चुनाव आयोग की बैठक: एसआईआर और चुनावी प्रक्रियाओं पर अहम फैसले
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों के बाद आयोग ने प्रेस बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया, विपक्ष और सत्ता पक्ष की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।
Quick Look
केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों की बैठक के बाद मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कई फैसले लिए। विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताया, जबकि बीजेपी ने राहुल गांधी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
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Why It Matters
चुनाव आयोग के आयुक्तों के बीच मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया और ईसीआईनेट पोर्टल के प्रबंधन पर स्पष्टीकरण जारी किया है।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट आने के बाद शनिवार को केंद्रीय चुनाव आयोग की एक बैठक हुई जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए.
इस बैठक में मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए गए.
इस बैठक को लेकर चुनाव आयोग ने एक प्रेस बयान जारी किया है जिसमें बैठक में लिए गए अहम फ़ैसलों की जानकारी दी गई है.
हालांकि कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह प्रेस नोट अहम सवालों के जवाब नहीं दे पाया.
वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी पर 'झूठ बोलने' का आरोप लगाया है. जबकि एनडीए के अहम साझेदार चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि 'चुनाव आयोग की ओर से सर्वसम्मति से जारी स्पष्टीकरण इस मामले से जुड़ी सभी ग़लतफ़हमियों को दूर करता है.'
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की अपनी मांग और तेज़ कर दी.
अब शनिवार को हुई चुनाव आयोग की बैठक में कई फ़ैसले लिए गए हैं.
बैठक की जानकारी देते हुए चुनाव आयोग के डायरेक्टर जनरल (मीडिया) आशीष गोयल ने कहा कि 26 सितंबर को दिन में तीन बजे दिल्ली के निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग की बैठक हुई.
उन्होंने कहा, "आज की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद थे. बैठक में आयोग ने सर्वसम्मति से कई फैसले लिए."
चुनाव आयोग की बैठक में लिए गए फ़ैसलों में सबसे प्रमुख एसआईआर के मुद्दे को एड्रेस किया गया है. फ़ैसलों में कहा गया है-
जिन मतदाताओं को नामांकन में विसंगति या अन्य कारणों से नोटिस जारी किया गया है, उनके घर पर ही बीएलओ जाकर दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड करेंगे. ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर मतदाताओं को ईआरओ या एईआरओ कार्यालय में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा.
ज़िला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मज़दूरों, ग़रीबों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष शिविर और सहायता केंद्र स्थापित करें ताकि अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ा जा सके.
एसआईआर के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ अटैच्ड घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. ग़ैर एसआईआर अवधि के लिए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फ़ॉर्म लागू होंगे.
फ़ील्ड अधिकारियों को उनके क़ानूनी अधिकारों के मुताबिक़ ईसीआईनेट सिस्टम का इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई है. वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति ईसीआईनेट की दोबारा जांच करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिस्टम अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है.
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 अक्तूबर 2026 कर दी गई है, जबकि इनके निस्तारण की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है. इसके अलावा, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाख़िल करने की समयसीमा बढ़ाकर 12 अक्तूबर, 2026 कर दी गई है.
चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग का प्रेस नोट सवालों का जवाब देने में नाकाम रहा. उन्होंने एक्स पर लिखा, "चुनाव आयोग का आज का प्रेस नोट बेहद कमज़ोर, अधूरा और बहुत देर से आया है."
बीजेपी के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ़्रेंस कर राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि एसआईआर प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित है.
What to Watch
AI outlook — possibilities, not facts
विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी रहने की संभावना।
Likely · Within weeks
Open Questions
- एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं की वास्तविक संख्या क्या है?
- आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों का मूल कारण क्या था?


