे रहा है, उसके बारे में मुझे याद नहीं कि ये कब का है. लेकिन नमाज़ किसी का रास्ता रोक कर नहीं पढ़ी जा रही है. जहां कारें खड़ी होती हैं, यानी पार्किंग में नमाज़ पढ़ी जा रही है. दरअसल कारों के पीछे जो जगह है वहां नमाज़ पढ़ी जा रही है.''
हाजी उस्मान ने कहा कि "ऐसे मुक़दमे से देशभक्त और संविधान के लोग डरने वाले नहीं हैं, क्योंकि संविधान ने इबादत का अधिकार सबको दिया है. इबादत करना कोई शर्म की नहीं, फ़ख़्र की बात है. शासन को चाहिए को वो इस मुक़दमे को निरस्त करे. इससे समाज में ग़लत संदेश जा रहा है."
उन्होंने कहा कि वो मुरादाबाद जाते रहते हैं, सर्किट हाउस में नमाज़ पढ़ी गई है, लेकिन ये पता नहीं कि वीडियो किसने कब बनाया .
हाजी उस्मान ने कहा, ''अभी तक इस संबंध में मुझे थाने से कोई सूचना नहीं मिली है. मैंने तो वीडियो भी नहीं देखा है. वीडियो की कुछ अंश या तस्वीरें मैंने देखी है. उसकी सत्यता की पुष्टि मैं नहीं कर सकता. हां, ये ज़रूर है कि वीडियो में मैं ही दिखाई दे रहा हूँ.''
कांग्रेस के मीडिया एंड पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा है कि "मुझे यकीन है कि योगी के शैतानों का अदृश्य काफ़िला मुरादाबाद में सर्किट हाउस के अंदर इस सड़क से गुज़र रहा होगा और उन्हें यह बुज़ुर्ग व्यक्ति रास्ते में रुकावट बना हुआ मिला होगा, जो शांति से अपने भगवान के सामने सजदा कर रहा था."
"शायद इसीलिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 (सार्वजनिक रास्ते में ख़तरा या रुकावट) और 292 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई."
"उनका दूसरा "अपराध"? वो हाजी मोहम्मद उस्मान हैं. समाजवादी पार्टी के ज़िला उपाध्यक्ष और बिलारी के विधायक मोहम्मद फ़हीम इरफ़ान के चाचा और एक मुसलमान. कितनी शर्म की बात है."
वहीं समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा है, "नमाज़ का समय था, इन बुज़ुर्ग ने पार्किंग एरिया में बिना किसी डिस्टर्बेंस के चुपचाप नमाज़ पढ़ी, अपने धार्मिक तरीके से अपने आराध्य को याद किया लेकिन हिन्दू मुस्लिम एंगल खोजने वाली भाजपा सरकार ने इनके ख़िलाफ़ तत्काल एफ़आईआर दर्ज करवा दी. सोचिए ज़रा कितना घिनौना और किस लेवल का गंदा सोच सकते हैं भाजपाई, कभी देखा था आपने ऐसा?"
मई 2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था सार्वजनिक ज़मीन पर नमाज़ पढ़ने या बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजन करने को क़ानूनी अधिकार के तौर पर दावा नहीं किया जा सकता.
अदालत ने कहा था कि संविधान में दिया गया धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरे लोगों के अधिकारों के अधीन है.
अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले के इकोना गांव में एक ज़मीन पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति मांगने वाली याचिका ख़ारिज करते हुए की थी. न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद और न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की खंडपीठ ने असीन नाम के व्यक्ति की याचिका ख़ारिज कर दी थी.
असीन का दावा था कि ज़मीन उनकी निजी संपत्ति है और उन्होंने वहां नमाज़ अदा करने के लिए प्रशासन से सुरक्षा और अनुमति मांगी थी.
असीन ने 16 जून 2023 की एक पंजीकृत गिफ्ट डीड के आधार पर ज़मीन पर अपना मालिकाना हक़ जताया था. हालांकि, राज्य सरकार ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में ज़मीन आबादी की सार्वजनिक ज़मीन के तौर पर दर्ज है और याचिकाकर्ता अपना वैध मालिकाना हक़ साबित नहीं कर सकते.
अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है. अगर धार्मिक गतिविधि सार्वजनिक व्यवस्था, लोगों की आवाजाही या दूसरे लोगों के अधिकारों को प्रभावित करती है, तो उस पर क़ानून के तहत रोक या नियमन लगाया जा सकता है.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक ज़मीन का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या समूह द्वारा नियमित धार्मिक आयोजनों के लिए अपने अधिकार के तौर पर नहीं किया जा सकता है.
Open Questions
- वायरल वीडियो की सत्यता और तारीख क्या है?
- क्या पुलिस को इस मामले में कोई प्रत्यक्ष शिकायत मिली थी?


