
क्या केवल 30 सेकंड की छोटी गतिविधियां आपके मूड और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती हैं? शोध के अनुसार, माइक्रोप्रैक्टिस तनाव कम करने में प्रभावी हो सकती हैं।
बीबीसी की स्वास्थ्य संवाददाता मेलिसा होगेनबूम ने तनाव कम करने के लिए 'माइक्रोप्रैक्टिस' का विश्लेषण किया है। शोध बताते हैं कि लाफ्टर योग, माइक्रो योग, गहरी सांस लेने की तकनीक और स्वयं के प्रति दयालु स्पर्श जैसी छोटी गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को बेहतर बना सकती हैं।
AI-generated summary
अध्ययन बताते हैं कि छोटी और आसान गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर को बेहतर बना सकती हैं। इन्हें 'माइक्रोप्रैक्टिस' कहा जाता है, जिन्हें बहुत कम समय में पूरा किया जा सकता है।
अगर आप ख़ुद को बहुत दबाव में महसूस कर रहे हैं, तो मूड को ठीक करने के लिए कुछ बहुत छोटी और आसान "माइक्रोप्रैक्टिस" अपनाने पर विचार कर सकते हैं.
मैं एक शोधकर्ता के साथ वीडियो कॉल पर हूं और बेक़ाबू होकर हंस रही हूं. मेरा चेहरा सिकुड़ गया है और पेट में दर्द हो रहा है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि मैं हंसना बंद नहीं कर पा रही हूं. मैं नीदरलैंड्स के डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता नताली वान डर वाल से बात कर रही हूं. हम "लाफ़्टर योग" के एक छोटे से सेशन में हिस्सा ले रहे हैं. पारंपरिक योग की तरह इसकी शुरुआत भी सांस लेने की एक कसरत से होती है. इसके बाद आपको बनावटी हंसी हंसने के लिए कहा जाता है. वान डर वाल कहती हैं, "कुछ देर बाद यह अक्सर असली हंसी में बदल जाती है."
सुबह 5 बजे होने वाले मेडिटेशन सेशन से लेकर सर्दियों में बर्फ़ जैसे ठंडे पानी में तैरने तक और आजकल के कई सेल्फ़-केयर ट्रेंड तक, ये काफ़ी समय लेने वाले हो सकते हैं. लेकिन अब कई अध्ययनों से पता लगा है कि मन को ठीक करने के लिए ये सब करना ज़रूरी नहीं है. इस बात के बढ़ते प्रमाण हैं कि छोटी और आसान गतिविधियां हमारे मूड, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर को बेहतर बना सकती हैं. 'माइक्रोप्रैक्टिस' किताब के लेखक एली सुसमैन का कहना है कि इनमें से कुछ गतिविधियां केवल 30 सेकंड में भी की जा सकती हैं. इन्हें ही "माइक्रोप्रैक्टिस" कहा जाता है.
लाफ़्टर योग का मक़सद बिना किसी मज़ाक के हंसी शुरू करना होता है. इसमें आप हंसते हैं, लेकिन हंसने की वजह कोई चुटकुला या मज़ाक नहीं होता. शुरुआत में मेरी बनावटी हंसी थोड़ी अजीब लगी. लेकिन यह एहसास ज़्यादा देर तक नहीं रहा. फिर हंसी वाले सेशन के बाद मैं काफ़ी ज़्यादा ख़ुशमिज़ाज और अच्छा महसूस कर रही थी. हमारी बातचीत भी बहुत सहजता से चलने लगी. जब मैंने वान डर वाल को यह बताया, तो वह फिर से हंसने लगीं. उन्होंने बताया कि लाफ़्टर योगा सेशन के बाद उन्हें अक्सर लगता है कि प्रतिभागियों के साथ दोस्ती करना आसान हो जाता है. मैंने ख़ुद को इतना शांत महसूस किया कि मुझे खुद पर हैरानी हुई. इस बात की पुष्टि शोध से भी होती है. कई अध्ययनों के विश्लेषण वाले एक मेटा एनालिसिस में वान डर वाल ने पाया कि बिना मज़ाक वाली हंसी, अवसाद और चिंता कम करने में मज़ाक से पैदा हुई हंसी की तुलना में लगभग दोगुनी असरदार होती है.
अगर अकेले या आईने के सामने हंसना आपको अच्छा नहीं लगता, तो एकाग्रता के साथ स्ट्रेचिंग करके देखिए. सुसमैन इसे "माइक्रो योग" कहते हैं. यह अभ्यास ख़ास तौर पर उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद है जो घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठकर काम करते हैं. सुसमैन ने मुझे बताया कि योग का यह आसान अभ्यास लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के असर को कम करने में मदद कर सकता है. अक्सर स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठने पर हम झुकी हुई मुद्रा अपना लेते हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने मुझे हल्की स्ट्रेचिंग करने का तरीक़ा बताया. इससे मेरी गर्दन का तनाव कम हुआ और मैं अपनी बैठने की मुद्रा के बारे में ज़्यादा सोचने लगी. एक अध्ययन में पाया गया कि हर 15 मिनट में केवल 15 से 30 सेकंड तक स्ट्रेचिंग करने से काम करने की क्षमता में लगभग 15 फ़ीसदी सुधार हुआ. हालांकि यह पूरी तरह योग नहीं है. लेकिन दूसरे शोध बताते हैं कि जब स्ट्रेचिंग के साथ गहरी सांसें और एकाग्रता को जोड़ा जाता है, तो मानसिक तनाव कम करने में इसका असर ज़्यादा हो सकता है.
अगर आप तनाव में हैं या चिंता महसूस कर रहे हैं, तो ऐसे बहुत से प्रमाण हैं जो बताते हैं कि एकाग्रता के साथ की जाने वाली सांस लेने की कसरत तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद कर सकती है. शरीर की प्रक्रिया के स्तर पर देखें, तो धीमी और गहरी सांसें लेने से "लड़ो या भागो" वाली प्रतिक्रिया कम हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इससे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है. इसे शरीर की "आराम करो और भोजन पचाओ" वाली अवस्था माना जाता है. हाल में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि तीन धीमी और गहरी सांसें लेने से मस्तिष्क में अल्फ़ा तरंगें बढ़ गईं. अल्फ़ा तरंगें शांति और एकाग्र ध्यान से जुड़ी होती हैं.
काफ़ी समय से यह समझा जाता रहा है कि स्पर्श हमारे लिए फ़ायदेमंद होता है. हालांकि किसी दूसरे इंसान के स्पर्श की जगह लेना आसान नहीं है. लेकिन सुसमैन और उनके सहयोगियों के एक अध्ययन में पाया गया कि केवल 20 सेकंड में किए गए "ख़ुद को सुकून देने वाले स्पर्श" के एक आसान अभ्यास से भी लंबे समय तक फ़ायदा मिल सकता है. अध्ययन में प्रतिभागियों ने अपने हाथ दिल और पेट पर रखे. साथ ही उन्होंने अपने बारे में दयालु और सकारात्मक विचार सोचे. जिन लोगों ने केवल 20 सेकंड तक यह अभ्यास किया, उनके शरीर में तनाव से जुड़ा हार्मोन कॉर्टिसोल नियंत्रण समूह की तुलना में काफ़ी कम पाया गया. सुसमैन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि हमें ख़ुद के प्रति दयालु होना चाहिए.
याद रखें कि आपको हर उपाय आज़माने की ज़रूरत नहीं है. ज़रूरी यह है कि आप ऐसा कोई तरीका चुनें जो आपकी जीवनशैली के साथ मेल खाता हो. "वही करें जो आपको अच्छा महसूस कराए." जैसे चलते समय या बर्तन धोते हुए गहरी सांस लेना. इससे आपकी मानसिक सेहत बेहतर हो सकती है. साथ ही तनाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.

