वर्धा विश्वविद्यालय के छह निलंबित छात्रों की भूख हड़ताल जारी, मांगों में एफ़आईआर वापसी और निलंबन रद्द करना शामिल
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महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को निलंबित करने के बाद वे ज़िलाधिकारी कार्यालय के बाहर बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. इन छात्रों की मांग है कि उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर वापस ली जाए और निलंबन रद्द किया जाए. विश्वविद्यालय ने पहले उनकी कुछ मांगें मान ली थीं, लेकिन बाद में निलंबन की कार्रवाई की गई. छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी लंबित मांगों को नज़रअंदाज़ किया और आंदोलन के दौरान básica सुविधाओं तक पहुंच से वंचित रखा गया.
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छात्र पिछले चार साल से अपनी विभिन्न मांगों जैसे पीएचडी प्रवेश बहाल करना, वुमेन स्टडीज़ और फ़िल्म स्टडीज़ विभागों को विश्वविद्यालय में लाना और bess सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर ज्ञापन दे रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी मांगों को बार-बार नज़रअंदाज़ किया.
वर्धा यूनिवर्सिटीः छह निलंबित स्टूडेंट्स की बेमियादी भूख हड़ताल, क्या है पूरा मामला
Author, भाग्यश्री राउत
पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मराठी के लिए
प्रकाशित 3 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 5 मिनट
महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छह स्टूडेंट्स को निलंबित कर दिया गया.
अब ये सभी अपना निलंबन रद्द कराने और अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर वापस लेने की मांग को लेकर ज़िलाधिकारी कार्यालय के बाहर बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.
इन छात्रों में मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्र शामिल हैं. इनमें से तीन स्टूडेंट अनुसूचित जाति से, जबकि तीन ओबीसी से हैं.
20 अगस्त को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के बाहर ताला लगाकर प्रदर्शन करने के मामले में इन छह छात्रों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद 1 सितंबर को उन्हें निलंबित कर दिया गया.
विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई है और जांच जारी है.
जिन मांगों को लेकर छात्रों ने पहले प्रदर्शन किया था, उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान लिया था. लेकिन बाद में इन छात्रों को निलंबित कर दिया गया.
आंदोलन में कुल 250 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था. इनमें से केवल छह छात्रों के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई है.
छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक एफ़आईआर वापस नहीं ली जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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निलंबित स्टूडेंट्स में दो शिवपूरन सिंह पासी (प्रयागराज) और रामचंद्र (बुदेंलखंड क्षेत्र) यूपी के रहने वाले हैं.
जबकि तीन स्टूडेंट्स राजेश कुमार यादव (सिवान), निरंजन ओबेरॉय (गया) और राहुल कुमार ठाकुर (बक्सर) बिहार के हैं.
इसके अलावा, राकेश अहिरवार मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के रहने वाले हैं.
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स्टूडेंट्स का कहना है कि वे पिछले चार साल से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन दे रहे हैं. लेकिन उनकी मांगों को बार-बार नज़रअंदाज़ किया गया.
इन मांगों को पूरा कराने के लिए स्टूडेंट्स ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया. इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया.
फिर 8 जुलाई को आठ-दस स्टूडेंट्स धरने पर बैठ गए थे. इनका कहना है कि 2022 से पीएचडी में दाख़िले बंद हैं.
विश्वविद्यालय के दो विभाग- फ़िल्म स्टडी और विमेन स्टडी, को दूसरे विश्वविद्यालयों में ट्रांसफ़र कर दिया गया है.
प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स की मांग है कि इन विभागों को फिर से वर्धा विश्वविद्यालय में लाया जाए.
आंदोलन शुरू हुए कई दिन बीत गए. अगस्त महीना भी ख़त्म हो गया. इसके बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
इस दौरान आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक भवन के दरवाज़े बंद रखकर कामकाज जारी रखा. स्टूडेंट्स का कहना है कि इसका असर उन पर पड़ा.
उन्हें प्रशासनिक भवन में प्रवेश नहीं दिया जाता था. जिन दस्तावेज़ों की उन्हें ज़रूरत थी, वे भी प्रशासन की ओर से नहीं मिल रहे थे.
