
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 389 लोगों की मौत हो चुकी है और 910 लोग लापता हैं, जिनमें कई देशों के नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
नेपाल में बाढ़ के कारण 389 लोगों की मौत हो गई है और 910 लोग लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक, नेपाल सेना और पुलिस के कर्मी शामिल हैं। भारत और चीन समेत कई देश राहत कार्यों में जुटे हैं।
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नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कई लोग लापता हैं।
नेपाल पुलिस ने ताजा अपडेट में बताया है कि बाढ़ के बाद देश में अब तक 389 लोगों की मौत हो चुकी है.
वहीं नेपाल की नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक़ बाढ़ के बाद 910 लोग लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
इन लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक, नेपाल सेना के 44 सदस्य और नेपाल पुलिस के 28 अधिकारी शामिल हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि नेपाल में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. मंत्रालय ने बताया कि त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है. इससे पहले तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है.
इससे पहले गुरुवार को ही नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा था कि अमेरिका के 54, ऑस्ट्रेलिया के 34 और ब्रिटेन के 33 नागरिक भी लापता हैं.
एनडीआरआरएमए के मुताबिक़ लापता लोगों में सुरक्षाबलों के जवान, पर्यटक और आम नागरिक शामिल हैं. कई इलाक़ों तक पहुंचने वाली सड़क और पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं.
जैसे-जैसे प्रभावित इलाक़ों में राहत का काम आगे बढ़ रहा है, नेपाल में इस तबाही से हुए नुक़सान की तस्वीर भी सामने आ रही है.
इस बीच दुनिया के कई देशों ने नेपाल में आई इस त्रासदी पर शोक जताया है. वहीं भारत समेत दुनिया के कई देश नेपाल के लिए राहत सामग्री भी भेज रहे हैं.
भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों ने क्या कहा
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल की बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है.
उनके मुताबिक़ ये लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं.
रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया है कि नेपाल में बाढ़ आने के बाद से वहां मौजूद 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. प्रेसवार्ता के बाद शाम को मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि अब कुल 285 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है.
प्रवक्ता ने बताया था कि इनमें से 73 लोग 'त्रिशूली-1' पावर प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे थे. गुरुवार शाम को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि त्रिशूली-1 से 63 भारतीयों को रेस्क्यू किया जा चुका है.
नेपाल में भारतीय दूतावास इस प्रोजेक्ट के प्रमुख से लगातार संपर्क में है.
रणधीर जायसवाल के मुताबिक़, "इनके अलावा कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए तमिलनाडु के दो ग्रुपों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. इनमें से एक ग्रुप में 37 और दूसरे में 49 भारतीय हैं. जबकि पश्चिम बंगाल के 32 लोगों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है. जो बाढ़ से प्रभावित रसुआ ज़िले के तिमुरे में थे."
उन्होंने बताया है कि भारत के अलग-अलग राज्यों के 61 अन्य लोगों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनमें 33 केरल से हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया है कि इस बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए क़रीब 200 भारतीय चीन की तरफ भी फंसे हुए हैं.
उधर चीन ने कहा है कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद उसके क़रीब 100 नागरिक लापता हैं.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के अनुसार, चीन नेपाल के साथ क़रीबी संपर्क बनाए हुए है. वह खोज और बचाव के संयुक्त अभियान में मदद कर रहा है. उन्होंने कहा कि चीन नेपाल की जरूरत के आधार पर आपातकालीन सहायता भी देगा.
चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भूस्खलन की घटना में लापता लोगों की संख्या बढ़कर 558 हो गई है, जिसमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं.
तमिलनाडु के 37 पर्यटकों का अब तक पता नहीं
तमिलनाडु सरकार के अनुसार, नेपाल गए 57 पर्यटकों में से 37 के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है. बताया जा रहा है कि ये पर्यटक हिमालय स्थित एक मंदिर की ओर जा रहे थे.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अलावा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं.
हालांकि, नेपाल में संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने के कारण प्रभावित भारतीय नागरिकों के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आ सकी है.
कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन ने भी दावा किया है कि उसके 80 सदस्य नेपाल के एक इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद थे और बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि फ़ाउंडेशन के 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं.
बाढ़ में अपने समूह के 80 लोगों के लापता होने के बाद सद्गुरु ने संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से घटनास्थल पर जाने की अनुमति देने की अपील की है.
तमिलनाडु सरकार में मंत्री राजमोहन ने विधानसभा में कहा, "हम हालात पर नज़र बनाए हुए हैं और राज्य के सभी पर्यटकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास कर रहे हैं. हम नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में हैं."
पश्चिम बंगाल के 32 यात्रियों से संपर्क टूटा
पीटीआई ने पश्चिम बंगाल के एक अधिकारी के हवाले से बताया, कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के बाद लापता लोगों में शामिल है. दल में 30 यात्री और दो टूर मैनेजर हैं.
अधिकारी ने बताया कि बाढ़ आने के बाद से दल के सभी 32 सदस्यों से कोई संपर्क नहीं हुआ है. राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में अभियान चला रही हैं.
चीन के सरकारी मीडिया आउटलेट सीसीटीवी ने नेपाल से सटे तिब्बत की ओर एक ट्रेड हब पर कीचड़ और पानी की बाढ़ से "बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने" की ख़बर दी है.
ग्यिरोंग काउंटी के बॉर्डर पोस्ट पर तबाही का मंज़र सीसीटीवी फ़ुटेज में साफ़ दिख रहा है. इस पोस्ट से व्यापार होता है और श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भी जाते हैं.
नेपाल को भारतीय मदद
नेपाल में आई बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए भारत ने दूसरी राहत उड़ान रवाना कर दी है.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसका वीडियो साझा किया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत नेपाल में राहत कार्यों के लिए हर संभव मदद करता रहेगा.
एस जयशंकर ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, "दूसरी उड़ान अभी रवाना हुई है, जिसमें नेपाल के लिए 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाने के पैकेट भेजे गए हैं. भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है."
उन्होंने लिखा, "हम राहत कार्यों में हर संभव मदद करते रहेंगे."
इससे पहले राहत और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए भारत ने 10 टन मानवीय मदद भेजी थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार देर रात को बताया था कि भारत की ओर से भेजी गई यह सहायता नेपाल को सौंप दी गई है.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार "नेपाल को हर तरह की मानवीय मदद देने के लिए तैयार है."
रेड क्रॉस ने कहा-नेपाल में हालात गंभीर
नेपाल में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख डेविड फिशर ने कहा है कि बुधवार को आई बाढ़ से प्रभावित इलाक़ों में "अभी भी बेहद गंभीर स्थिति" बनी हुई है.
उन्होंने बीबीसी के '5 लाइव ब्रेकफ़ास्ट' कार्यक्रम से बातचीत में कहा कि नेपाल के उत्तरी हिस्से के कुछ इलाक़ों में "सिर्फ हेलीकॉप्टर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है, क्योंकि बाढ़ ने पुलों और सड़कों को तबाह कर दिया है."
उन्होंने कहा, "हमारी टीम वहां से कुछ दक्षिण में ज़मीन पर मौजूद है और वह स्थानीय वोलंटीयर्स से संपर्क करने के लिए वहां तक पहुंचने में सफल रही है."

