
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने वीरमणि मामले में सीएसएएम सामग्री के प्रसारण पर रोक लगाते हुए कहा कि टीआरपी रेटिंग्स से ज़्यादा ज़रूरी चीज़ें भी ज़िंदगी में होती हैं। अदालत ने जॉन डो सिद्धांत लागू करते हुए मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों को वीरमणि मामले से जुड़े किसी भी वीडियो को प्रकाशित, प्रसारित, अपलोड, साझा या फैलाने से रोक दिया है। साथ ही, पहले अपलोड की गई सामग्री को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
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वीरमणि मामले में 29 अगस्त 2025 को ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि (84) को गिरफ़्तार किया गया था। उनके साथ शांति (55) और महेंद्र सिम्हन (60) को भी सह-आरोपी के रूप में गिरफ़्तार किया गया था। आरोप है कि महेंद्र सिम्हन के घर का इस्तेमाल वीरमणि 12 से 15 साल की उम्र के बच्चों के यौन शोषण के लिए करते थे। इन तीनों पर पॉक्सो कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पहली शिकायत 6 अक्तूबर 2025 को दर्ज की गई थी। उससे पहले एक अज्ञात व्यक्ति ने एक स्थानीय एनजीओ के दफ़्तर में पेन ड्राइव वाला एक लिफ़ाफ़ा छोड़ दिया था। स्थानीय अदालत ने भी इस मामले पर कुछ महीने पहले ही संज्ञान लिया था।
शुक्रवार को ये सख़्त टिप्पणी मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने की.
अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें टेलीविज़न चैनलों को चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़ मैटेरियल (सीएसएएम) के दृश्य प्रसारित करने से रोकने की मांग की गई थी.
टीआरपी यह बताती है कि किसी टीवी चैनल के विज्ञापनों या कार्यक्रमों ने कितने दर्शकों तक पहुंच बनाई.
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन तुलिर चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. यह संस्था बच्चों के यौन शोषण की रोकथाम और उनसे जुड़े मामलों में सहायता के लिए काम करती है.
उन्होंने उन कुछ टीवी चैनलों की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने आर वीरमणि से जुड़े मामले में सीसैम का प्रसारण किया था.
ग्रेनाइट कारोबारी और प्रभावशाली उद्योगपति आर. वीरमणि (84) को 29 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था. उनके साथ शांति (55) और महेंद्र सिम्हन (60) को भी सह-आरोपी के रूप में गिरफ़्तार किया गया था.
आरोप है कि महेंद्र सिम्हन के घर का इस्तेमाल वीरमणि 12 से 15 साल की उम्र के बच्चों के यौन शोषण के लिए करते थे. इन तीनों पर पॉक्सो कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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बीबीसी ने वीरमणि के दफ़्तर से संपर्क करने का प्रयास किया. वहाँ से जवाब मिलने इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
वीरमणि मामला अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है. इसकी वजह जांच में हुई कथित देरी है. इस मामले में पहली शिकायत 6 अक्तूबर 2025 को दर्ज की गई थी. उससे पहले एक अज्ञात व्यक्ति ने एक स्थानीय एनजीओ के दफ़्तर में पेन ड्राइव वाला एक लिफ़ाफ़ा छोड़ दिया था.
स्थानीय अदालत ने भी इस मामले पर कुछ महीने पहले ही संज्ञान लिया था. यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का कारण बन गया है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने धरापुरम और मदुरांतकम विधानसभा सीटों पर होने वाले दो उपचुनावों के प्रचार के दौरान पिछली डीएमके सरकार पर सवाल उठाए हैं.
ये उपचुनाव एआईएडीएमके के दो विधायकों के इस्तीफ़े के कारण हो रहे हैं. उन्होंने उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों से टीवीके के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफ़ा दिया था.
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जज ने याचिकाकर्ताओं की इस मांग से सहमति जताई कि 'जॉन डो' सिद्धांत लागू किया जाए. लेकिन इसके साथ उन्होंने एक अंतरिम आदेश भी जारी किया.
कानून में 'जॉन डो' सिद्धांत या निषेधाज्ञा एक ऐसा न्यायिक आदेश है जो अज्ञात या गुमनाम अपराधियों के ख़िलाफ़ जारी किया जाता है.
अदालत ने मीडिया संस्थानों, अन्य संस्थाओं, मध्यस्थों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों को वीरमणि मामले से जुड़े किसी भी वीडियो को प्रकाशित, प्रसारित, अपलोड, साझा, प्रसारित या किसी भी अन्य रूप में फैलाने से रोक दिया.
अदालत के निर्देश काफ़ी व्यापक थे.
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि जिन मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों ने इस मामले से जुड़ी सामग्री पहले ही अपलोड कर दी है, वे उसे तुरंत हटा दें.
