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Backमिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन्स की हार को अरब के मीडिया में कैसे देखा जा रहा है?
मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन्स की हार को अरब के मीडिया में कैसे देखा जा रहा है?
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मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन्स की हार को अरब के मीडिया में कैसे देखा जा रहा है?

रिपब्लिकन पार्टी की हार को अरब और ईरानी मीडिया ने ट्रंप की नीतियों के प्रति जनमत संग्रह और भविष्य की अनिश्चितता के रूप में देखा है।

Quick Look

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार पर अरब और ईरानी मीडिया का विश्लेषण। इसे ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनमत, ईरान युद्ध के प्रभाव और राष्ट्रपति की सीमित होती शक्तियों के रूप में देखा जा रहा है।

AI-generated summary

Why It Matters

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इस हार को ईरान युद्ध और आर्थिक नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

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अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार अरब के देशों के लिए ख़ासा मायने रखती है.

इस चुनावी नतीजे का असर ट्रंप की मध्य-पूर्व की नीतियों पर भी पड़ेगा. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही कह चुके हैं कि ईरान पर हमले के कारण रिपब्लिकन पार्टी की हार हुई है.

ज़ाहिर है कि जेडी वेंस का यह 'क़बूलनामा' ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े करता है.

अरब के मीडिया में भी रिपब्लिकन पार्टी की हार को इसी रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, इस हार के आगे क्या परिणाम होंगे, इसे लेकर अलग-अलग मीडिया संस्थानों के नज़रिये में अंतर है.

कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे ट्रंप की राजनीति के ख़िलाफ जनता के स्पष्ट विरोध के तौर पर पेश किया है, जबकि अन्य ने कमज़ोर पड़ती राष्ट्रपति की शक्ति, कांग्रेस के साथ टकराव और मध्य-पूर्व के लिए बढ़ती अनिश्चितता पर ध्यान केंद्रित किया है.

महत्वपूर्ण बात यह है कि हर जगह चुनावी झटके को ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के ख़त्म होने के रूप में नहीं देखा जा रहा है.

यूएई के अंग्रेज़ी अख़बार द नेशनल ने अपने एक आर्टिकल में लिखा है, ''कांग्रेस पर नियंत्रण खोने से ट्रंप की वे राजनीतिक शक्तियां काफ़ी सीमित हो गई हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपने कार्यकाल के पहले दो वर्षों में कर रहे थे. उनके राजनीतिक अधिकार और प्रभाव गंभीर रूप से सीमित हो गए हैं.''

द नेशनल ने एक दूसरे विश्लेषण में लिखा है कि ट्रंप को अब डेमोक्रेट्स ईरान युद्ध और मध्य-पूर्व में एकतरफ़ा फ़ैसले नहीं लेने देंगे.

अख़बार का ध्यान सिर्फ़ इस बात पर नहीं है कि चुनाव किसने जीता, बल्कि इस पर भी है कि राष्ट्रपति की शक्तियां किस हद तक सीमित हो सकती हैं.

'अरब न्यूज़' ने ट्रंप की उस स्वीकारोक्ति को प्रमुखता दी, जिसमें उन्होंने माना कि ईरान युद्ध रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार की एक वजह बना.

अल-अरबी अल-जदीद ने लिखा है कि अमेरिकी मतदाता ट्रंप को सज़ा दे रहे हैं.

अल-अरबी अल-जदीद के लेख में मोहम्मद अल-बेदेवी इस चुनाव को सत्तारूढ़ पार्टी की सामान्य चुनावी हार के बजाय ट्रंप के ख़िलाफ़ मतदाताओं की व्यक्तिगत नाराज़गी और उन्हें मिली सज़ा के रूप में पेश करते हैं.

उनका तर्क है कि ट्रंप ने चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों के चयन के ज़रिए इस मुक़ाबले को अपने ऊपर जनमत संग्रह में बदल दिया. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को अपनी अलोकप्रिय नीतियों से जोड़ दिया.

रिपोर्ट में चुनावी नतीजों को ईरान युद्ध, ईंधन की बढ़ती क़ीमतों, टैरिफ़ और आर्थिक वादे पूरे न होने से जोड़ा गया है. इसमें रिपब्लिकन पार्टी की हार की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ प्रतिकूल चुनावी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि ट्रंप के फ़ैसलों पर भी डाली गई है.

