
नेपाल में आई अचानक बाढ़ से 469 लोगों की मौत हुई है और 977 लोग लापता हैं, जिसके बाद चीन से समय पर सूचना न मिलने के आरोपों पर बहस छिड़ गई है।
नेपाल में विनाशकारी फ़्लैश फ़्लड से 469 लोगों की मृत्यु हो गई है और 977 लोग लापता हैं। आपदा के बाद चीन द्वारा समय पर चेतावनी न देने के आरोपों पर विवाद बढ़ गया है, हालांकि चीनी दूतावास ने इन दावों का खंडन किया है और सहयोग का वादा किया है।
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नेपाल और चीन की सीमा पर रसुवा-ग्यिरोंग क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। आपदा के बाद दोनों देशों के बीच रियल-टाइम डेटा साझा करने की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
नेपाल में फ़्लैश फ़्लड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक़, नेपाल की सेना ने अब तक 883 लोगों को सुरक्षित बचाया है।
वहीं, बीबीसी नेपाली के मुताबिक़, अधिकारियों ने बताया है कि 977 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
खोज, बचाव और राहत अभियान के लिए 13 हज़ार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रभावित इलाक़ों में राहत और बचाव का काम जारी है।
फ़्लैश फ़्लड के बाद चीन की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि चीन की ओर से नेपाल को आपदा से पहले समय रहते चेतावनी नहीं दी गई। दावा है कि अगर समय पर सूचना मिलती, तो नेपाल में जान-माल के नुक़सान को कम किया जा सकता था।
हालांकि, नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ख़बरों का खंडन किया है।
इस बीच इंटरनेशनल मीडिया में भी चीन की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। नेपाली न्यूज़ आउटलेट्स से लेकर चीनी मीडिया आउटलेट्स ने इस मुद्दे को रिपोर्ट किया है।
नेपाल में मौजूद चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन वायरल ख़बरों का खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने नेपाल को हादसे के बारे में पूर्व चेतावनी नहीं दी जिसकी वजह से नेपाल में इतनी तबाही मची।
एक्स पर जारी एक पोस्ट में चीनी दूतावास ने इन ख़बरों को फ़ेक बताया और लिखा, "26 अगस्त को नेपाल में भूकंप या ग्लेशियर ढहने से भूकंप जैसी स्थिति बन गई जिससे भूस्खलन हो गया और कई लोगों की मौत हो गई। इसके कारण नेपाल और चीन दोनों ही तरफ़ कई लोग लापता भी हो गए।"
पूरे मामले पर नेपाल में चीन के दूतावास ने एक बयान जारी किया है, जिसमें सूचना शेयरिंग नहीं करने के आरोपों को ख़ारिज किया है।
चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा है, ''रसुवा-ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ से चीन बेहद दुखी है और वह नेपाल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नेपाल की तरफ़ आए भूकंप के कारण हिमस्खलन और मलबे का बहाव हुआ, जिससे सीमा के दोनों ओर लोगों की मौत हुई और कई लोग लापता हैं。''
चीनी दूतावास ने कहा, ''भविष्य में हम मौसम, जल विज्ञान और भूगर्भीय जोखिमों से जुड़ी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान, ख़ासकर सीमा पार होने वाली आपदाओं के मामले समन्वय मज़बूत करेंगे। नेपाल और चीन पड़ोसी देश हैं और भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए इस आपदा से सबक़ लेते हुए दोनों देशों को अपनी तैयारियों को मज़बूत करना चाहिए, ताकि सीमा के दोनों ओर लोगों की जान और संपत्ति की बेहतर सुरक्षा हो सके।''
काठमांडू पोस्ट ने ल्हासा में नेपाल के कॉन्सल जनरल लक्ष्मी प्रसाद निरौला के हवाले से बताया है कि नेपाल और चीन, दोनों देशों के अधिकारी सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों से संपर्क स्थापित नहीं कर पा रहे हैं।
निरौला के मुताबिक़, संपर्क नहीं हो पाने के कारण बाढ़ की शुरुआत कहां से हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था, इस बारे में आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया कि चीनी अधिकारी भी अब तक यह निर्धारित नहीं कर पाए हैं कि बाढ़ किस स्थान से शुरू हुई और इसका वास्तविक स्रोत क्या था। प्रभावित इलाक़ों में संचार व्यवस्था ठप होने के कारण वहां से विश्वसनीय जानकारी हासिल करना मुश्किल हो रहा है।
नेपाल के प्रमुख न्यूज़ आउटलेट 'ऑनलाइन ख़बर' के मुताबिक़, बाढ़ के बाद चीन के साथ आपदा संबंधी सूचनाओं को रियल-टाइम में साझा करने की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग उठी है।
यह मांग नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' ने की है। गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में प्रचंड ने कहा कि रसुवा में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चीन के साथ सूचना साझा करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है।
काठमांडू के डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म उकेरा की रिपोर्ट के मुताबिक़, तिब्बत के केरुंग काउंटी में बुधवार सुबह क़रीब 10:30 बजे अचानक बाढ़ आई। नेपाल के समय के अनुसार यह क़रीब 8:15 बजे का वक़्त था।
रिपोर्ट के मुताबिक़, क़रीब 45 मिनट बाद बाढ़ का तेज़ बहाव नेपाल में भोटेकोशी नदी तक पहुँच गया।
उकेरा ने नेपाल की नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के प्रवक्ता शांति महत के हवाले से बताया कि नेपाल को बाढ़ की जानकारी चीन की ओर से नहीं मिली थी। रसुवा के मुख्य ज़िला अधिकारी ने स्थानीय समयानुसार क़रीब 9 बजे फ़ोन करके एनडीआरआरएमए को बाढ़ की जानकारी दी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल और चीन के बीच सीमा पार आपदाओं से जुड़ी रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को लेकर इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठे हैं।
नेपाल में पहले भी ग्लेशियल झील फटने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं के दौरान चीन से समय पर सूचना मिलने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जाता रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि चीन के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने चेतावनी दी थी या नहीं? साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक़, अब तक यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि चीन-नेपाल सीमा पर काम कर रहे अर्ली वार्निंग सिस्टम ने आपदा से पहले किसी असामान्य गतिविधि का पता लगाया था या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस घटना को लेकर कोई चेतावनी जारी की गई थी या नहीं।
इस सिस्टम से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक़, अर्ली वार्निंग सिस्टम अब तक सात बार समय रहते चेतावनी जारी कर चुके हैं। इनमें पिछले साल चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में जारी की गई एक चेतावनी भी शामिल है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बुधवार को हुई ताज़ा आपदा के मामले में भी इस सिस्टम ने कोई चेतावनी जारी की थी या नहीं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि चीनी डिजिटल न्यूज़पेपर 'द पेपर' ने चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ से जुड़े विशेषज्ञ कांग शिचांग से इस मामले पर बात की थी।
'द पेपर' से कांग शिचांग ने कहा था, "अगर पहाड़ के ऊपरी हिस्से में बर्फ़ और चट्टानों के खिसकने का पहले पता चल जाए, तो क़रीब 20 मिनट पहले चेतावनी दी जा सकती है।"
उन्होंने कहा कि इस इलाक़े में निगरानी के लिए पर्याप्त उपकरण मौजूद नहीं हैं। उनके मुताबिक़, इस बार बाढ़ का स्रोत नेपाल की तरफ़ बताया जा रहा है। ऐसे में सेंसर जब तक ख़तरे के संकेत पकड़ते हैं, तब तक मलबे और कीचड़ का तेज़ बहाव नीचे की ओर पहुँच चुका हो सकता है।
अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में तिब्बत से आने वाली सूचनाओं पर चीन के कड़े नियंत्रण का मुद्दा उठाया है।
रिपोर्ट में इंटरनेशनल कैंपेन फ़ॉर तिब्बत के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर रयान फियोरेसी के हवाले से कहा गया है कि इस व्यवस्था में सूचना का प्रवाह लगभग पूरी तरह चीनी सरकार के नियंत्रण में रहता है।
फियोरेसी के मुताबिक़, प्राकृतिक आपदा के दौरान इसका असर और गंभीर हो सकता है। स्थानीय लोग सज़ा के डर से यह जानकारी साझा करने से बच सकते हैं कि कौन लोग कहां फंसे हैं और किन इलाक़ों में सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है।
उन्होंने कहा कि अगर लोग ऐसी जानकारी साझा करने से डरते हैं या उनके सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए जाते हैं, तो महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्रभावित परिवारों, राहत और बचाव दलों तथा आम लोगों तक नहीं पहुंच पातीं।
इस बीच, नेपाल में फ़्लैश फ़्लड से हुई भारी तबाही के बाद चीन-नेपाल सीमा पर आपदा संबंधी सूचनाओं के रियल-टाइम आदान-प्रदान और अर्ली वार्निंग सिस्टम की प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज़ हो गई है।
हालांकि, अब तक यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि चीन की ओर से इस आपदा से पहले कोई चेतावनी उपलब्ध थी और उसे नेपाल तक साझा किया गया था या नहीं।
रिपोर्ट में लिखा गया, "कई ग्लेशियर और उनसे जुड़े ऊपरी हिस्सों में निगरानी का बुनियादी ढांचा चीन के क्षेत्र में है। ऐसे में अलर्ट सिस्टम के लिए दोनों देशों के बीच डेटा साझा करना और सीमा पार समन्वय जरूरी है।"

