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Backशी जिनपिंग को ट्रंप ने दिया भव्य स्वागत, लेकिन नहीं मिला वह सब जो चीन चाहता था
शी जिनपिंग को ट्रंप ने दिया भव्य स्वागत, लेकिन नहीं मिला वह सब जो चीन चाहता था
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BBC हिंदी11 hours agoPolitics4 min readIndia

शी जिनपिंग को ट्रंप ने दिया भव्य स्वागत, लेकिन नहीं मिला वह सब जो चीन चाहता था

Quick Look

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता हुई। भव्य स्वागत के बावजूद, चीन व्यापार, ताइवान और एआई जैसे प्रमुख मुद्दों पर अपनी उम्मीदों के अनुरूप ठोस परिणाम हासिल करने में विफल रहा।

AI-generated summary

Why It Matters

चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और ताइवान के मुद्दों पर लंबे समय से तनाव चल रहा है। शी जिनपिंग अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में मंदी और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली शिखर बैठकों का एक साफ़ लक्ष्य है.

चीन का मानना है कि अमेरिका एक महाशक्ति के रूप में उसके उदय को रोकने की कोशिश कर रहा है और वह चाहता है कि वॉशिंगटन उसके रास्ते से हट जाए. ख़ासकर व्यापार, टेक्नोलॉजी और ताइवान के मामले में.

हालांकि, इस यात्रा के दौरान ट्रंप की ओर से शी जिनपिंग लिए भव्य स्वागत आयोजित किए जाने के बावजूद, चीन के नेता को वह सब कुछ नहीं मिला जो वह चाहते थे.

ट्रेड वॉर में संघर्षविराम को केवल कुछ महीनों के लिए बढ़ाया गया यानी नवंबर से जनवरी तक. जब ट्रेड वॉर रोकने की सहमति बनी थी तो दोनों देशों ने एक-दूसरे पर लगाए जा रहे टैरिफ़ वॉर को रोक दिया और इससे आगे तनाव नहीं बढ़ा.

चीन को कम से कम एक साल की उम्मीद थी क्योंकि शी जिनपिंग ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी बचे समय को किसी तरह काटने की कोशिश कर रहे हैं.

इसका मतलब यह है कि टैरिफ़, रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति में चीन के दबदबे और उन्नत अमेरिकी चिप्स तक पहुंच से जुड़े प्रमुख विवादों को बातचीत के एक और दौर के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है.

इससे पता चलता है कि अमेरिका चाहता है कि चीन लंबी अवधि की रियायतें देने से पहले समझौते के अपने हिस्से को पूरा करने के लिए और अधिक प्रयास करे.

शी जिनपिंग के लिए कड़वी सच्चाई यह है कि उनकी घरेलू अर्थव्यवस्था संकट में है. देश भले ही विश्वभर में रिकॉर्ड मात्रा में सामान बेच रहा है, लेकिन घरेलू उपभोक्ता खरीदारी में कंजूसी कर रहे हैं.

युवा बेरोज़गारी का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है और संपत्ति की क़ीमतें गिर गई हैं, जबकि देश में 80% लोग अपने घरों के मालिक हैं.

व्यापार दरअसल विकास को गति देने में सहायक है, जिससे विदेशी बाज़ारों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

शी जिनपिंग को इन निर्यातों को उन नुकसानदेह टैरिफ़ से बचाना होगा जो अमेरिका ने पिछले साल लगाए थे.

ताइवान के मुद्दे पर, शी जिनपिंग ने एक बार फिर साफ़ कर दिया कि ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री चीन के लिए एक लक्ष्मण रेखा है.

अमेरिका क़ानून के तहत, इस स्वशासित द्वीप को अपनी रक्षा करने के साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है.

मई में, शी जिनपिंग ने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि इस मुद्दे को ग़लत तरीक़े से हैंडल करने से दोनों देशों के बीच 'टकराव या यहां तक कि संघर्ष' हो सकता है.

इसके बाद ट्रंप ने ताइवान के लिए 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की मंजूरी को टाल दिया और इसे 'एक बहुत अच्छी बातचीत का ज़रिया' करार दिया.