अगर सामग्री नहीं हटाई जाती है, तो पुलिस को अगले 24 घंटों के भीतर उसे हटवाने का निर्देश दिया गया है.
इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी. उससे पहले अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल करनी होगी.
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि जांच एक बेहद अहम चरण में है.
उन्होंने कहा, "अगर इस समय न्यूज़ चैनलों पर नए विवाद या तस्वीरें अपलोड की जाती हैं, तो यह आशंका है कि दूसरे पीड़ित सामने आने से हिचक सकते हैं."
उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अपनी ज़िंदगी पर पड़ने वाले असर का डर हो सकता है और वे बयान दर्ज कराने से बच सकते हैं.
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने अदालत में मौखिक रूप से कहा, "इन वीडियो को समय से पहले प्रकाशित करने का दूसरे पीड़ितों पर नकारात्मक असर पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि अदालत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचनाओं के प्रसार के अधिकार को महत्व देती है.
लेकिन अदालत को 2009 के मुंबई आतंकी हमले की भी याद दिलाई गई.
उन्होंने कहा, "मीडिया में लगातार प्रसारण और कवरेज के कारण आतंकियों को क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों की गतिविधियों और रणनीतियों की जानकारी मिल गई थी."
"इसके बाद आतंकियों ने उसके जवाब में अपने क़दम उठाए. इससे सुरक्षा बलों की तैनाती का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो गया था."
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने कहा, "हर अधिकार के साथ एक ज़िम्मेदारी भी जुड़ी होती है."
उन्होंने कहा, "यह ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बच्चों के प्रति ही नहीं, बल्कि इस मामले में शामिल आरोपियों के प्रति भी होती है."
चार सीनियर महिला पुलिस अफ़सरों की टीम करेगी जांच
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (एसआईटी) हर हफ़्ते एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करेगी. डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल की गठित इस एसआईटी में चार वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी शामिल हैं.
यह एसआईटी कर्नाटक पुलिस के प्रज्वल रेवन्ना के ख़िलाफ़ कथित सिलसिलेवार दुष्कर्म मामलों की जांच के लिए बनाई गई महिला पुलिस अधिकारियों की एसआईटी की तर्ज़ पर बनाई गई है.
प्रज्वल रेवन्ना पूर्व सांसद हैं. वह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते हैं.
संयोग से प्रज्वल का मामला भी एक पेन ड्राइव के ज़रिए सामने आया था. ऐसी सैकड़ों पेन ड्राइव सार्वजनिक स्थानों पर फेंकी गई थीं.
यह एसआईटी तब बनाई गई, जब तमिलनाडु पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद कथित निष्क्रियता को लेकर दो वरिष्ठ अधिकारियों को 'कंपल्सरी वेट' पर भेज दिया.
इनमें से एक अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक के थे. दोनों पुलिस अधिकारी चेन्नई सिटी पुलिस में शीर्ष पदों पर तैनात थे.
इंडियन कम्युनिटी वेलफ़ेयर ऑर्गनाइज़ेशन (आईसीडब्ल्यूओ) के हरिहरन ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "हमें 6 अक्तूबर 2025 को सुबह 10.30 बजे एक लिफ़ाफ़े में पेन ड्राइव मिली थी."
"दोपहर एक बजे तक हमने इसे एंटी-वाइस पुलिस को सौंप दिया था. हमने पॉक्सो एक्ट की धारा 19(1) के तहत क़ानून के अनुसार कार्रवाई की."
"उसमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े स्पष्ट वीडियो थे."
"अगले दिन यानी 7 अक्तूबर 2025 को एफ़आईआर दर्ज की गई."
एक हैरान करने वाले घटनाक्रम में पुलिस ने फ़रवरी 2026 में निचली अदालत में क्लोज़र रिपोर्ट दाख़िल कर दी. पुलिस ने इसके लिए "पर्याप्त सबूत न होने" का हवाला दिया.
हालांकि, पॉक्सो अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
हरिहरन ने कहा, "हम यह नहीं कह सकते कि क्यों, लेकिन इस मामले की जांच में देरी हुई."
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, तुलिर चैरिटेबल ट्रस्ट की वकील दीपिका मुरली ने अदालत को बताया कि आगे की जांच में कुछ अतिरिक्त सामग्री सामने आई है.
उन्होंने कहा, "शुरुआती पीड़ित के अलावा पुलिस ने कई अन्य पीड़ितों की पहचान की है. पुलिस ने उनके बयान भी दर्ज किए हैं."
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
टीवीके के दो मंत्रियों, आधव अर्जुना और आर. निर्मल कुमार ने पिछली डीएमके सरकार पर वीरमणि मामले की जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया.
आधव ने यहां तक कहा कि डीएमके सरकार के पास अपने मंत्रियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग क़ानून हैं.