Influenced by unrealistic standards of 'glass skin' on social media, teens are adopting complex skincare routines. According to dermatologists Dr. Jonathan Kentley and Dr. Zainab Laftah, this can damage the protective layer of the skin. Experts recommend simple routines and professional advice.

Changes in the brain can begin 10-20 years before Alzheimer's symptoms appear, so it's important to focus on exercise, a balanced diet, mental activities, and social relationships from a young age to maintain brain health.

More than 300 Muslim women train daily at an exclusive gym run by Shabana in Coimbatore's Saramedu area, defying social restrictions and family hesitations to improve their health and confidence.

Researchers at Aberystwyth University have conducted a study on the health effects of kombucha. The drink is promoted for gut health, but research suggests its effects on reducing stress are limited. Experts have advised its consumption with a balanced diet.
India's Ministry of Health and Family Welfare has proposed draft amendments to Drugs Rules, 1945, requiring four prominent boxed warnings on levonorgestrel-based emergency contraceptive pills (0.75 mg and 1.5 mg) stating they are for emergency use only, not regular contraception, not abortion pills, and not protection against HIV or STIs, with cautions about side effects from frequent use and advice to seek regular contraception from health facilities.
A sharp rise in dengue cases across Bangladesh has overwhelmed hospitals in Dhaka, forcing facilities to treat patients on floors and verandas due to severe bed shortages. Over 747 new patients were admitted in a 24-hour period, bringing total hospitalizations this year to 59,147.