
23 से 25 सितंबर 2026 तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की सरकारी यात्रा, एआई और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की संभावना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23-25 सितंबर 2026 को वॉशिंगटन का दौरा करेंगे। दोनों नेताओं के बीच एआई सुरक्षा, व्यापारिक टैरिफ और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
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अमेरिका और चीन के बीच पिछली उच्च-स्तरीय बैठक 14 मई 2026 को हुई थी। दोनों देशों के बीच टैरिफ और एआई सुरक्षा को लेकर लंबे समय से मतभेद और प्रतिस्पर्धा चल रही है।
चार महीने और 9 दिन के बाद दुनिया की दो सबसे ताक़तवर अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति फिर मिल रहे हैं. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच 14 मई 2026 को मुलाक़ात हुई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन दौरे पर गए थे.
इस बार अंतर सिर्फ़ इतना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत वॉशिंगटन में होगा, जो 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की सरकारी यात्रा पर रहेंगे. वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बुलावे पर जा रहे हैं.
दोनों राष्ट्रपतियों की मुख्य मुलाक़ात 24 सितंबर को वॉशिंगटन में होगी.
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों नेता अमेरिका-चीन संबंधों से जुड़े अहम मुद्दों के साथ दुनिया में शांति और विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से बात करेंगे. हालांकि, मुलाक़ात का पूरा और विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है.
बीबीसी न्यूज़ हिंदी के पॉडकास्ट 'दिन भर' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी ने कहा, "यह बैठक दोनों देशों के लिए सकारात्मक है. चीन के राष्ट्रपति शी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब दो युद्ध चल रहे हैं. राष्ट्रपति शी, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बुलावे पर जा रहे हैं."
उनका कहना है, "दोनों देशों के बीच टैरिफ़ को लेकर भी मतभेद हैं. एआई भी एक मसला है. अमेरिका और ताइवान के बीच रक्षा सामग्री से जुड़ी क़रीब 12-14 अरब डॉलर की डील भी हो रही है, जिसे चीन नहीं चाहता."
इस बैठक में ईरान को लेकर भी बातचीत हो सकती है, क्योंकि चीन और ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी है. रूस भी बातचीत का एक अहम मुद्दा हो सकता है, क्योंकि चीन अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का एक हिस्सा रूस से पूरा करता है. इसलिए इस बैठक के बाद कुछ अहम बातें सामने आ सकती हैं.
ईरान के साथ चीन के अच्छे संबंध हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ दोबारा बातचीत करना चाहते हैं. ऐसे में चीन इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है.
इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर बने गतिरोध पर भी बात हो सकती है और अगर चीन की मध्यस्थता में यह रास्ता खुल जाता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.
धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "चीन और अमेरिका के बीच हमेशा प्रतिस्पर्धा रहती है. राष्ट्रपति ट्रंप आम तौर पर इतनी जल्दी किसी से नहीं मिलते. ऐसे में दोनों राष्ट्रपतियों का मिलना दुनिया की राजनीति के लिए बड़ी बात होगी."
उनके मुताबिक़, "एआई को लेकर भी दोनों देशों के बीच मुक़ाबला है. ऐसी चर्चा है कि एआई के इस्तेमाल के नियम तय करने के लिए चीन और अमेरिका साथ आ सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज़ से देखें तो इन दोनों नेताओं का मिलना अपने आप में एक बड़ा संदेश है."
नवंबर 2023 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और शी जिनपिंग की कैलिफ़ोर्निया में हुई मुलाक़ात के बाद दोनों देशों ने एआई के ख़तरों और सुरक्षा पर सरकारी स्तर की बातचीत शुरू करने का फ़ैसला किया था.
इसके बाद मई 2024 में जिनेवा में अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच एआई के ख़तरों और सुरक्षा पर पहली औपचारिक सरकारी बातचीत हुई थी.