इस पर पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जवाब दिया. उनके पास गृह विभाग भी था.
उन्होंने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "डीएमके किसी को बचाने के लिए मजबूर नहीं थी."
हालांकि शुक्रवार को मुख्यमंत्री विजय ने मदुरांतकम में एक चुनावी रैली के दौरान इस मुद्दे पर खुलकर हमला बोला.
उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति लड़कियों का शोषण करता रहा, लेकिन इस मामले को दबा दिया गया. पूरा राज्य पूछ रहा है कि इसके पीछे क्या समझौता है. स्टालिन सर, कृपया इस पर बोलिए. हमने उसे जेल भेज दिया है, लेकिन बाकी लोगों के बारे में अभी भी कुछ नहीं कहा गया है. ये सभी छोटी बच्चियां हैं."
"अगर आप उनके दर्द के बारे में नहीं बोल सकते, तो फिर आप कैसी राजनीति कर रहे हैं? हमें पता है कि वीरमणि का समर्थन कौन कर रहा था."
तो क्या वीरमणि मामला इन दो उपचुनावों में एक राजनीतिक हथियार बन गया है?
कांग्रेस के प्रवीण चक्रवर्ती और बीजेपी की ख़ुशबू सुंदर, दोनों ऐसा नहीं मानते.
चक्रवर्ती ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "यह साफ़ है कि इन युवा लड़कियों के साथ जो हुआ, वह बेहद घिनौना है."
"हम इस मामले की पूरी तरह खुली और निष्पक्ष जांच की हर कोशिश का समर्थन करते हैं."
"इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि इसमें कौन शामिल है, कौन शामिल नहीं है, या कौन सी पार्टी जीती."
"यही हमारा रुख़ है."
"यह राजनीतिक हथियार कैसे हो सकता है?"
"मामले की गंभीरता को देखिए."
ख़ुशबू सुंदर ने कहा, "कुछ सच ऐसे होते हैं जिन्हें लोगों के सामने रखा जाना चाहिए. मुझे नहीं पता कि इसे कितने वर्षों तक छिपाकर रखा गया. मुझे नहीं लगता कि यह कोई राजनीतिक हथियार है, क्योंकि टीवीके को इस पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है."
"वे अपने दम पर काफ़ी अच्छा कर रहे हैं. हम सभी जानते हैं कि उपचुनाव में माहौल टीवीके के पक्ष में है."
उन्होंने मामले की जांच में हुई भारी देरी की आलोचना की.
उन्होंने कहा, "2024 में ही डीएमके गठबंधन के एक कांग्रेसी नेता ने इस मुद्दे पर बात की थी. डीएमके चुप रही."
"फिर 2025 में वीडियो रखने वाले व्यक्ति ने कहा कि यह वीरमणि है. तब भी डीएमके सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया. जब हम डीएमके से सवाल पूछते हैं, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता."
हालांकि चक्रवर्ती ने इस मामले को अपनी पार्टी के नज़रिए से देखा. कांग्रेस टीवीके सरकार का समर्थन करती है.
उन्होंने कहा, "यह उपचुनावों का मामला नहीं है. यह एक बेहद गंभीर मामला है, जो लगता है कि लंबे समय से चल रहा था. हम एसआईटी बनाने के लिए सरकार और मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हैं."
डीएमके का बचाव
हालांकि डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि टीवीके इस मामले को चुनावी मुद्दा बना रही है.
उन्होंने कहा, "जब से विजय सत्ता में आए हैं, हर बात पर उनका ध्यान डीएमके को कोसने पर रहा है. उन्होंने चुनाव के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं किए हैं. समाज का हर वर्ग प्रदर्शन कर रहा है. लोग विजय से नाराज़ हैं, लेकिन वह हर बात के लिए डीएमके पर आरोप लगाते रहते हैं. उन्होंने तमिलनाडु के लोगों के लिए कोई अच्छा काम नहीं किया है."
उन्होंने कहा, "लेकिन विजय उन आरोपों का जवाब नहीं देते जिन्हें हमने विधानसभा में उठाया है. हिरासत में 10 मौतें हुई हैं. एक ही दिन में आठ हत्याएं हुईं और पॉक्सो के सैकड़ों मामले सामने आए हैं. उन्होंने इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की है."
एलंगोवन ने कहा, "सत्ता में आने के बाद दो मंत्रियों ने वीरमणि और अन्य लोगों के साथ एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. वीरमणि का डीएमके से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है."
AI outlook — possibilities, not facts
मद्रास हाई कोर्ट में वीरमणि मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी और अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल की जाएगी।
Very likely · Within days
पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) हफ्ते में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके जांच की प्रगति बताएगी।
Very likely · Within weeks
वीरमणि मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेगा, विशेष रूप से आगामी उपचुनावों के दौरान।
Likely · Within weeks
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