
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर 13,705 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जिससे एबीवीपी को सभी केंद्रीय पदों पर कब्जा करने से रोका गया। शौकीन पूर्व एनएसयूआई सदस्य हैं और उन्होंने छात्र आवास समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए चुनाव लड़ा।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने तीन केंद्रीय पदों पर जीत हासिल की, जबकि एक पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के पास गया। शौकीन पूर्व एनएसयूआई सदस्य हैं और उन्होंने छात्र आवास समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए चुनाव लड़ा।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में वाइस प्रेसीडेंट के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार के दीपांशु शौकीन की जीत पर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है. उनकी जीत ने चारों केंद्रीय पैनल के पदों पर एबीवीपी को क़ब्ज़ा करने से रोक दिया.
दीपांशु एनएसयूआई के सदस्य रह चुके हैं. वो साल 2023 से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं और अपने कॉलेज में स्टूडेंट्स के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके हैं.
उन्होंने साल 2023 और 2024 के चुनावों में एनएसयूआई के लिए प्रचार किया और 2025 में संगठन से टिकट मांगा, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. इस बार भी उन्हें एनएसयूआई की तरफ़ से टिकट मिलने की संभावना थी.
दीपांशु ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में ये दावे करते हुए कहा, "एनएसयूआई के अंदरूनी मतभेदों की वजह से कई बाग़ी उम्मीदवारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा."
उनका यह भी आरोप है कि एनएसयूआई नेतृत्व की तरफ़ से उन पर ज़्यादा पैसे ख़र्च करने और अलग-अलग कैंपस में बड़ा चुनावी प्रभाव दिखाने का दबाव था.
एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस साल शुरुआत में शौकीन को संगठन की ओर से उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन बाद में उनसे नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया.
आरोप था कि शौकीन ने सार्वजनिक तौर पर 'एनएसयूआई में संगठनात्मक कमियों' की आलोचना की थी और उम्मीदवारों के चयन के तरीक़े पर सवाल उठाए थे.
दिलचस्प है दीपांशु की कहानी
डूसू चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल करने वाले दीपांशु शोकीन की कहानी दिलचस्प है.
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उस पॉडकास्ट में दिए इंटरव्यू में दीपांशु ने बताया कि वो एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता डीटीसी में कॉन्ट्रैक्ट पर बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं.
दीपांशु खेलों से भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने नेशनल स्तर की टग ऑफ़ वॉर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है. इसके अलावा वे कबड्डी और वुशू भी खेल चुके हैं.
इसके बावजूद उनका चुनावी अभियान मुख्य तौर पर छात्रों के मुद्दों पर केंद्रित रहा. उनकी प्रमुख मांगों में दिल्ली विश्वविद्यालय और सरकार की जवाबदेही, बेहतर कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतियों का सही तरीके से लागू होना शामिल रहा.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, "21 वर्षीय शौकीन ने सत्य निकेतन में एक पीजी हॉस्टल की इमारत गिरने के बाद स्टूडेंट्स की आवास संबंधी समस्याओं को उजागर करने के लिए जूते न पहनने का संकल्प लिया था. इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे."
पश्चिमी दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले शौकीन ने कहा कि छात्र के तौर पर बिताए चार वर्षों ने उन्हें छात्र राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज से बीए प्रोग्राम की पढ़ाई पूरी की और अब आर्ट्स फ़ैकल्टी में बौद्ध अध्ययन विभाग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं.
उन्होंने डूसू उपाध्यक्ष पद का चुनाव 13,705 वोटों के अंतर से जीता.
शौकीन को 30,615 वोट मिले. उन्होंने एबीवीपी के इशु मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले. एनएसयूआई के वीर चत्रथ 4,313 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
'इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी'
दीपांशु शौकीन ने पत्रकारों से कहा, "एक छात्र प्रतिनिधि के लिए राजनीतिक पार्टी से ज़्यादा यह मायने रखता है कि वह छात्रों के मुद्दों का प्रतिनिधित्व कैसे करता है और छात्रों की आवाज़ कैसे बनता है. इसलिए चुनाव जीतना मेरा एकमात्र मक़सद नहीं था."