अक्तूबर 2025 में बुसान में हुई ट्रंप-शी मुलाक़ात के बाद भी चीन ने एआई को ऐसे क्षेत्रों में रखा था, जहां दोनों देश सहयोग कर सकते हैं.
इस बार नई बात यह है कि दोनों देश एआई से जुड़ी किसी गंभीर घटना के समय सीधे संपर्क और जानकारी साझा करने की व्यवस्था पर बात कर रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता ऑस्मंड चिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों ने एआई से जुड़ी घटनाओं की जानकारी एक-दूसरे को देने के लिए एक नई व्यवस्था बनाने पर चर्चा की है.
यह व्यवस्था ऐसी घटनाओं के लिए होगी, जिनका असर किसी देश की सुरक्षा पर पड़ सकता है.
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हफ़्ते वॉशिंगटन में मिलने वाले हैं.
पिछले कुछ दिनों से एआई को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है. शोधकर्ताओं ने इस तकनीक से होने वाले संभावित ख़तरों की चेतावनी दी है. एआई उद्योग से जुड़े कुछ जाने-माने लोगों ने भी इसे तैयार करने वाली कंपनियों से ज़्यादा सावधानी बरतने को कहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ़ की लड़ाई को लेकर हुआ समझौता 10 नवंबर को ख़त्म होने वाला है.
हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच एआई और तकनीक के क्षेत्र में आगे निकलने की होड़ चल रही है.
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका में एआई के विकास की रफ़्तार धीमी करने की मांग उठी है. इसकी वजह यह डर है कि इस तकनीक का इंसानों पर बुरा असर पड़ सकता है.
ट्रंप ने इन चिंताओं को काफ़ी हद तक ख़ारिज किया है. उनका कहना है कि एआई को लेकर पर्याप्त नीतियां पहले से मौजूद हैं और अमेरिका इस क्षेत्र में चीन से पीछे नहीं रह सकता.
उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था, "जो एआई में जीतेगा, वही विजेता होगा."
मई में शी जिनपिंग ने बीजिंग में ट्रंप की मेज़बानी की थी. उस मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने एआई के क्षेत्र में मिलकर काम करने के तरीक़ों पर भी चर्चा की थी.
रॉयटर्स की 21 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका और चीन एआई पर औपचारिक बातचीत शुरू करने और 'इंसिडेंट लाइन' बनाने पर सहमत हुए हैं.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, "दोनों देशों को इस बात पर सहमत होना होगा कि एआई से जुड़े सबसे बड़े ख़तरे कौन-से हैं."
उन्होंने ऐसे एआई एजेंट का ज़िक्र किया, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाए. इसके साथ ही उन्होंने एआई का इस्तेमाल करने वाले ग़ैर-सरकारी साइबर हमलावरों को भी ख़तरा बताया.
बेसेंट ने यह भी कहा कि एआई बनाने वाली कंपनियों को अपनी तकनीक के काम के लिए ज़िम्मेदारी लेनी होगी.
दोनों देश इस बात पर साझा समझ बनाना चाहते हैं कि एआई से जुड़े सबसे बड़े ख़तरे क्या हैं. इनमें नियंत्रण से बाहर जाने वाले एआई एजेंट और ग़ैर-सरकारी समूहों की ओर से एआई के ज़रिए किए जाने वाले साइबर हमले शामिल हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस मुलाक़ात में, एआई के अलावा व्यापार सबसे अहम मुद्दा हो सकता है. अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ़ को सीमित रखने वाली मौजूदा व्यवस्था 10 नवंबर को ख़त्म होनी है और इसे आगे बढ़ाने पर अभी सहमति नहीं बनी है.
इसके साथ चीन से मिलने वाले रेयर अर्थ खनिजों की सप्लाई, अमेरिकी कृषि उत्पादों और बोइंग विमानों की ख़रीद, फ़ेंटेनिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की रोकथाम और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री पर भी बात हो सकती है.
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एआई सुरक्षा के लिए 'इंसिडेंट लाइन' की स्थापना
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