भविष्य के संदर्भ में लेख का तर्क है कि इस हार के बाद ट्रंप या तो अपने रुख़ में नरमी ला सकते हैं या जवाबी कार्रवाई का रास्ता अपना सकते हैं.

लेख में जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के पीटर लोगे के हवाले से कहा गया है कि जब ट्रंप ख़ुद को घिरा हुआ महसूस करते हैं, तो वह और मुखर हो जाते हैं और हमले तेज़ कर देते हैं.

इसमें वीटो, कार्यकारी आदेशों और कांग्रेस की जांच को आने वाले टकराव के संभावित माध्यमों के रूप में देखा गया है.

इस विश्लेषण का खास पहलू है कि कांग्रेस में बहुमत गंवाने से सिर्फ़ ट्रंप की शक्तियां कम नहीं हो सकतीं, बल्कि यह भी बदल सकता है कि वे अपनी बची हुई शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करते हैं.

अल जज़ीरा अरबी ने राजनीति विज्ञानी जमाल कासमी का एक विश्लेषण प्रकाशित किया है. कासमी का तर्क है कि ट्रंप ने चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से हिस्सा लेकर और अपनी पसंद के वफ़ादार उम्मीदवारों पर ज़ोर देकर अपनी घटती लोकप्रियता को रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए नुकसानदेह बना दिया. वह चुनावी हार के पीछे तीन प्रमुख वजहें बताते हैं: चुनाव का ट्रंप के व्यक्तित्व और नेतृत्व पर केंद्रित हो जाना, टैरिफ़ के कारण पैदा हुआ आर्थिक असंतोष, ईरान युद्ध का महंगाई पर असर.

लेख में पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के 2006 के चुनाव प्रचार से तुलना की गई है. उस समय बुश ने कमज़ोर स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ प्रचार में अपेक्षाकृत कम सक्रियता दिखाई थी. कासमी का सुझाव है कि ट्रंप भी कमज़ोर उम्मीदवारों से कुछ दूरी बनाकर चुनावी नुक़सान को सीमित कर सकते थे.

कासमी का अनुमान है कि अब राजनीतिक ध्यान 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की ओर बढ़ेगा और ट्रंप के इर्द-गिर्द रहने वाली राजनीति कमज़ोर पड़ेगी.

अशरक अल-अवसत में राना अब्तर ने इस चुनाव को राजनीतिक अपमान या किसी नेता की व्यक्तिगत हार के बजाय संस्थागत शक्तियों के नज़रिये से समझने की कोशिश की है.

डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीतिकार निकोल ब्रेनर श्मिट्ज, रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व संचार अधिकारी डगलस हे और 'द गार्डियन' के डेविड स्मिथ के साथ बातचीत के आधार पर लेख में बताया गया है कि कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से क्या व्यावहारिक बदलाव आ सकते हैं.

महत्वपूर्ण बात यह है कि विशेषज्ञों ने इन शक्तियों और इस धारणा के बीच अंतर किया है कि डेमोक्रेट्स की पहली प्राथमिकता महाभियोग चलाना ही होगी. लेख में इसका दूसरा पहलू भी सामने रखा गया है. कांग्रेस पर नियंत्रण का मतलब यह नहीं है कि डेमोक्रेट्स नीतिगत फ़ैसलों पर भी पूरा नियंत्रण हासिल कर लेंगे.

सीनेट में मतदान की ज़रूरी प्रक्रिया, राष्ट्रपति का वीटो और कार्यकारी आदेशों की शक्ति डेमोक्रेट्स की संभावनाओं को सीमित कर सकती है. लेख एक रणनीतिक चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाता है. डेमोक्रेट्स के सामने सवाल होगा कि वे जवाबदेही तय करने को प्राथमिकता दें या 2028 से पहले आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार दिखाने की कोशिश करें.

अल-कुद्स अल-अरबी में नेसरीन मलिक ने उस तर्क को प्रस्तुत किया है कि चुनावी हार से ट्रंप कमज़ोर तो हो सकते हैं, लेकिन इससे उन संस्थाओं, नीतियों और राजनीतिक तौर-तरीक़ों का अंत नहीं होगा जिन्हें उनके शासनकाल में बढ़ावा मिला.