शी जिनपिंग ने वार्ता के दौरान इस मौके का लाभ उठाया होगा और संभवतः यह तर्क दिया होगा कि ताइवान के लिए समर्थन को सीमित करने से संघर्ष का ख़तरा कम हो जाता है.

गुरुवार को उन्होंने अपनी इस उम्मीद को दोहराया कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने के 'सही रुख़' पर कायम रहेगा.

हालांकि, ताइवान को अमेरिकी समर्थन जारी रखने के लिए चौतरफ़ा दबाव का सामना कर रहे ट्रंप ने अभी तक चीनी नेता की टिप्पणियों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

दोनों नेताओं ने कम से कम आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर चर्चा तो की, हालांकि यह साफ़ नहीं है कि वे किसी सुरक्षा उपाय पर सहमत हुए या नहीं.

सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या वे एआई पर कोई ठोस निर्णय लेंगे - जैसे कि शिखर सम्मेलन आयोजित करने का समझौता.

क्योंकि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई के विकास को धीमा करने की मांग करते हुए एक लेख लिखा था ताकि इसे सुरक्षित बनाया जा सके.

इसके बाद कंपनी के एक शीर्ष सिक्योरिटी रिसर्चर ने चेतावनी दी थी कि एआई के कारण मानव जाति के विलुप्त होने की '10% से अधिक संभावना' है.

लेकिन शी जिनपिंग द्वारा एआई को 'हमेशा इंसानी नियंत्रण में रखने' के महत्व के बारे में बात करने के अलावा हमें और कुछ ख़ास जानकारी नहीं मिली.

ट्रंप ने हाल ही में इस तकनीक से मानव जाति के विलुप्त होने के डर को 'झूठा' बताकर ख़ारिज कर दिया है.

और हां, पांडा को भी नहीं भूलना चाहिए. पिंग पिंग और फू शुआंग को अटलांटा को उपहार स्वरूप देने की घोषणा सबसे पहले अप्रैल में की गई थी, लेकिन शी जिनपिंग ने अब घोषणा की है कि चीन की पांडा कूटनीति के फिर से शुरू होने के साथ ही वे कुछ ही दिनों में पहुंच जाएंगे.

शुक्रवार को दोनों के चाय पर मुलाक़ात और राष्ट्रीय आर्काइव का दौरा करने की तैयारियों के दौरान और भी घोषणाएं हो सकती हैं.

लेकिन फ़िलहाल, बीजिंग के लिए शिखर सम्मेलन की सबसे बड़ी जीत में से एक शायद इसकी छवि का सकारात्मक पहलू रहा है.

भव्य स्वागत, हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत आगवानी और तिल से ढकी सी बास मछली और धीमी आंच पर पके बेबी बोक चॉय से सजे राजकीय भोज की चीन के लोगों ने सराहना की है.

इससे चीन में शी जिनपिंग की छवि ट्रंप के समकक्ष के रूप में मजबूत हुई है.

दोनों नेताओं की तुलना करने वाले मीम्स चीनी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हैं.

एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें आगवानी के समय बमवर्षक विमानों के ऊपर से उड़ते समय ट्रंप का चेहरा थोड़ा खिंचा हुआ दिखाई देता है, जबकि शी जिनपिंग भावहीन बने रहते हैं.

शी जिनपिंग ने दुनिया के सबसे अप्रत्याशित नेताओं में से एक को हैंडल का तरीका खोज लिया है.

लेकिन जहां ट्रंप 'वास्तव में महान मित्रता' की बात करते हैं, वहीं चीन के नेता का ध्यान इससे कहीं बड़े लक्ष्य पर केंद्रित है- महाशक्ति के रूप में अमेरिका के साथ चीन का स्थान सुरक्षित करना.

पांडा, भव्य आयोजन और मीठे बोल शायद इस रिश्ते को सुधारने में मदद करें.

लेकिन इस तमाशे के पीछे, दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के बीच प्रतिस्पर्धा पहले की तरह ही भयंकर बनी हुई है.

Open Questions

  • क्या अमेरिका भविष्य में ताइवान को हथियार पैकेज की मंजूरी देगा?
  • एआई सुरक्षा उपायों पर दोनों देश किसी ठोस समझौते पर पहुंचेंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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