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होर्मुज़ स्ट्रेट के बाद अब ईरान का रेड सी की एंट्री बाब अल-मंदेब पर भी वर्चस्व
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होर्मुज़ स्ट्रेट के बाद अब ईरान का रेड सी की एंट्री बाब अल-मंदेब पर भी वर्चस्व

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हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर 130 किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, जिससे ईरान समर्थित समूह का बाब अल-मंदेब और होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत हुआ है, जो वैश्विक तेल व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग हैं।

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Why It Matters

हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर तेजी से आगे बढ़ते हुए लगभग 130 किलोमीटर तटरेखा पर कब्जा कर लिया है, जिससे ईरान समर्थित समूह का बाब अल-मंदेब और होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत हुआ है।

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होर्मुज़ स्ट्रेट के बाद अब ईरान का रेड सी की एंट्री बाब अल-मंदेब पर भी वर्चस्व

Author, पॉल एडम्स

पदनाम, राजनयिक संवाददाता

प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

tिहामा के दक्षिणी हिस्सों में ईरान समर्थन हूतियों की तेज़ी से बढ़त ने ज़्यादातर पर्यवेक्षकों को हैरान कर दिया है. तिहामा यमन का शुष्क तटीय इलाक़ा है.

हाल तक हूतियों के विरोधी गठबंधन, नेशनल रेज़िस्टेंस का यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण था. लेकिन कुछ ही दिनों में इसका बड़ा हिस्सा हूतियों के क़ब्ज़े में चला गया है.

कुछ अनुमानों के मुताबिक़, ईरान समर्थित विद्रोहियों ने यमन की रणनीतिक रूप से अहम तटरेखा के क़रीब 130 किलोमीटर हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

यह कई वर्षों में हूतियों की सबसे बड़ी सैन्य कामयाबी है. इससे साबित होता है कि 12 साल से चल रहे गृहयुद्ध, सऊदी अरब के विनाशकारी हवाई हमलों के अलावा अमेरिका, इसराइल और ब्रिटेन की सेनाओं के हमलों के बावजूद हूती अब भी एक ऐसी ताक़त हैं, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

हूती अपने विरोधियों को हैरान और हतोत्साहित कर चुके हैं और इतनी जल्दी उन्हें इस इलाक़े से पीछे हटाना मुश्किल लगता है.

इस वजह से हूतियों को जल्द बेदखल किए जाने की संभावना भी नहीं है.

हूती सिर्फ़ ईरान की कठपुतली नहीं

ब्रसल्स स्थित यूरोपियन इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के वरिष्ठ विश्लेषक हिशाम अल-ओमेसी ने बीबीसी से कहा, "अब जब वे वहाँ पहुँच गए हैं, तो वे अपनी पकड़ मज़बूत कर लेंगे. और उन्हें वहाँ से हटाना काफ़ी महंगा पड़ेगा."

बेशक, हूती अकेले नहीं हैं. उन्हें ईरान का समर्थन हासिल है. ईरान के लिए यह समर्थन अब और भी अहम हो गया है, क्योंकि उसके तथाकथित "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" के दूसरे हिस्सों को हाल के दिनों में झटके और हार का सामना करना पड़ा है.

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इनमें लेबनान का हिज़्बुल्लाह, ग़ज़ा में हमास और सीरिया में असद सरकार शामिल हैं.

अल-ओमेसी ने कहा, "इसलिए उन्होंने अपना समर्थन हूतियों की ओर मोड़ दिया. निश्चित तौर पर हूतियों को इस समर्थन की ज़रूरत है."

हालांकि ज़्यादातर विश्लेषक इस बात से सहमत हैं कि हूतियों को सिर्फ़ ईरान की कठपुतली बताना सही नहीं होगा. पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने एक नई और असहज हक़ीक़त सामने ला दी है.

अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान पर बड़े पैमाने पर संयुक्त हमला शुरू किए जाने के सात महीने बाद अब ईरान की सरकार का दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री मार्गों पर वर्चस्व हो चुका है.

इनमें फ़ारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज़ स्ट्रेट और लाल सागर का प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब शामिल हैं. बाब अल-मंदेब के रास्ते ही स्वेज नहर तक पहुँचा जाता है.

लंदन स्थित थिंक टैंक चैटथम हाउस के रिसर्च फेलो फारेआ अल-मुसलिमी कहते हैं, "अब ईरान का सीधे तौर पर और अपने सहयोगी संगठनों के ज़रिए मध्य-पूर्व और दुनिया के दो सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर नियंत्रण है. इन रास्तों से दुनिया के 35 फ़ीसदी से ज़्यादा ईंधन और तेल का कारोबार होता है."

वे कहते हैं, "यह किसी परमाणु बम जितना बड़ा दबाव बनाने वाला हथियार है.''

अमेरिकी दख़ल की संभावना कम

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अगर हूतियों ने लाल सागर में पेरिम समेत कई अहम द्वीपों पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है, तो अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही में दखल देने की उनकी क्षमता काफ़ी बढ़ जाएगी. पेरिम बाब अल-मंदेब के सबसे संकरे हिस्से के बीचोंबीच स्थित है.