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में पानी और मिट्टी के बहाव के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ है। नेपाल में मरने वालों की संख्या 489 तक पहुंच गई है और 900 से अधिक लोग लापता हैं। चीनी अधिकारियों ने बांध टूटने की खबरों को खारिज करते हुए इसे पानी का ओवरफ्लो बताया है।
A Himalayan collapse triggered a rapid flood that traveled 200km from the Nepal-Tibet border, causing fatalities in Nepal and reaching Maharajganj, India. Authorities issued warnings after the surge had already entered the river system.

नेपाल में विनाशकारी फ़्लैश फ़्लड से 469 लोगों की मृत्यु हो गई है और 977 लोग लापता हैं। आपदा के बाद चीन द्वारा समय पर चेतावनी न देने के आरोपों पर विवाद बढ़ गया है, हालांकि चीनी दूतावास ने इन दावों का खंडन किया है और सहयोग का वादा किया है।

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 332 लोगों की मौत हो गई है और 900 से अधिक लापता हैं। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लगभग 300 भारतीय शामिल हैं। ईशा फ़ाउंडेशन के 80 तीर्थयात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। रसुवागढ़ी सीमा चौकी का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है।

नेपाल के रसुवा ज़िले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के 100 से अधिक तीर्थयात्री फंस गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 21 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि की है, जबकि अन्य के परिवारों ने सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की है।
Nepal declined foreign search and rescue team offers after flash floods along the Bhotekoshi and Trishuli river systems killed at least 469 people and left hundreds missing, relying instead on domestic security forces.