इसमें प्रवासियों को लेकर क़ानूनों को लागू करने की व्यवस्था, सरकारी एजेंसियों, टैरिफ़ और विदेश नीति में किए गए बदलावों को पलटने की कठिनाइयों पर ज़ोर दिया गया है.

यह लेख ट्रंप के शासन के एक दौर के अंत और उनके राजनीतिक प्रभाव के पूरी तरह ख़त्म होने के बीच अंतर करता है.

इसमें डेमोक्रेट्स की भी आलोचना की गई है. लेख में विपक्षी पार्टी के भीतर उसकी राजनीतिक पहचान, पीढ़ीगत बदलाव, प्रगतिशील उम्मीदवारों और इसराइल के मुद्दे पर मतभेदों का ज़िक्र है.

इसमें चेतावनी दी गई है कि ट्रंप को चुनाव में हराना और उनके मुक़ाबले एक मज़बूत के साथ टिकाऊ राजनीतिक विकल्प तैयार करना दो अलग-अलग बातें हैं.

रिपब्लिकन पार्टी अगर ट्रंप की राजनीति के प्रमुख मुद्दों को बनाए रखती है, तो उसका मुक़ाबला ऐसी डेमोक्रेटिक पार्टी से हो सकता है जो मुख्य रूप से ट्रंप के विरोध के आधार पर एकजुट है.

इस विश्लेषण का खास पहलू है कि ट्रंप की चुनावी हार को ट्रंपवाद के निर्णायक अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

ईरान के मीडिया में कैसे देखा जा रहा है? एक तरफ़ ट्रंप की चुनावी हार को ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध की वजह से मिली राजनीतिक सज़ा के रूप में पेश किया जा रहा है. दूसरी तरफ़ कुछ विश्लेषणों में चेतावनी दी गई है कि कमज़ोर पड़ने के बावजूद ट्रंप ईरान के साथ टकराव का रास्ता अपना सकते हैं.

तेहरान टाइम्स में एहसान एतेसाम चुनावी नतीजों को इस बात का संकेत मानते हैं कि ट्रंप की विदेश नीति से जुड़े फ़ैसले अब रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनावी बोझ बनते जा रहे हैं.

उनका विश्लेषण ट्रंप के उस वादे और ईरान के साथ लंबे समय तक चले टकराव के बीच विरोधाभास पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने महंगे युद्धों से अमेरिका को दूर रखने की बात कही थी.

लेख में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी इसराइल के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करेगी. इसमें ईरान युद्ध को ऐसा मुद्दा बताया गया है, जो सिर्फ़ एक राष्ट्रपति को नुक़सान पहुँचाने के बजाय पूरी पार्टी की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है.

हालांकि, लेखक यह भी स्वीकार करते हैं कि रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे सिर्फ़ ईरान युद्ध ही एकमात्र वजह नहीं था.

लेख ट्रंपवाद के ख़त्म होने की भविष्यवाणी नहीं करता. इसमें रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच ट्रंप के लगातार बने हुए प्रभाव और राष्ट्रपति के साथ सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी शक्तियों को भी स्वीकार किया गया है.

ईरानी मीडिया की कवरेज में एक तरफ़ अमेरिकी चुनावी नतीजों को ट्रंप की ईरान नीति के ख़िलाफ़ जनमत के रूप में पेश किया जा रहा है. दूसरी तरफ़ कुछ विश्लेषण यह भी स्वीकार करते हैं कि चुनावी हार के बावजूद अमेरिका की विदेश नीति में तत्काल बदलाव की गारंटी नहीं है.

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ईरानी मीडिया में भी चुनावी नतीजों को लेकर सिर्फ़ जश्न का नज़रिया नहीं है. कुछ विश्लेषण अमेरिकी कांग्रेस की भूमिका और ट्रंप की सीमित होती राजनीतिक ताक़त पर ध्यान देते हैं, जबकि अन्य चेतावनी देते हैं कि कमज़ोर राष्ट्रपति भी ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य या आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है.

What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • ट्रंप अपने राजनीतिक रुख में नरमी ला सकते हैं या आक्रामक जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।

    Possible · Within months

Open Questions

  • क्या ट्रंप अपनी विदेश नीति में बदलाव करेंगे?
  • डेमोक्रेट्स कांग्रेस में अपनी शक्तियों का उपयोग कैसे करेंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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