ग़ज़ा में इसराइल के युद्ध के बाद हूतियों की गतिविधियों से यह साबित हो चुका है कि लाल सागर से गुज़रने वाले जहाज़ हूतियों की मिसाइलों, ड्रोन और छोटे हमलावर नौकाओं के हमलों के लिहाज़ से बेहद असुरक्षित हैं.

यमन विशेषज्ञ इओना क्रेग ने शुक्रवार को बीबीसी रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में कहा, "वे इन क्षेत्रीय लाभों के बिना भी बाब अल-मंदेब से आने-जाने वाले लोगों और स्वेज की ओर जाने वाले लोगों को नियंत्रित करने में सक्षम थे."

"लेकिन अब वे बाब अल-मंदेब के ठीक सामने के इलाक़े पर नियंत्रण रखते हैं और इससे उन्हें कहीं ज़्यादा दबाव बनाने की ताक़त मिल गई है."

शिपिंग कंपनियां शुक्रवार दोपहर जारी हूती सेना के उस बयान पर शायद ही भरोसा करेंगीं, जिसमें कहा गया था कि समुद्री रास्तों से आवाजाही "सभी कंपनियों के लिए सुरक्षित है, सिवाय सऊदी जहाज़ों के, जिन पर पहले ही नाकाबंदी लागू है."

अपने पहले के हमलों में हूतियों ने कहा था कि वे केवल इसराइल से जुड़े जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं.

लेकिन वास्तव में उन्होंने ऐसे जहाज़ों पर भी हमला किया, जिनका इसराइल से कोई संबंध नहीं था. इनमें नॉर्वे के झंडे वाला एक तेल टैंकर भी शामिल था.

हालांकि, क्रेग का कहना है कि हूती अंधाधुंध हमलों से बच सकते हैं, क्योंकि उन्हें ऑपरेशन रफ राइडर दोहराए जाने का डर होगा.

2025 की गर्मियों में अमेरिका ने छह हफ्तों तक बड़े पैमाने पर हवाई और नौसैनिक हमले किए थे.

उन्होंने कहा, "वे पहले ही अमेरिका का ग़ुस्सा झेल चुके हैं."

लेकिन क्या अमेरिका फिर भी इस मामले में शामिल होना चाहेगा?

ईरान के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का युद्ध पहले ही अलोकप्रिय है. तेल की क़ीमतें फिर धीरे-धीरे बढ़ रही हैं.

ऐसे में लगता नहीं एक नया मोर्चा खोलने से उनकी लोकप्रियता या नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में उनकी रिपब्लिकन पार्टी की संभावनाओं में कोई ख़ास सुधार होगा.

यमन के लोगों की ज़िंदगी और मुश्किल होगी

एक्सियोस वेबसाइट के मुताबिक़ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ओर से अमेरिका से हस्तक्षेप की अपील का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.

एक्सियोस लिखता है कि अमेरिका "यमन में बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंतित है और सऊदी अरब के लिए अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन साथ ही सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहता है."

लेकिन सऊदी अरब में चिंता की वजह सिर्फ बाब अल-मंदेब के लिए संभावित ख़तरा नहीं है.

सैटलाइट तस्वीरों में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमले के संकेत मिले हैं.

यह पाइपलाइन इस साल की शुरुआत में होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने के बाद तेल निर्यात के लिए एक अहम वैकल्पिक रास्ता है.

इन तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ईरान के यमनी सहयोगी, ईरान पर अमेरिका और इसराइल के युद्ध से पैदा हुए आर्थिक दबाव को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

भले ही ईरान ने सीधे तौर पर इस हमले का आदेश न दिया हो, लेकिन इसका फ़ायदा उसे स्पष्ट रूप से होगा.

लंदन स्थित रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता और विश्लेषक बराआ शैबान का कहना है कि हाल में लड़ाई में आई तेज़ी की शुरुआत जुलाई में हुई थी.

2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम के बाद यह अब तक की सबसे भीषण लड़ाई है.

उनके मुताबिक, इसकी शुरुआत तब हुई जब हूतियों का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौटा.

यमन एक बार फिर पूरी तरह युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है. सऊदी अरब लाल सागर तक अपने आर्थिक जीवन-मार्ग को सुरक्षित रखने को लेकर चिंतित है और डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में शामिल होने से हिचकते दिख रहे हैं.

ऐसे में ईरान के साथ अमेरिका का संघर्ष अब एक नए और संभावित रूप से ख़तरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.

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What to Watch

AI outlook — possibilities, not facts

  • सऊदी अरब और संयुक्त राज्य बाब अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण का मुकाबला करने के लिए संयुक्त नौसैनिक अभियान शुरू कर सकते हैं।

    Possible · Within months

  • हूती अपने नए अधिग्रहीत क्षेत्रों का उपयोग लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर दबाव बढ़ाने के लिए करेंगे, जिससे वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

    Likely · Within weeks

Open Questions

  • क्या अमेरिका और उसके सहयोगी बाब अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण का मुकाबला करने के लिए सैन्य कार्रवाई करेंगे?
  • हूती अपने नए अधिग्रहीत क्षेत्रों पर कितनी देर तक नियंत्रण बनाए रख पाएंगे?
  • ईरान का इस क्षेत्रीय विस्तार पर उसके परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव पर क्या असर पड़ेगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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