"मेरा उद्देश्य पिछले चार सालों में छात्रों ने मुझ पर जो भरोसा जताया है और हमारे बीच जो जुड़ाव बना है, उसका सम्मान करना था. मैं उनके मुद्दों और उनकी आवाज़ का प्रतिनिधित्व करना चाहता था, जो मैंने किया. यही वजह है कि मैं यह चुनाव लड़ने के लिए आगे आया."
"निर्दलीय चुनाव लड़ना निश्चित रूप से मुश्किल है, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था और छात्र मेरे साथ थे, क्योंकि उन्हें मुझ पर विश्वास था. मैंने छात्रों के मुद्दों के लिए चुनाव लड़ा और छात्रों ने खुद यह साबित कर दिया कि जो भी उनके लिए आवाज़ उठाएगा और उनके साथ खड़ा रहेगा, वे उसका समर्थन करेंगे."
शौकीन ने कहा, "मुझे जीत की उम्मीद थी, लेकिन इतने बड़े अंतर से नहीं. अब मेरे लिए आगे क्या है, इस बारे में सोचना सबसे महत्वपूर्ण है."
शौकीन अपनी जीत को लेकर इतने आश्वस्त दिख रहे थे कि मतगणना के दौरान भी उनके चेहरे पर कोई तनाव या परेशानी नज़र नहीं आ रही थी.
उनका चुनाव प्रचार बड़े छात्र संगठनों के बड़े काफ़िलों और व्यापक लामबंदी वाले चुनाव में अलग नज़र आया.
इसके बजाय शोकीन ने छात्रों के साथ अपने सीधे संपर्क पर जोर दिया. उन्होंने अपने साथ प्रचार करने वालों को 'रीयल स्टूडेंट' बताया और अपने इलाके पीरागढ़ी के छात्रों के समर्थन का भी जिक्र किया.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, उन्होंने अपने नंगे पैरों की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैंने वादा किया था कि सबसे पहले मैं विरोध प्रदर्शन पर बैठूंगा."
उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों को उन्हीं समस्याओं का सामना करते देखा है, जिनसे वह ख़ुद गुज़रे हैं. इसी वजह से उन्होंने छात्र राजनीति में आने का फ़ैसला किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उन्हीं समस्याओं से न गुजरना पड़े.
छात्रसंघ को जवाबदेह बनाने का वादा
इन चुनावों में छात्र आवास शौकीन का प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा. इसके अलावा उन्होंने बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, फीस में बढ़ोतरी और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया.
शौकीन ने कहा कि छात्र राजनीति सिर्फ़ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "यह छात्र अधिकारों और छात्रों की आवाज़ के लिए होनी चाहिए."
शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में शौकीन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों का आभार जताया और कहा कि यह जीत उन छात्रों की है, जो कैंपस में 'वास्तविक मुद्दों' को उठाना चाहते हैं.
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "छात्रों ने भरोसा किया, मैंने सिर्फ़ उनकी आवाज़ बनने की कोशिश की. अब ज़िम्मेदारी और बढ़ेगी. मेरा वचन है कि एक दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक जवाबदेह छात्रसंघ बनेगा."
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन पदों पर कब्ज़ा कर लिया है, जबकि एक पद इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के खाते में गया है.
डीयू छात्रसंघ के चुनाव में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ने जीत हासिल की है.
वहीं, सेक्रेटरी पद पर एबीवीपी की रिया छावड़ी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर एबीवीपी के ही लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की है.
AI outlook — possibilities, not facts
दीपांशु शौकीन छात्र आवास समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके कैंपस नीति में बदलाव लाने का प्रयास करेंगे
Likely · Within months
एनएसयूआई आंतरिक सुधार प्रक्रिया शुरू करेगी ताकि बागी उम्मीदवारों की संख्या कम हो सके
Possible · Within months

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