स्टूडेंट्स का कहना है कि इस दौरान मेस की स्थिति भी ख़राब हो गई.
जिस मेस में लगभग 700 विद्यार्थी भोजन करते हैं, उसकी हालत बिगड़ गई.
स्टूडेंट्स ने दावा किया कि 'खाने में कीड़े भी मिले थे.'
प्रशासनिक भवन के दरवाज़े खोले जाएं, इस मांग को लेकर स्टूडेंट्स ने 19 अगस्त को विश्वविद्यालय प्रशासन को एक पत्र दिया था.
इसके साथ ही उन्होंने 20 अगस्त को आंदोलन करने की चेतावनी भी दी थी.
जब 250 स्टूडेंट्स ने एडमिन ब्लॉक पर ताला जड़ा
इन सभी घटनाओं का असर 20 अगस्त को दिखाई दिया. उस दिन 250 स्टूडेंट्स आंदोलन में शामिल हुए.
इन स्टूडेंट्स में से कुछ ने एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक पर बाहर से ताला लगा दिया. विश्वविद्यालय का कहना है कि इसके कारण सभी कर्मचारी चार घंटे तक भवन के अंदर ही फंसे रहे.
इसके बाद विश्वविद्यालय ने 250 स्टूडेंट्स में से छह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई. उनके ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 221 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया.
1 सितंबर को इन छह स्टूडेंट्स को निलंबित कर दिया गया.
निलंबित स्टूडेंट्स में शामिल राहुल कुमार ने बीबीसी न्यूज़ मराठी से कहा, "हमें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही थीं, इसलिए हमने आंदोलन किया. लेकिन निलंबन के बाद हमें सीधे विश्वविद्यालय से बाहर निकाल दिया गया."
"हमें अपना सामान तक लेने नहीं दिया गया. अब आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय ने हमारी लगभग सभी मांगें मान ली हैं. विश्वविद्यालय ने स्वीकार कर लिया है कि हमारी मांगें सही थीं. फिर हमें निलंबित क्यों किया गया?"
उन्होंने कहा, "जब तक विश्वविद्यालय एफ़आईआर रद्द नहीं करता और हमारा निलंबन वापस नहीं लेता, तब तक हम अपनी बेमियादी भूख हड़ताल जारी रखेंगे."
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाक़ात की और इस मुद्दे पर चर्चा की.
विश्वविद्यालय ने मांगें मानी
स्टूडेंट्स की मांग के अनुसार, वुमेन स्टडीज़ और फ़िल्म स्टडीज़, दोनों विभागों को वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में फिर से शुरू करने का फ़ैसला प्रशासन ने लिया है.
इसके साथ ही पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क प्रमुख बीएस मिरगे ने बीबीसी न्यूज़ मराठी को बताया कि 2022-23 की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
उन्होंने कहा कि नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
निलंबन के आदेश पर विश्वविद्यालय का पक्ष
विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्रों ने बिना किसी अनुमति के 8 जुलाई को प्रशासनिक भवन के अंदर आंदोलन किया था. इससे दफ़्तर के कामकाज में बाधा आई.
विश्वविद्यालय ने यह भी कहा है कि 20 अगस्त को प्रशासनिक भवन पर बाहर से ताला लगा दिया गया था. इसके कारण सभी कर्मचारी चार घंटे तक अंदर बंद रहे.
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन में अगुवाई करने वाले स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई गई है. यह समिति पूरी घटना की जांच करेगी. जांच पूरी होने तक इन निलंबिन जारी रहेगा.
विश्वविद्यालय का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद स्टूडेंट्स के निलंबन पर अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा.
प्रकाश आंबेडकर ने की आलोचना की
What to Watch
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स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय निलंबन पर अंतिम फैसला लेगा
Very likely · Within weeks
छात्रों की भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक एफ़आईआर वापस नहीं ली जाती और निलंबन रद्द नहीं किया जाता
Very likely · Within days
Open Questions
- स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट कब आएगी?
- क्या निलंबित छात्रों पर लगाए गए एफ़आईआर के आरोप वापस लिए जाएंगे?
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन के दौरान básica सुविधाओं तक पहुंच क्यों रोकी?
- क्या निलंबित छात्रों को उनका सामान वापस मिलेगा?