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में पानी और मिट्टी के बहाव के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ है। नेपाल में मरने वालों की संख्या 489 तक पहुंच गई है और 900 से अधिक लोग लापता हैं। चीनी अधिकारियों ने बांध टूटने की खबरों को खारिज करते हुए इसे पानी का ओवरफ्लो बताया है।
A Himalayan collapse triggered a rapid flood that traveled 200km from the Nepal-Tibet border, causing fatalities in Nepal and reaching Maharajganj, India. Authorities issued warnings after the surge had already entered the river system.

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 332 लोगों की मौत हो गई है और 900 से अधिक लापता हैं। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लगभग 300 भारतीय शामिल हैं। ईशा फ़ाउंडेशन के 80 तीर्थयात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। रसुवागढ़ी सीमा चौकी का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है।

नेपाल के रसुवा ज़िले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के 100 से अधिक तीर्थयात्री फंस गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 21 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि की है, जबकि अन्य के परिवारों ने सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की है।

नेपाल में बाढ़ के कारण 389 लोगों की मौत हो गई है और 910 लोग लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक, नेपाल सेना और पुलिस के कर्मी शामिल हैं। भारत और चीन समेत कई देश राहत कार्यों में जुटे हैं।
Nepal declined foreign search and rescue team offers after flash floods along the Bhotekoshi and Trishuli river systems killed at least 469 people and left hundreds missing, relying instead on domestic security forces.